पावर ऑफ अटॉर्नी वाली प्रॉपर्टी नहीं मानी जाएगी बेनामी!

पावर ऑफ अटॉर्नी वाली प्रॉपर्टी नहीं मानी जाएगी बेनामी!

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नई दिल्ली
सरकार एक बिल में संशोधन का प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है ताकि पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए हासिल की गई प्रॉपर्टी को बेनामी न करार दिया जाए। ऐसा संशोधन हो जाने पर रियल एस्टेट के मामले में बहुत लोगों को राहत मिलेगी। दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि सरकार बेनामी ट्रांजैक्शंस (प्रोहिबिशन अमेंडमेंट) बिल, 2015 में बदलाव करने का प्रस्ताव तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कदम से यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वैध खरीदारों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।

एक अधिकारी ने कहा, ‘पावर ऑफ अटॉर्नी को इससे बाहर रखने की योजना है ताकि एक बड़ी दिक्कत खत्म हो सके। देश के कुछ हिस्सों में प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में यह एक लोकप्रिय चीज है।’ उदाहरण के लिए, दिल्ली में प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने में पावर ऑफ अटॉर्नी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ड्राफ्ट लॉ का मकसद कथित बेनामी ट्रांजैक्शंस को निशाने पर लेना है, जिनका इस्तेमाल असल मालिकाना हक को छिपाने में किया जाता है। इससे ब्लैक मनी को बढ़ावा मिलता है।

दूसरे अधिकारी ने बताया कि सरकार ऐसी शर्तें जोड़ने की योजना बना रही है, जिनसे नियमों में ढील का दुरुपयोग न हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसी शर्तों में पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन कराना और पावर ऑफ अटॉर्नी देने वाले को मिलने वाली रकम की रसीद दिखाना जरूरी करने जैसी बातें शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर बदलावों को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार देर शाम मंजूरी दे दी थी। ये बदलाव संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट पर आधारित हैं।

बिल में बेनामी प्रॉपर्टीज की जब्ती और कुर्की, जुर्माना लगाने और सात साल तक के कारावास की सजा के प्रावधान किए गए हैं। बिल में प्रस्ताव किया गया है कि पत्नी और बच्चों के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम पर हासिल की गई प्रॉपर्टी को बेनामी माना जाएगा और ऐसे मामले में कानून के कड़े प्रावधान लागू होंगे। भाई या बहन के मामले में प्रॉपर्टी आमदनी के ज्ञात स्रोत के जरिए संयुक्त रूप से हासिल की जा सकती है। विधेयक में प्रॉपर्टी की परिभाषा का दायरा बढ़ाने की बात भी है ताकि और एसेट्स को इसमें शामिल किया जा सके।

बेनामी एक्ट को साल 1988 में बनाया गया था, लेकिन इसके नियमों को कभी नोटिफाई नहीं किया गया। पिछली यूपीए सरकार ने 1988 के एक्ट की जगह लेने के लिए बेनामी ट्रांजैक्शंस (प्रोहिबिशन) बिल पेश किया था, लेकिन 15वीं लोकसभा के भंग होने के साथ यह लैप्स हो गया। मोदी सरकार ने ब्लैक मनी पर काबू पाने के मकसद के साथ इसमें कुछ बदलाव किए और बिल को दोबारा पेश किया था।

Courtesy: NBT

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