मुकेश…जिनकी आवाज़ ‘पल दो पल’ की नहीं, हर पल की साथी है…

मुकेश…जिनकी आवाज़ ‘पल दो पल’ की नहीं, हर पल की साथी है…

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जब भी पुराने हिंदी गानों की बात होती है तो कुछ बेमिसाल आवाज़ों में एक नाम मुकेश का होता है। जहां एक तरफ किशोर कुमार और मोहम्मद रफी को उनकी वेरिएशन के लिए जाना जाता था, वहीं मुकेश का अंदाज़ काफी जुदा था। उनके गाए गानों में एक ऐसा ठहराव है जो आपको दर्द में भी राहत देता है, उन्हें सुनते हुए लगता है कि आप किसी पहाड़ पर पहुंच गए हैं जहां आत्मा को सुकून देनी वाली बेपनाह शांति है। 22 जुलाई यानि आज दिग्गज पार्श्वगायक मुकेश की 93वीं जयंती है। गूगल ने इस मौके पर मुकेश की याद में एक डूडल भी तैयार किया है  –

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वैसे तो मुकेश के यादगार गीत किसी एक दिन के मोहताज नहीं है लेकिन हम ला रहे हैं इस मौके पर उनके कुछ ख़ास गीत जो सुने या देखे जाने चाहिए –

वैसे तो राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की यादगार फिल्म ‘आनंद’ में मुकेश का गाया एक एक गीत इतना मधुर है कि एक लिस्ट में तो सिर्फ इस फिल्म के ही गाने समा जाएं। फिलहाल इस सूचि में इस फिल्म के दो गाने शामिल किए गए हैं।

‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ इस गीत की कल्नपा किसी और की आवाज़ में नहीं की जा सकती।

सुपरहिट फिल्म ‘कभी कभी’ का यह गीत जिसमें साहिर की लिखी कविता के साथ मुकेश ने कुछ इस तरह न्याय किया है।

राजकपूर की फिल्मे जैसे मुकेश की आवाज़ के बगैर अधूरी होती थीं। ‘अनाड़ी’ भी ऐसी ही एक फिल्म थी।

फिल्म ‘श्री 420’ में ‘रमैया वस्तावैया’ जैसा रोमांटिक गीत शायद ही दोबारा बन पाया

फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का यह गीत जो जिंदगी के फलसफे को बेहद गहराई से समझाता है।

‘कभी कभी’ का ही एक और अहम गीत ‘मैं पल दो पल का शायर हूं’

फलसफों से भरे गीतों को मुकेश से अच्छा कौन निभा सकता है।

‘तीसरी कसम’ में अगर कहानी के साथ साथ राजकपूर के अभिनय ने जान फूंकी तो शैलेंद्र के गीत और मुकेश की गायकी ने भी चार चांद लगा दिए। हो सकता है कि मुकेश के गीतों को लेकर आपकी पसंद इस लिस्ट में शामिल गानों से अलग हो, तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी लिस्ट हमारे साथ साझा कीजिए। अच्छी बात यह होगी कि आपकी और हमारी सूची में एक नाम समान होगा – वह है मुकेश…

Courtesy: NDTV India

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