Analysis: जर्मनी में आतंक के लिए मार्केल सरकार की शरणार्थी नीति जिम्मेदार

Analysis: जर्मनी में आतंक के लिए मार्केल सरकार की शरणार्थी नीति जिम्मेदार

A police officer aims his submachine outside the Olympia mall in Munich, southern Germany, Friday, July 22, 2016 after shots were fired. Police said that at least six people have been killed. (AP Photo/Sebastian Widmann)

बर्लिन:  जर्मनी दुनिया के सुपरपावर में से एक है. एक हफ्ते में दो हमलों ने जर्मनी को हिला दिया है, लेकिन जर्मनी में आतंक के हालात पैदा होने के पीछे अंजेला मार्केल सरकार की शरणार्थी नीति को वजह बताया जा रहा था.

जर्मनी को यूरोप का सुपर पावर कहते हैं. इस देश ने हिटलर के अत्याचार देखे. इस देश में दो-दो विश्व युद्ध देखे. पूरब और पश्चिम में देश का पहले बंटवारा फिर विलय देखा.  जर्मनी ने पिछले 500 साल में अच्छे बुरे दिन बहुत दिखे, लेकिन जज्बा था इसलिए जर्मनी सुपरपावर बना. लेकिन पिछले एक हफ्ते में आतंक की दो घटनाओं ने सुपरपावर जर्मनी को हिलाकर रख दिया है. कहां से आ गया गया आतंक. कहां से घुस गए आतंकी. कैसे लहूलहुहान हो गया जर्मनी.

जर्मनी के बड़े अखबार डॉयचे वेले का आकलन है कि जर्मनी शरणार्थियों का अड्डा बन गया है. जर्मन सरकार की नीति है युद्धग्रस्त देशों के शरणार्थियों को को पनाह देने की. अफगानिस्तान, इराक, सीरिया में छिड़ी जंग के बाद जर्मनी में बाहरी आबादी बढ़ी है.  जर्मन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ इसी साल 60 हजार से शरणार्थी जर्मनी में बच चुके हैं. सबसे ज्यादा संख्या है 16-17 साल के लड़कों की. इस उम्र के लोगों के शरणार्थी बनकर जर्मनी में बसने की संख्या 2 साल में तिगुनी हो चुकी है. हर तीसरा आवेदन अफगानिस्तान का है. उम्र की जांच के लिए दांत के टेस्ट कराए जाते हैं.

कोई सरकारी पुष्टि नहीं है लेकिन शक है कि शरणार्थी कैंपों में रह रहे बाली उम्र के लड़कों पर आईएस आतंक के डोरे डाल रहा है. इसीलिए समय समय पर शरणार्थी युवाओं की खासकर मनोवैज्ञानिक जांच होती रहती है. सोमवार को वुर्जबर्ग में ट्रेन में कुल्हाडी से हमला करने वाला हमलावर भी 17 साल का था और अफगानिस्तान मूल का नागरिक था. हमलावर के मौका ए वारदात पर मारे जाने के बाद आईएस ने उसको अपना बताया और हमले की जिम्मेदारी ली. अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि अफगानिस्तान नाबालिग और आईएस कैसे एक-दूसरे से मिले. बुजबर्ग के हमले के बाद जर्मनी में सुरक्षा व्यवस्था और चौकन्ना थी. फिर भी ओलंपिया मॉल में आतंकियों ने भीड़ को निशाना बनाकर जर्मनी को छलनी कर दिया.

Courtesy: ABP News

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