गूगल के लिए सुंदर पिचाई इसलिए हैं ‘खास’

गूगल के लिए सुंदर पिचाई इसलिए हैं ‘खास’

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सुंदर पिचाई को गूगल की कमान संभाले लगभग एक साल हो गया है। इसी दौर में गूगल ने ऐल्फ़ाबेट बनाया और गूगल को पुनर्गठित भी किया। इस बात में दो राय नहीं कि सुंदर पिचाई काफी पॉप्युलर सीईओ हैं। हालांकि, वह काफी सम्मानित बॉस हैं लेकिन गूगलर्स की कुछ शिकायतें तो हमेशा बनी ही रहती हैं।

आज हम आपको बता रहे हैं कि सुंदर पिचाई अपने स्टाफ के साथ कैसे काम करते हैं और कुछ गूगलर्स कंपनी के बारे में क्या राय रखते हैं

अगस्त 2015 में सीईओ बनने से पहले भी गूगल में सुंदर पिचाई ने खुद को एक पावरफुल लीडर के तौर पर स्थापित कर चुके थे। उस समय पिचाई गूगल के प्रॉडक्ट चीफ हुआ करते थे।

गूगल के सामने एक बड़ी समस्या तब खड़ी हुई जब माइक्रोसॉफ्ट ने इंटरनेट एक्सप्लॉरर पर डिफॉल्ट सर्च इंजन बिंग को बनाया। उस समय, 2006 में लगभग हर कोई इंटरनेट एक्सप्लॉरर का प्रयोग करता था। पिचाई इस परिस्थिति का सामना करने के लिए ‘गूगल टूलबार’ लाए जो यूजर्स के पीसी और ब्राउजर में डायरेक्टली इंस्टॉल हो जाता है।

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इसके बाद पिचाई ने क्रोम को डिवेलप किया। उनकी दो विशेषताएं बहुत खास हैं, एक तो उनकी लीडरशिप क्वॉलिटी और दूसरी इंडस्ट्री में संबंध। उन्होंने बिना किसी से दुश्मनी किए पार्टनरशिप के साथ कई ऐसे काम किए जिससे गूगल को काफी फायदा हुआ।

पिचाई का लैरी पेज के साथ भी काफी अच्छा रिश्ता है। कुछ लोग पिचाई को पेज के इंटरप्रिटर के रूप में भी देखते हैं, जो गूगल के विभिन्न समूहों के बीच पेज के विजन के साथ काम करता है।

मीटिंग में पिचाई के बैठने का तरीका भी काफी खास है, वह चुपचाप बैठकर दूसरों को सुनते हैं और फिर अपना आइडिया देते हैं।

पिचाई अपनी फटॉग्रफिक मेमरी के लिए भी काफी फेमस हैं, खासकर नंबर्स(संख्या) से जुड़े मामलों में उनकी खास पहचान बनी हुई है। कभी-कभी मीटिंग्स के दौरान उनकी यह प्रतिभा सामने आ ही आ ही जाती है

कंपनी में उनकी शख्सियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि एक गूगलर से Quora पर लिखा, ‘गूगल के अंदर सचमुच उनकी पूजा होती है। इंजिनियर्स, प्रॉडक्ट मैनेजर्स और बिजनस पीपल्स सब उन्हें प्यार करते हैं।’

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एक अन्य गूगलर ने लिखा, ‘वह बहुत जटिल विचारों को आसान टर्म्स में समझा सकते हैं, अगर उनसे कोई परेशान करने वाला सवाल पूछता है तो वह पूरा समय लेकर सवाल का जवाब देते हैं।’

इन्हीं क्वालिटीज की बदौलत उन्हें ग्लासडोर पर 98% रेटिंग मिली थी। ग्लासडोर पर पिचाई को 2016 का मोस्ट रेटेड सीईओ घोषित किया गया था।

गूगल की पैरंट कंपनी ऐल्फ़ाबेट में 61 हजार से भी ज्यादा एंप्लॉयीज काम करते हैं। और इसका मतलब है कि कुछ बातें तो जरूर होंगी जो कुछ लोगों को अखरती होंगी।

कुछ लोगों का कहना है कि कंपनी में बहुत अधिक पॉलिटिक्स होती है और आपके काम इस आधार पर आंका जाता है कि आप किस डिपार्टमेंट में काम करते हैं ना कि आपकी मेहनत के आधार पर। ग्लासडोर पर एक एंप्लॉयी ने लिखा है कि अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाता है।

कुछ लोगों का कहना है कि कंपनी में बहुत अधिक पॉलिटिक्स होती है और आपके काम इस आधार पर आंका जाता है कि आप किस डिपार्टमेंट में काम करते हैं ना कि आपकी मेहनत के आधार पर। ग्लासडोर पर एक एंप्लॉयी ने लिखा है कि अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के लोगों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाता है।

Courtesy: NBT

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