देश के हर दिलों में आज भी जिन्दा हैं ‘कलाम’

देश के हर दिलों में आज भी जिन्दा हैं ‘कलाम’

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वाराणसी. पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम डॉक्टर अबुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम जिन्हें हर बच्चा बच्चा जानता है। इन्हें लोग अब्दुल कलाम के नाम से बुलाते थे। इन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। ये न सिर्फ एक महान वैज्ञानिक, महान नेता थे बल्कि ये सबके लिए एक अद्भुत इंसान भी थे।

चमत्कारिक प्रतिभा के धनी अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत थे कि वह सभी धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के व्यक्ति नजर आते थे। यह एक ऐसे स्वीकार्य भारतीय थे जो सभी के लिए आज भी एक महान आदर्श बन चुके हैं। विज्ञान की दुनिया से देश का प्रथम नागरिक बनना कपोल कल्पना मात्र नहीं है क्योंकि यह एक जीवित प्रणेता की सत्यकथा है।

इन्हें बच्चों से बहुत प्यार था। आज ही के दिन अब्दुल कलाम अपनी अंतिम सांस ली थी। जिन्हें आज भी लोग बहुत याद करते हैं। उन्होंने जिन लोगों के साथ भी काम किया उनके दिलों को छू लिया। 27 जुलाई 2015 को शिलांग में भाषण के दौरान हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। उस दिन देश की वो कोई भी आंखे शायद ही रहीं हों जो नम न हुई हों। 85 वर्ष की आयु में इन्होंने अपने प्राण त्याग दिये। आज भी इन्हें लोग बहुत याद करते हैं।

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रसिद्ध वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में विख्यात हैं। इनका राष्ट्रपति कार्यकाल 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक रहा। यह एक गैर राजनीतिक व्यक्ति रहे है। विज्ञान की दुनिया में चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण ही राष्ट्रपति भवन के द्वार इनके लिए स्वतरू खुल गए। जो व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है, उसके लिए सब सहज हो जाता है और कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता। अब्दुल कलाम इस उद्धरण का प्रतिनिधित्व करते नजर आते हैं। इन्होंने विवाह नहीं किया है। इनकी जीवन गाथा किसी रोचक उपन्यास के नायक की कहानी से कम नहीं है।

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किशोरावस्था में अब्दुल कलाम

अबुल कलाम की जन्मभूमि रामेश्वरम का प्राकृतिक सौन्दर्य समुद्र की निकटता के कारण सदैव बहुत दर्शनीय रहा है। इनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। वे नाविक थे, और नियम के बहुत पक्के थे। इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। इनके संबंध रामेश्वरम के हिन्दू नेताओं तथा अध्यापकों के साथ काफी स्नेहपूर्ण थे। अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अखबार वितरित करने का कार्य भी किया था।

कलाम के जीवन में माता का था महत्वपूर्ण स्थानअब्दुल कलाम के जीवन की एक घटना है, कि यह भाई-बहनों के साथ खाना खा रहे थे। इनके यहां चावल खूब होता था, इसलिए खाने में वही दिया जाता था, रोटियां कम मिलती थीं। जब इनकी मां ने इनको रोटियां ज्यादा दे दीं, तो इनके भाई ने एक बड़े सच का खुलासा किया। इनके भाई ने अलग ले जाकर इनसे कहा कि मां के लिए एक-भी रोटी नहीं बची और तुम्हें उन्होंने ज्यादा रोटियां दे दीं। वह बहुत कठिन समय था और उनके भाई चाहते थे कि अब्दुल कलाम जिम्मेदारी का व्यवहार करें। तब यह अपने जज्बातों पर काबू नहीं पा सके और दौड़कर मां के गले से जा लगे।

उन दिनों कलाम कक्षा पांच के विद्यार्थी थे। इन्हें परिवार में सबसे अधिक स्नेह प्राप्त हुआ क्योंकि यह परिवार में सबसे छोटे थे। तब घरों में विद्युत नहीं थी और केरोसिन तेल के दीपक जला करते थे, जिनका समय रात्रि 7 से 9 तक नियत था। लेकिन यह अपनी माता के अतिरिक्त स्नेह के कारण पढ़ाई करने हेतु रात के 11 बजे तक दीपक का उपयोग करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन में इनकी माता का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। इनकी माता ने 92 वर्ष की उम्र पाई। वह प्रेम, दया और स्नेह की प्रतिमूर्ति थीं। उनका स्वभाव बेहद शालीन था। इनकी माता पांचों समय की नमाज अदा करती थीं। जब इन्हें नमाज करते हुए अब्दुल कलाम देखते थे तो इन्हें रूहानी सुकून और प्रेरणा प्राप्त होती थी।

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जिस घर अब्दुल कलाम का जन्म हुआ, वह आज भी रामेश्वरम में मस्जिद मार्ग पर स्थित है। इसके साथ ही इनके भाई की कलाकृतियों की दुकान भी संलग्न है। यहां पर्यटक इसी कारण खिंचे चले आते हैं, क्योंकि अब्दुल कलाम का आवास स्थित है। 1964 में 33 वर्ष की उम्र में डॉक्टर अब्दुल कलाम ने जल की भयानक विनाशलीला देखी और जल की शक्ति का वास्तविक अनुमान लगाया। चक्रवाती तूफान में पायबन पुल और यात्रियों से भरी एक रेलगाड़ी के साथ-साथ अब्दुल कलाम का पुश्तैनी गांव धनुषकोड़ी भी बह गया था। जब यह मात्र 19 वर्ष के थे, तब द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका को भी महसूस किया। युद्ध का दवानल रामेश्वरम के द्वार तक पहुंचा था। इन परिस्थितियों में भोजन सहित सभी आवश्यक वस्तुओं का अभाव हो गया था।

