पेड़ के नीचे लगती है क्लास, कमरे में छाता लगाकर बैठते हैं हैडमास्टर

पेड़ के नीचे लगती है क्लास, कमरे में छाता लगाकर बैठते हैं हैडमास्टर

school-7_1468851040ग्वालियर।बारिश ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों के असली हालात उजागर कर दिए हैं। सरकार खुद के स्कूलों में सारे जरूरी मानकों को भूल जाती है। बारिश का मौसम शुरू होते ही स्कूलों की छत टपकने लगती है, तो किसी की बिल्डिंग इस काबिल ही नहीं रहती कि वहां क्लास ली जा सके। कुछ स्कूलों में खुद हैडमास्टर को अपने कमरे में छाता लगाकर बैठना पड़ता है। टपके से बचने सिर के ऊपर किताब कर लेते हैं बच्चे, उमस से बेहाल बनियानपायजामा पहन पढ़ाते हैं टीचर….
– छतों से पानी टपकने के कारण बच्चों की कापी किताबें भीग जाती है।
– गर्मी और उमस, स्कूलों बिजली नहीं तो पंखे कहां से चलें लिहाजा टीचर पायजामा-बनियान पहनकर पढ़ाते हैं।
– स्कूल की छत चटक रही है, बारिश में कोई हादसा न हो जाए इसलिए क्लास बाहर पेड़ के नीचे लगाई जाती हैं।
– बारिश होते ही छत से पानी टपकने लगता है, तो स्कूल की छुट्‌टी कर दी जाती है।
– मैदान में भरा बारिश का पानी तो घुटनों तक कीचड़ युक्त पानी में चलकर बच्चे पहुंचते हैं स्कूल।

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Courtesy: Bhaskar.com

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