कांग्रेस मुक्त भारत या संविधान मुक्त भारत?

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-अबिनाश चौधरी

 

सही मायने मे 2014 मे नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शाखा के प्रथम विद्यार्थी के तौर पर भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए है| ये सच है की इस से पहले अटल जी प्रधानमंत्री बन चुके हैं, लेकिन सही मायने मे ना ही संघ और ना खुद अटल जी अपने आप को संघ का हिस्सा माना करते है| संघ और उनके बीच अनेको मुद्दे पर टकराव होते रहते थे| अटल जी बहुत मायने मे नेहरू जी के पद चिन्हों पर ही चलने का प्रयास करते थे| ये उस वक़्त के राजनीति के माहौल बोलिए या पंडित नेहरू के एक दिग्गज नेता होने का प्रमाण, पक्ष हो या विपक्ष सभी उनसे प्रभावित थे| शायद यही कारण है की देर से ही सही आडवाणी जी भी अटल जी के पदचिन्हों पर अपनी पार्टी मे चलने का फ़ैसला कर लिए|
साल 2014 का लोकसभा चुनाव बहुत मायने मे भाजपा और संघ के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ| पहली बार उन्हे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने मे सफलता प्राप्त हुई| नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के शपथ के बाद शायद पहली बार उन्हें मौका मिला है भारत को एक हिंदू राष्ट्र के तौर पर स्थापित करने का| लेकिन वो भी जानते है ये जितना कहना आसान है करना उतना ही मुश्किल| इस राह मे जो सबसे बड़ा रोड़ा है,वो है समाज के एक बहुत बड़े हिस्से के लोग जो धर्मनिरपर क्ष हैं , कांग्रेस पार्टी और गाँधी परिवार| भारत को धर्म निरपर क्ष बनाए रखने के लिए गाँधी परिवार अपने प्राणो की भी आहुति दे चुका है|
लेकिन ये बात भी सच है की संघ ने समाज के एक बड़े हिस्से मे सेंध लगा दी है| 2014 की जीत इसी बात का एक प्रमाण है| जिस तरह से भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगते रहे वो एक चिंता का विषय है| पहली बार एक ज़िम्मेदार नेता विपक्ष को खत्म करने की बात कहता है| पिछले दो साल मे इस नारे का मतलब धीरे धीरे सामने आ रहा है|
कांग्रेस उनके रास्ते का सबसे बड़ा पत्थर है जिसके ख़त्म होने के उपरांत ही वो आसानी से संविधान को बदल सकते है और एक हिंदू तानाशाही राज्य की स्थापना कर सकते हैं।
उन्हे ये अच्छी तरह मालूम है कांग्रेस एक वैचारिक पार्टी है, जिसके विचारो से भारत का एक बरा तबका जुड़ा हुआ है| कांग्रेस के इतिहास की सबसे बड़ी हार 2014 के लोकसभा चुनाव वक़्त भी उन्हे 10.5 करोड़ लोगो का वोट मिला | इतना ही नहीं भाजपा और संघ के हर संभव प्रयास के बाबजूद उन्हे 14.5 करोड़ वोट ही मिला| भाजपा मात्र 31 फीसदी वोट जुटा पाई 2014 के लोसभा चुनाव मे, जबकि उनके खिलाफ 69 फीसदी लोग ने वोट डाला था|
विश्व का इतिहास पलट कर देखे तो Germany, Yugoslavia से लेकर USSR तक सबके विगठन होने से पहले कुछ इसी तरह का नारा देखने को मिलता है| जर्मनी मे Hitler कम्यूनिस्ट पार्टी, समाजवाद और Jews को जर्मनी का सबसे बड़ा दुश्मन बता कर सत्ते पर काबिज हो गया| लेकिन उसके बाद जर्मनी की क्या दुर्दशा हुई वो आज भी इतिहास गवाह है| Yugoslavia मे भी कुछ ऐसा ही हुआ| वहां की कम्यूनिस्ट पार्टी को सबसे बड़ा दुश्मन बता कर उसे ख़त्म किया गया| देश की उन्नति के बदले देश टूट गया| USSR की कहानी तो सबको याद होगी, किस तरह वहां की कम्यूनिस्ट पार्टी को देश का सबसे बड़ा दुश्मन बता कर ख़त्म किया गया, लेकिन उसके बाद USSR छः महीना भी साथ नही रही और कितने ही हिस्सो मे बंट गयी|
इतिहास हम सबके लिए आने वाले समय का झलक दिखती है और वर्तमान मे घटने वाली घटना का क्या अंजाम होगा वो बताती है| भाजपा और संघ कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देकर एक पूंजीपति युक्त हिंदू राष्ट्र के गठन का जो नारा दे रहे हैं, वो हो ना हो लेकिन देश का विघटन तय है| इंदिरा जी ये बात बहुत पहले भांप गयी थी, शायद इसलिए उन्होने धर्म निरपेक्ष, समाजवादी शव्द संविधान के प्रस्तावना पत्र मे संशोधन करके लाई|
40 वर्ष बीत गए, कई गैर कांग्रेस सरकार आई लेकिन किसी ने ये दो शब्दो को हटाने या आघात नही पहुंचाया जितना की पिछले दो वर्षो मे मोदी सरकार और संघ के लोगो ने किया है| आज कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जिस तरह दलित- मुसलमान समुदाय को प्रताड़ित किया जा रहा वो अपने आप मे उनके मन मे भारत के संविधान ओर देश के प्रति एक कुंठित भावना पैदा कर रही है| समाज को जाति, धर्म, लिंग के आधार पर बांटने की कोशिश किसी समाज को प्रगतिशील नही बनाती|
वक़्त आ गया है की आज हम समाज मे “ एक इंसान, एक सम्मान” की राह पर चलें।

(इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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