समाज के प्रति लगाव

उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकें बहुत लोकप्रिय रही हैं। वे अपनी किताबों की रॉयल्टी का अधिकांश हिस्सा स्वयंसेवी संस्थाओं को मदद में दे देते हैं। मदर टेरेसा द्वारा स्थापित श्सिस्टर्स ऑफ चैरिटीश् उनमें से एक है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं। इनमें से कुछ पुरस्कारों के साथ नकद राशियां भी थीं। वह इन पुरस्कार राशियों को परोपकार के कार्यों के लिए अलग रखते हैं। जब-जब देश में प्राकृतिक आपदाएं आई हैं, तब-तब डॉ. कलाम की मानवीयता एवं करुणा निखरकर सामने आई है। वह अन्य मनुष्यों के कष्ट तथा पीड़ा के विचार मात्र से दुःखी हो जाते हैं। वह प्रभावित लोगों को राहत पहुचांने के लिए डी.आर.डी.ओ. के नियंत्रण में मौजूद सभी संसाधनों को एकत्रित करते। जब वे रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन में कार्यरत थे तो उन्होंने हर राष्ट्रीय आपदा में विभाग की ओर से बढ़ चढ़कर राहत कोष में मदद की।

ग्यारहवें राष्ट्रपति थे अब्दुल कलाम

डॉक्टर अब्दुल कलाम भारत के ग्यारवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इन्हें भारतीय जनता पार्टी समर्थित एन.डी.ए. घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया। 18 जुलाई, 2002 को डॉक्टर कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत के राष्ट्रपति चुने गये थे और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। इस संक्षिप्त समारोह में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य तथा अधिकारीगण उपस्थित थे। इनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ। भारतीय जनता पार्टी में इनके नाम के प्रति सहमति न हो पाने के कारण यह दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनाए जा सके।

विशेष सम्मान और पुरस्कार

डॉ. अब्दुल कलाम को उनके कार्य के लिए कई पुरस्कार मिले हैं। इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स का नेशनल डिजाइन अवार्ड, एरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया का डॉ. बिरेन रॉय स्पेस अवार्ड, एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया का आर्यभट्ट पुरस्कार, विज्ञान के लिए जी.एम. मोदी पुरस्कार, राष्ट्रीय एकता के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार आदि।ये भारत के एक विशिष्ट वैज्ञानिक रहें जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेटर की मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी थी।इन्हें भारत के नागरिक सम्मान के रूप में 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण, 1997 में भारत रत्न सम्मान प्राप्त हो चुके थे।

डॉक्टर अब्दुल कलाम ऐसे तीसरे राष्ट्रपति थे जिन्हें भारत रत्न का सम्मान राष्ट्रपति बनने से पूर्व ही प्राप्त हुआ था। यह प्रथम वैज्ञानिक थे जो राष्ट्रपति बने और प्रथम राष्ट्रपति भी जो अविवाहित थे।अंतिम समय में डॉ. कलाम काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग, भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर में आगंतुक प्रोफेसर रहे। साथ ही भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान तिरूवंतपुरम् में कुलाधिपति तथा अन्ना विश्वविद्यालय चेन्नई में एयरो इंजीनियरिंग के प्रध्यापक के पद में नियुक्त रहे।

कलाम के जिंदगी से जुड़े कुछ प्रेरणादायक प्रसंग

  1. डीआरडीओ के पूर्व चीफ की मानें तो श्अग्निश् मिसाइल के टेस्ट के समय कलाम काफी नर्वस थे। उन दिनों वो अपना इस्तीफा अपने साथ लिए घूमते थे। उनका कहना था कि अगर कुछ भी गलत हुआ तो वो इसकी जिम्मेदारी लेंगे और अपना पद छोड़ देंग।
  2. एक बार कुछ नौजवानों ने डॉ कलाम से मिलने की इच्छा जताइ। इसके लिए उन्होंने उनके ऑफिस में एक पत्र लिखा। कलाम ने राष्ट्रपति भवन के पर्सनल चैंबर में उन युवाओं से न सिर्फ मुलाकात की बल्कि काफी समय उनके साथ गुजार कर उनके आइडियाज भी सुन। आपको बता दें कि डॉ कलाम ने पूरे भारत में घूमकर करीब 1 करोड़ 70 लाख युवाओं से मुलाकात की थी।
  3. एक बार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) में उनकी टीम बिल्डिंग की सुरक्षा को लेकर चर्चा कर रही थी. टीम ने सुझाव दिया कि बिल्डिंग की दीवार पर कांच के टुकड़े लगा देने चाहिए. लेकिन डॉ कलाम ने टीम के इस सुझाव को ठुकरा दिया और कहा कि अगर हम ऐसा करेंगे तो इस दीवार पर पक्षी नहीं बैठेंग।
  4. डीआरडीओ में काम का काफी दवाब रहता था. एक बार साथ में काम करने वाला एक वैज्ञानिक उनके पास आया और बोला कि उसे समय से पहले घर जाना है. दरअसल वैज्ञानिक को अपने बच्चों को प्रदर्शनी दिखानी थी. डॉ कलाम ने उसे अनुमति दे दी। लेकिन काम के चक्कर में वह भूल गया कि उसे जल्दी घर जाना है। बाद में उसे बड़ा बुरा लगा कि वो अपने बच्चों को प्रदर्शनी दिखाने नहीं ले जा सका। जब वह घर गया तो पता चला कि कलाम के कहने पर मैनेजर उसके बच्चों को प्रदर्शनी दिखाने ले जा चुका था।

Courtesy: Patrika.com

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