हमें नहीं पता, कैसे बनते हैं शहीद

हमें नहीं पता, कैसे बनते हैं शहीद

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मेरठ : शहीद को लेकर आरटीआइ के तहत मांगी गई सूचना के मिले जवाब ने एंग्री यूथ वेलफेयर सोसायटी को सोच में डाल दिया है। गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि उन्हें नहीं पता कि कैसे शहीद का दर्जा दिया जाता है। जवाब मिलने के बाद वेलफेयर सोसायटी ने अब शहीद की कानूनी परिभाषा तय करने की मांग की है।

एंग्री यूथ वेलफेयर सोसायटी के सदस्य कंकरखेड़ा निवासी शुभम गुप्ता ने जून में केंद्र सरकार से आरटीआइ के माध्यम से शहीद के संबंध में तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसे शहीद का दर्जा कैसे देते हैं? किन कानूनी अधिकारों और मानकों के आधार पर शहीद का दर्जा दिया जाता है? क्या राज्य अपने स्तर पर किसी को शहीद का दर्जा दे सकता है? गृह मंत्रालय ने अब जवाब भेजा है। इसमें केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी दिनेश माहुर ने बताया है कि किसी व्यक्ति को शहीद का दर्जा देने संबंधी जानकारी उनके पास नहीं है। केंद्रीय सशस्त्र बलों के संदर्भ में शहीद की भी कोई परिभाषा उनके पास नहीं है। हां कर्तव्य निर्वहन के दौरान मौत होने पर मृतक के परिजनों को तमाम लाभ देने का प्रावधान जरूर है। तीसरे बिंदु पर भी जानकारी नहीं होने की बात कही गई। सोमवार को वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने डीएम कार्यालय में ज्ञापन देकर शहीद के संबंध में मानक और कानूनी परिभाषा तय करने की मांग की। इस अवसर पर संजय सिंह, राहुल सिंहा, प्रदीप पुंडीर, विक्रम चौधरी, नरेश कुमार आदि मौजूद रहे।

Courtesy: Jagran.com

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