पंकजा मुंडे के घोटाले पर हाई कोर्ट की मोहर, प्रोटीनयुक्त आहार के 6300 करोड़ के ठेके रद्द

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औरंगाबाद/मुंबई: मुंबई हाईकोर्ट के औरंगाबाद खंडपीठ ने अपने अहम फैसले को सुनाते हुए महाराष्ट्र सरकार के बड़े ठेके रद्द किए हैं। राज्य के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत 6300 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए थे। बीजेपी सरकार के फैसले को इस तरह से पहली बार पलटा गया है। बीजेपी नेता पंकजा मुंडे इस विभाग की मंत्री हैं।

पंकजा के अधीन महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने राज्यभर की आंगनवाड़ियों के जरिये गर्भवती महिला और 6 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए प्रोटीनयुक्त खाना खिलाने की मुहिम के टेंडर निकाले थे। इस तहत कुल 7 साल के लिए ठेके दिए गए। जिसकी कीमत 6300 करोड़ रुपये आंकी गई। इन फैसलों का लाभ राज्य के केवल 3 ठेकेदारों को मिलता देख उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सरकारी आदेश के खिलाफ 7 याचिका दायर हुई थी।सोमवार को हाईकोर्ट ने ठेके दिलाने के सरकारी नियम को गलत करार दिया।

याचिकाकर्ताओं के वकील ज्ञानेश्वर बागुल ने औरंगाबाद में मीडियाकर्मियों को बताया कि कोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया के तहत राज्य को 70 ब्लॉक्स में विभाजित करने का फैसला गलत करार दिया है। सरकार ने इसी के तहत टेंडर दिए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह राज्य में इस काम को करने लायक योग्य संस्थाओं का सर्वे कर अगली कार्रवाई करें।

कोर्ट के इस आदेश के बाद उस विभाग की मंत्री पंकजा मुंडे विपक्ष के निशाने पर हैं। वैसे पंकजा का विवादों से पुराना नाता है। इस से पहले वे चिक्की स्कैम के आरोप झेल चुकी हैं। हाल ही में उनके विभागों में फेरबदल कर मुख्यमंत्री फडणवीस ने उनके पर कतर दिए। जिसके बाद वे सार्वजनिक रूप से टि्वटर पर मुख्यमंत्री से भिड़ गई। सिर्फ इतना ही नहीं, पंकजा समर्थकों ने बीड़ में मुख्यमंत्री फडणवीस का पुतला फूंक दिया।

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता अनंत गाडगिल ने NDTV इंडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस के किसी नेता को लेकर ऐसा फैसला आता तो पार्टी उसे तुरंत उसके पद से दूर कर देती। ऐसे में नैतिकता के आधार पर बीजेपी को फैसले लेने होंगे। लेकिन यहाँ गत दो साल से एक के बाद एक आरोप झेल चुके लोगों को हटाने के बजाए मौजूदा सरकार में पहले से विवादित लोगों को शामिल किया जा रहा है।

बहरहाल कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देने के लिए पंकजा मुंडे उपलब्ध नहीं हो सकी। उनके सिंगापुर में होने की वजह से उनके विभाग ने एक प्रेस रिलीज के जरिए दावा किया है कि मीडिया की खबरें गलत हैं और कोर्ट ऑर्डर प्राप्त होने के बाद विभाग के द्वारा इस मुद्दे पर तफसीलवार खुलासा किया जाएगा।

Courtesy-NDTV

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