गाय को शेर ने मारा था, उन दलितों ने नहीं जिन पर स्वघोषित गौरक्षकों ने कोड़े बरसाए : सीआईडी

गाय को शेर ने मारा था, उन दलितों ने नहीं जिन पर स्वघोषित गौरक्षकों ने कोड़े बरसाए : सीआईडी

38009-hfmiwdjwts-1469119295

11 जुलाई को कुछ स्वघोषित गौरक्षकों द्वारा चार दलितों की पिटाई के मामले की जांच कर रही गुजरात सीआईडी (अपराध) के मुताबिक यह गौ हत्या का मामला नहीं है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान के आधार पर सीआईडी का मानना है कि गाय को शेर ने मारा था. 11 जुलाई को गुजरात के ऊना में कुछ कथित गौरक्षकों ने एक मृत गाय की खाल उतार रहे चार दलितों की पिटाई की थी. उनका आरोप था कि इन दलितों ने गाय की हत्या की.

हालांकि जांचकर्ताओं को अब भी यह साफ-साफ पता नहीं चल पाया है कि कथित गौररक्षकों को इस बात की जानकारी किसने दी कि ऊना तालुका के मोटा समधियाला गांव के पास मृत गाय की खाल उतारी जा रही है. ऊना पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड में दिन के डेढ़ बजे हुई एक एंट्री बताती है कि यह जानकारी स्टेट कंट्रोल रूम अहमदाबाद से मिली थी. इसके मुताबिक किसी नरनभाई नाम के व्यक्ति ने मोटा समधियाला गांव के पास गौवध की सूचना दी थी. लेकिन एफआईआर के मुताबिक कथित गौरक्षकों ने दलितों पर सुबह 10 बजे ही हमला बोल दिया था.

इस घटना में घायल हुए वसाराम सरवैया के पिता बालू सरवैया का कहना है कि उन्हें सुबह करीब आठ बजे बेडिया गांव के नजाभाई अहीर ने फोन किया था. बेडिया गांव मोटा समधियाला से करीब पांच किलोमीटर दूर है. बालू के मुताबिक नजाभाई ने उन्हें बताया था कि एक शेर ने उनकी गाय को मार दिया है और लाश को ठिकाने के लिए उन्हें किसी की जरूरत है. उनके मुताबिक वसाराम और कुछ अन्य लोग गाय की लाश उठाकर लाए और गांव से दो किमी दूर जब वे उसका चमड़ा उतारने का काम कर रहे थे तो इसी दौरान एक सफेद कार उनके पास से गुजरी. थोड़ी देर बाद कार वापस आई. उसके साथ एक और कार थी और मोटरसाइकिलों पर सवार 30-35 लोग भी. बालू के मुताबिक उन लोगों के पास डंडे थे और उन्होंने आते ही पूछा कि गाय को क्यों मारा. इसके बाद उन्होंने वसाराम और अन्य लोगों की पिटाई शुरू कर दी. बालू के मुताबिक किसी ने उन्हें फोन किया और वे अपनी पत्नी के साथ घटनास्थल की तरफ दौड़े. लेकिन उन्हें भी पीटा गया और उनसे उनके फोन छीन लिए गए.

इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है. पुलिस पर आरोप है कि जब कथित गौरक्षक दलितों को लेकर थाने पहुंचे तो उनसे कोई पूछताछ नहीं हुई और उन्हें जाने दिया गया. विभागीय जांच के बाद ऊना पुलिस स्टेशन में तैनात चार पुलिसकर्मियों को कर्तव्यपालन में लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया है.

दलितों की पिटाई की इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद से इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक काफी हंगामा हुआ था. विपक्षी दलों ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था.

Courtesy:satyagrah.com

Categories: India, Politics

Related Articles