केवीआईसी (खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग)की ऋण वसूली प्रक्रिया खराब: कैग

केवीआईसी (खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग)की  ऋण वसूली प्रक्रिया खराब: कैग

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नयी दिल्ली: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक :कैग ने कहा है कि खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग :केवीआईसी द्वारा उचित ऋण वसूली प्रक्रिया नहीं अपनाये जाने से 551.46 करोड़ रपये की वसूली नहीं हो पायी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कर्ज की वसूली नहीं होने से 226.70 करोड़ रपये का कोष संस्थानों से लिये कर्ज के भुगतान में चला गया जबकि यह राशि विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के जरिये विकास के लिये थी।

केवीआईसी रिण नियम, 1958 आयोग को उसके पास या राज्य सरकारों के खादी एवं ग्रामीण उद्योग बोर्ड के साथ पंजीकृत विभिन्न संस्थानों को कर्ज के रूप में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अधिकार देता है।

वित्त पोषण केवीआईसी को कर्ज के रूप में भारत सरकार के बजटीय संसाधन के जरिये किया गया।

केवीआईसी ने भारतीय स्टेट बैंक के साथ 1995-96 से 2001-02 के दौरान कंसोर्टियम बैंक क्रेडिट :सीबीसी: व्यवस्था के तहत केवीआई संस्थानों को कोष वितरित किया।

केवीआईसी ने एसबीआई से कोष लेकर उसे लाभार्थियों :केवीआईबी तथा संस्थानों: को वितरित किया और उसे एसबीआई को पैसा लौटाने के लिये लाभार्थियों से मूल एवं ब्याज वसूलना था।

संसद में आज पेश कैग रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2015 की स्थिति के अनुसार कुल बकाया 1,008.30 करोड़ रपये :भारत सरकार: तथा 509.3 करोड़ रपये :सीबीसी: थे। केवीआईसी कोष तथा सीबसी कोष से लिये गये कर्ज के संदर्भ में 272.48 करोड़ रपये तथा 278.98 करोड़ रपये लाभार्थियों के उपर बकाया थे।

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि केवीआईसी के पास बकाया रिण वसूली के लिये कोई व्यवस्था नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार इतना ही नहीं सीबीसी व्यवस्था के तहत एसबीआई को कर्ज लौटाने के लिये केवीआईसी ने वह राशि जो विकास कायो के लिये थे। एसबीआई को मार्च 2015 तक 226.70 करोड़ रपये कर्ज लौटाये गये।

Courtesy: NBT

Categories: Finance, India

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