यह कैग रिपोर्ट एलपीजी सब्सिडी पर मोदी सरकार के दावे की पोल खोलती है

यह कैग रिपोर्ट एलपीजी सब्सिडी पर मोदी सरकार के दावे की पोल खोलती है

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केंद्र का दावा है कि रसोई गैस सब्सिडी पर उसके नए अभियान से वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2015-16 में होने वाली बचत का आंकड़ा करीब 22 हजार करोड़ रु तक जाएगा. यह अभियान दो स्तरों पर चलाया जा रहा है. एक तरफ उपभोक्ताओं तक उनके बैंक खाते के जरिये सब्सिडी सीधे पहुंचाई जा रही है. दूसरी ओर सक्षम उपभोक्ताओं से कहा जा रहा है कि देशहित में वे खुद ही सब्सिडी छोड़ दें. इसे ‘गिव इट अप’ अभियान के नाम से प्रचारित किया जा रहा है.

लेकिन कैग की एक रिपोर्ट इस दावे की हवा निकालती दिखती है. द हिंदू की एक खबर के मुताबिक यह रिपोर्ट संसद के मॉनसून सत्र के दौरान ही सदन के पटल पर रखी जानी है. इसके मुताबिक प्रत्यक्ष बैंक हस्तांतरण (डीबीटी) और स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने वाली योजना से होने वाले फायदे का आंकड़ा दो हजार करोड़ रु से भी कम है. बाकी करीब 20 हजार करोड़ रु की बचत इसलिए हुई है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी के दामों में नाटकीय रूप से भारी गिरावट आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक कैग के ऑडिट के दौरान डीबीटी योजना में बड़ी व्यवस्थागत खामियां भी पाई गई हैं. जैसे घरेलू एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने वाली एलपीजी पर दिया जा रहा है.

डीबीटी योजना मोदी सरकार ने नवंबर 2014 में शुरू की थी. इसके तहत सब्सिडी की रकम सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में भेज दी जाती है. 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि डीबीटी और ‘गिव इट अप’ अभियान से दलालों और ब्लैक मार्केटिंग करने वालों को चोट पहुंची है जिससे गैस सब्सिडी के नाम पर हर साल होने वाली 15 हजार करोड़ रु की चोरी रुकी है.

लेकिन कैग रिपोर्ट कुछ और ही कहती है. इसके मुताबिक सब्सिडी के बजट में आई गिरावट में बड़ी भूमिका अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में आई भारी कमी है. भारत बड़ी मात्रा में एलपीजी का आयात करता है. सरकार की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनैलिसिस सेल के मुताबिक 2014-15 में सरकार को इस आयात के लिए 36,571 करोड़ रु खर्च करने पड़े थे. 2015-16 में यह आंकड़ा गिरकर 25,626 करोड़ हो गया. यानी कीमतों में कमी के चलते एक साल में 10,945 करोड़ रु की बचत अपने आप ही हो गई. दिलचस्प बात यह भी है कि इस दौरान एलपीजी का आयात बढ़ा भी. पहले साल यह 8313 हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) था तो दूसरे साल यह 8885 टीएमटी हो गया.

Courtesy: Satyagrah

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