सोनिया गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाती चुनाव याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सोमवार को खारिज कर दिया है। इस याचिका में सोनिया पर धर्म के नाम पर वोट मांगने और चुनाव जीतने के लिए भ्रष्ट तरीके अपनाने का आरोप लगाया गया था, अदालत ने इसे भी नकार दिया।

याचिकाकर्ता रमेश सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि सोनिया को भारतीय नागरिकता अधिनियम की धारा 5(1)(सी) के तहत 30 अप्रैल 1983 को नागरिकता दी गई थी। उनका कहना है भारत में नागरिकता दो तरह से मिलती है। पहली जन्मजात दूसरी जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा कानून के जरिए प्रदान की जाए।

इस आधार पर कहा गया था कि दूसरे वर्ग के पंजीकृत नागरिक ‘असल’  में भारतीय नागरिक नहीं माने जा सकते। संविधान के अनुच्छेद 84 की परिभाषा में भारत में जन्मे या भारतीयों के वंशज भारतीय होने की योग्यता रखते हैं। इसीलिए केवल वही लोकसभा में चुने जा सकते हैं।

ऐसे में सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता अधिनियम सेक्शन 5(1)(सी) के तहत दी गई नागरिकता पहले वर्ग के समान नहीं माना जाना चाहिए। इस सेक्शन को खत्म कर दिया जाना चाहिए।

सिटीजन ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन सिटीजन’ दोनों अलग

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सिटीजन ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन सिटीजन’ दोनों अलग अलग हैं। सोनिया गांधी ‘इंडियन सिटीजन’ हैं और उन्हें मतदाता केरूप में भी पंजीकृत नहीं किया जाना चहिए।

अपने निर्णय में जस्टिस तरुण अग्रवाल ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता खुद यह स्वीकार कर चुके हैं कि 30 अप्रैल 1983 को सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता दे दी गई थी।

इस प्रक्रिया से सोनिया गांधी द्वारा नागरिकता पाने को उन्होंने कोई चुनौती नहीं दी है। वहीं तीन दशक बाद इस तरह की कोई शिकायत पर विचार भी नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर याचिका कर्ता के वकील हरिशंकर जैन को लेकर जस्टिस ने कहा कि वे खुद 1999 में चुनाव लड़ चुके हैं और हार चुके हैं।

उन्होंने भी चुनाव याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में भी इस निर्णय को सही माना। याचिकाकर्ता ने  जो दलीलें दी हैं और सुझाव दिए हैं, उनका कोई स्रोत वे नहीं बता सके। ऐसे में इसे भी खारिज किया जाना चाहिए।

काल्पनिक सवालों पर विचार की जरूरत नहीं

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भारतीय नागरिकता अधिनियम सेक्शन 5(1)(सी) को लेकर कोर्ट ने कहा कि जब इस प्रक्रिया के तहत किए गए पंजीकरण को ही याचिका में चुनौती नहीं दी गई है तो फिर सेक्शन की वैधता पर पूछे गए काल्पनिक सवालों का जवाब देने में हाईकोर्ट की कोई रुचि नहीं है।

सोनिया गांधी पर भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकरण यथावत है, इसे न कैंसिल किया गया है, न उन्होंने इसे वापस लिया है। ऐसे में सोनिया गांधी भारत की नागरिक हैं।

याचिका को हाईकोर्ट ने आदेश 6 नियम 16 के तहत माना जिसमें याचिका को गैर जरूरी,अपमानपूर्ण और अफसोसजनक श्रेणी में रखते हुए कोर्ट की कार्रवाई का दुरुपयोग करार दिया जाता है।

बुखारी ने मुसलमानों से अपील की, सोनिया मुसलमान नहीं

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याचिका में न्यूज चैनलों की खबरों के आधार पर कहा गया कि सोनिया गांधी ने 31 मार्च 2014 को नई दिल्ली के जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी से अपने आवास पर मुलाकात की थी।

चार अप्रैल 2014 को बुखारी ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर कांग्रेस पार्टी को अपना समर्थन जताया और मुस्लिम समुदाय से कांग्रेस पार्टी को वोट करने की अपील की। इसका प्रभाव मुस्लिम समुदाय पर पड़ा और सोनिया गांधी चुनाव जीत गईं।

हाईकोर्ट ने कहा कि सोनिया गांधी और बुखारी की मुलाकात 1 अप्रैल 2014 को हुई और उन्होंने अपना नामांकन 2 अप्रैल को भरा। जनप्रतिनिधि अधिनियम के सेक्शन 123(3) के अनुसार उम्मीदवार द्वारा इस तरह की अपील को भ्रष्ट आचरण माना गया है।

वहीं, बुखारी ने मुस्लिम मतदाताओं से कांग्रेस को वोट देने की अपील की थी, जबकि सेक्शन के अनुसार ‘स्वयं के धर्म, जाति, नस्ल, भाषा, समुदाय को वोट देने की अपील’ को भ्रष्ट आचरण माना गया है। सोनिया गांधी उस समय न तो उम्मीदवार थीं और न हीं वे मुसलमान हैं। ऐसे में इसे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

इटली की नागरिकता पर भी उठाए सवाल

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याचिका में यह भी कहा गया कि सोनिया गांधी 9 दिसंबर 1946 में इटली के लुसियाना गांव में जन्मीं। उनका असली नाम अनोटिनिया मानियो है। राजीव गांधी से उन्होंने 25 फरवरी 1968 में शादी की और नाम बदलकर सोनिया गांधी रख लिया।

याचिकाकर्ता के अनुसार सोनिया गांधी आज भी इटली की नागरिक हैं क्योंकि उन्होंने इटली की नागरिकता छोड़ी नहीं है। इटली का कानून दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है।

इस वजह से सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं कही जा सकतीं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह केवल निरर्थक आरोप है। इसका कोई आधार नहीं दिया गया, ऐसे में कोई जांच की भी जरूरत नहीं है।

Courtesy: Amarujala

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