उत्तराखंड में 19 जुलाई को चीनी सैनिकों ने की थी घुसपैठ, ITBP ने केंद्र को दी रिपोर्ट

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नई दिल्ली/देहरादून.चीन ने एक बार फिर भारतीय सीमा में घुसपैठ की है। चीनी सैनिक इस बार लेह-लद्दाख नहीं, उत्तराखंड में घुसे हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस खबर को कन्फर्म किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आईटीबीपी ने घुसपैठ की रिपोर्ट यूनियन होम मिनिस्ट्री को भेजी है। बताया जा रहा है कि 19 जुलाई को चीनी सैनिक चमोली जिले में आ गए थे। उत्तराखंड की 350 किलोमीटर की सीमा चीन से लगी हुई है। जून में तीन बार घुसपैठ कर चुके हैं चीनी सैनिक…

– पिछले महीने चीन के सैनिक तीन बार भारत की सीमा में आए थे।

– अरुणाचल प्रदेश रीजन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ऑफ चायना के 50 सैनिक तीन ग्रुप्स में भारतीय बॉर्डर में घुसे थे।

– ये तब हुआ था जब तिब्बत बॉर्डर पुलिस फोर्स (आईटीबीपी) के जवान पांगोंग त्सो झील के पास इंटरनेशनल योगा डे पर योग कर रहे थे।

– इससे पहले चीनी सैनिकों ने 9 और 15 जून को भी घुसपैठ की थी।

– 15 जून को चीनी सैनिक चार अलग-अलग प्वाइंट्स से भारतीय सीमा में घुसे थे।
– यह घटना लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास की है। उस समय 215 चीनी सैनिकों ने भारतीय बॉर्डर में घुसकर इसे अपना बताया था।
– इसके पहले 9 जून को भी त्वांग इलाके में घुसपैठ की खबर आई थी।

2015 में होती रही घुसपैठ?

– 27 जून 2015 को लेह से 168 किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख में पैन्गोंग झील में घुसपैठ हुई थी। इस झील का 45 किमी किनारा भारतीय सीमा में है। जबकि 90 किमी चीन में है। चीनी सैनिक भारतीय सीमा में आ गए थे। वहां उनका सामना भारतीय सैनिकों से हुआ था।
– दोनों तरफ से बैनर लहराते हुए दावा किया गया कि इलाका उनका है। बाद में चीनी सैनिक लौट गए।
– पैन्गोंग झील के नॉर्थ और साउथ में चीनी सैनिक पहले भी घुसपैठ की कोशिश करते रहे हैं। अप्रैल में भी इसी इलाके में घुसपैठ हुई थी।
– चीनी सेना ने 2014 में 334 बार भारतीय इलाके में घुसपैठ की। यह घुसपैठ लद्दाख के आसपास के इलाकों में हुई है।

क्या है विवाद?

– भारत-चीन के बीच विवादित इलाका 4000 किलोमीटर का है। लेकिन चीन का कहना है कि विवाद वाला इलाका महज 2000 किलोमीटर का है।
– इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर में से अक्साई चीन को चीन के ही सुपुर्द कर दिया है।
– इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच 18 दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है।
– चीन के साथ भारत का विवाद 64 साल पुराना है। इसका एक बड़ा कारण इंटरनेशनल बॉर्डर क्लियर न होना है।
– भारत मानता आ रहा है कि चीन जानबूझकर इस विवाद का हल नहीं कर रहा है।
– भारत मैकमोहन लाइन को सही मानता है। चीन इस लाइन को अवैध बताता है।

Courtesy: Bhaskar.com

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