पहली बार बोले सिद्धू- पंजाब से दूर नहीं रह सकता था इसलिए दिया इस्तीफा

sidhu01_1469076608_146942

नई दिल्ली. राज्यसभा की मेंबरशिप से इस्तीफा देने के बाद चुप्पी साधने वाले नवजोत सिंह सिद्धू आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें वो अपनी आगे की स्ट्रैटेजी का खुलासा कर सकते हैं। बता दें 18 जुलाई को सिद्धू ने राज्यसभा और उनकी पत्नी ने पंजाब विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। सिद्धू के पॉलिटिक्ल फ्यूचर पर बना हुआ है सस्पेंस…

– राज्यसभा से इस्तीफा मैंने इसलिए दिया क्योंकि मुझे ये कहा गया था, कि पंजाब कि तरफ मुंह नहीं करोगे। और पंजाब से तुम दूर रहोगे।

– पंजाब बीजेपी के चीफ और केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने रविवार को कहकर सबको चौंका दिया कि नवजोत सिंह सिद्धू अब भी बीजेपी में हैं।

– सांपला ने कहा, ‘क्योंकि सिद्धू बीजेपी में हैं। इसलिए पार्टी में वापसी का सवाल ही नहीं पैदा होता। उन्होंने बीजेपी मेंबरशिप से इस्तीफा नहीं दिया है।’

– एक सवाल के जवाब में सांपला ने कहा, ‘सिद्धू की बीजेपी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। उनके कुछ निजी कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से उन्होंने यह फैसला किया। वह पार्टी से नाखुश नहीं हैं।’

-हालांकि सिद्धू के इस्तीफे के बाद उनकी पत्नी नवजोत कौर ने कहा था, ‘यह साफ है कि अगर उन्होंने राज्यसभा छोड़ी है तो उन्होंने बीजेपी भी छोडी है। उनके वापस लौटने का कोई सवाल ही नहीं हैं, वह कभी अपनी बातों से पीछे नहीं हटते। वे पंजाब की सेवा करना चाहते हैं।’

सिद्धू के आप में जाने को लेकर भी नहीं है स्थिति साफ

सिद्धू के बीजेपी और राज्यसभा की मेंबरशिप छोड़ने के बाद यह माना जा रहा था कि आप उन्हें सीएम कैंडिडेट बना सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सिद्धू और आप में से किसी ने भी अपने पत्ते पूरी तरह से नहीं खोले।

– मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, AAP सिद्धू को अभी CM कैंडिडेंट नहीं बनाना चाहती। पार्टी को डर है कि ऐसा करने पर पंजाब में AAP के अंदर फूट पड़ सकती है।

– इस बीच 21 जुलाई को सिद्धू दिल्ली एयरपोर्ट पर दिखे लेकिन उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया । एयरपोर्ट पर जब उनसे पूछा गया कि क्या वह आप में जाएंगे तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और सीधे जाकर में बैठ गए।

5 कारण: सिद्धू की शर्त थी- मंत्री बनाओ, वरना BJP छोड़ दूंगा

  1. खुद जाना चाहते थे

बीजेपी सूत्रों ने बताया कि नवजोत ने मार्च में ही पार्टी छोड़ने की इच्छा के बारे में बता दिया था। पार्टी को डर था कि सिद्धू के जाने से अगले साल पंजाब में होने वाले चुनाव में BJP की लड़ाई कमजोर हो सकती है। ऐसे में, जल्दबाजी में उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद में भेजने का फैसला पार्टी ने लिया। साथ ही, अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाने का भी प्रस्ताव दिया। पार्टी को भरोसा था कि इससे नवजोत की नाराजगी दूर हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

  1. मंत्री बनाने की रखी थी शर्त

सिद्धू ने बीजेपी नहीं छोड़ने के लिए खुद को केंद्र में मंत्री बनाए जाने की शर्त रख दी, जिसे उस समय मान लिया गया था। जुलाई में कैबिनेट विस्तार के दौरान मोदी ने सिद्धू को कैबिनेट में जगह देने से मना कर दिया था। इसे लेकर उन्होंने BJP के एक टॉप नेता को फ़ोन कर नाराजगी जताई।

  1. CM कैंडिडेट बनने की थी आखिरी शर्त

सिद्धू ने बीजेपी में रुकने के लिए आखिरी शर्त के तौर पर पंजाब में BJP को अकाली दल से अलग करने और खुद को सीएम कैंडिडेट बनाने का प्रस्ताव दिया। इसे मानने से भी टॉप लीडरशिप ने मना कर दिया। इसके बाद सिद्धू ने राज्यसभा से इस्तीफा देने का मन बना लिया।

  1. शाह की टीम में चाहते थे जगह

नितिन गड़करी BJP प्रेसिडेंट थे, तब सिद्धू पार्टी के राष्ट्रीय सचिव थे। बाद में जब अमित शाह को प्रेसिडेंट बनाया गया तो शाह ने उन्हें टीम में कोई जगह नहीं दी, बल्कि चंडीगढ़ से सिद्धू के जूनियर माने जाने वाले नेता चुग को राष्ट्रीय सचिव बना दिया। नवजोत ने इसे लेकर पार्टी के सामने नाराजगी भी जताई थी।

  1. अमृतसर से टिकट कटने के बाद नाराज थे

2014 लोकसभा चुनाव के पार्टी ने अमृतसर सीट से सिद्धू का टिकट काट दिया। उनकी जगह अरुण जेटली को पार्टी कैंडिडेट बनाया गया। सिद्धू 10 साल से इस सीट से सांसद थे। पार्टी का यह दांव उलटा पड़ा। जेटली चुनाव हार गए। तब से ही सिद्धू पार्टी से नाराज बताए जा रहे थे।

Courtesy: Bhaskar.com

Categories: India, Politics

Related Articles