NGT का सख्त निर्देश: UP के मुख्य सचिव से कहा- 3 दिन में मुहैया कराएं स्वच्छ पानी

NGT का सख्त निर्देश: UP के मुख्य सचिव से कहा- 3 दिन में मुहैया कराएं स्वच्छ पानी

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मेरठ. वेस्ट यूपी के जिन 6 जिलों के गांवों में दूषित पानी की वजह से बीमारी फैल रही है, वहां अभी तक सरकार और शासन द्वारा कोई कदम न उठाए जाने पर एनजीटी ने कड़ी आपत्ति जतायी है। एनजीटी के जस्टिम स्वतंत्र कुमार ने मंगलवार को अपने आदेश में कहाकि यूपी के मुख्य सचिव तीन दिन के अंदर गांवों के लोगों को स्वच्छ पानी मुहैया कराएं। आगे पढ़िए एनजीटी के जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने क्या कहा

– एनजीटी के जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगायी।

– कहा कि निर्दोष लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

– जस्टिम ने सरकार और सरकारी अधिकारियों के इस बर्ताव को जनता के प्रति दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

– एनजीटी ने आदेश दिए हैं कि प्रदेश के मुख्य सचिव तीन दिन में उन गांवों में स्वच्छ पानी मुहैया कराएं जहां की शिकायत मिली है।

– यह भी कहा कि मुख्य सचिव अपनी देखरेख में एक कमिटी का गठन करें।

– इस कमिटी में यूपी प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन, मेंबर सेक्रेट्री, तथा यूपी जल निगम के एमडी या सीईओ को शामिल किया जाए।

– इस कमिटी कोअपनी रिपोर्ट समय से देने के लिए कहा गया है।

– यदि रिपोर्ट में किसी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी की गई तो कमिटी के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी एनजीटी दे चुकी है आदेश

– जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कहा कि पहले भी उन गांवों में स्वच्छ पानी उलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे जहां पानी खराब था।

– यह आदेश 5 अगस्त 2015 और 5 नवंबर 2015 को भी एनजीटी ने आदेश दिए थे।

– लेकिन सरकार और अधिकारियों ने एनजीटी के आदेशों का पालन नहीं किया है।

ये दिए थे एनजीटी ने आदेश

– एनजीटी ने अपने 5 नवंबर 2015 के आदेश में उन हैंड पम्पों को सील करने के निर्देश दिए थे जिनका पानी दूषित हो गया है।

– लेकिन अधिकारियों ने केवल इन हैंडपम्पों को लाल रंग का निशान लगाकर छोड़ दिया।

– ये हैंड पम्प सील न होने की वजह से लोगों इनसे दूषित पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं।

– दोआबा पर्यावरण समिति के चेयरमैन डा.चंद्रवीर सिंह ने बताया कि दूषित पानी को लेकर सरकार और अधिकारी गंभीर नहीं हैं।

– उन्होंने बताया कि समिति ने यह मामला एनजीटी के सामने वर्ष 2014-15 में दाखिल किया था।

– उसके बाद जितने भी आदेश हुए उन्हें केवल कागजों में दिखा दिया गया, धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ।

– एनजीटी ने पानी के टैंकरों से स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे, लेकिन पानी नहीं पहुंचा।

– पानी के टेस्ट भी सही नहीं कराए जाते जिससे उसकी वास्तविकता पता नहीं चलती।

– अधिकारियों ने यह तक कहा कि पानी की जांच कराने के लिए उनके पास पर्याप्त बजट नहीं है।

– डा.चंद्रवीर सिंंह ने बताया कि आज भी लोग दूषित पानी पीकर बीमार हो रहे हैं।

बीमार बच्चों को लेकर पहुंचे एनजीटी

– डा.चंद्रवीर सिंह ने बताया कि मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होनी थी।

– एनजीटी ने 15 मई 2016 को हुई सुनवाई के दौरान अधिकारियों से दूषित पानी पीने से बीमार हुए बच्चों और लोगों की सूची मांगी थी।

– जिसके चलते आज दोआबा पर्यावरण समिति उन बीमार बच्चों को साथ लेकर एनजीटी पहुंची जो दूषित पानी की वजह से बीमार थे।

– बीमार बच्चों की दुर्दशा देखकर एनजीटी ने यूपी सरकार और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगायी।

– जो बच्चे एनजीटी के सामने पेश किए गए उनमें हड्डियों की बीमारी मुख्य रूप से थी।

इन 6 जिलों का मामला चल रहा है एनजीटी में

– दोआबाद पर्यावरण समिति ने यूपी के बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के गांवों में दूषित पानी पीने से होने वाली बीमारी का मामला उठया हुआ है।

– समिति की ओर से कहा गया था इन जिलों के ऐसे कई गांव है जहां पानी पूरी तरह दूषित हो गया है।

– दूषित पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। इन लोगों में पेट संबंधी बीमारी, कैंसर और त्चचा रोग फैल रहे हैं।

Courtesy: Bhaskar.com

Categories: Politics, Regional

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