पत्‍नी के कहने पर बॉक्‍सर से साइक्लिस्‍ट बने आशिक, दो बार ओलंपिक में गए, अब रिक्‍शा चलाने को मजबूर

पत्‍नी के कहने पर बॉक्‍सर से साइक्लिस्‍ट बने आशिक, दो बार ओलंपिक में गए, अब रिक्‍शा चलाने को मजबूर

साइक्लिंग कॅरियर खत्‍म होते ही आशिक की किस्‍मत भी उनसे रूठ गई।

Aashiq-620x400पाकिस्‍तान का एक ओलंपियन आज रिक्‍शा चलाने को मजबूर है। बतौर बॉक्‍सर कॅरियर की शुरुआत करने वाले मोहम्‍मद आशिक रोज अपनी ट्रॉफियों को गौर से देखते हैं। उनकी सारी ट्रॉफियां उनको शानदार साइक्लिंग की बदौलत‍ मिली हैं। लेकिन बॉक्‍सर से साइक्लिस्‍ट बनने की आशिक की कहानी उनके नाम के जैसे है। 1950 के दशक में पत्‍नी ने आश‍िक की चोटों पर नाराजगी जताई तो उन्‍होंने साइक्लिंग का फैसला किया। उन्‍होंने पाकिस्‍तान की तरफ से 1960 के रोम ओलंपिक और 1964 के टोक्‍यो ओलंपिक में हिस्‍सा लिया। उन्‍हें कोई मेडल नहीं मिला, मगर वह पाकिस्‍तान के हीरो के तौर पर पहचाने जाने लगे। न्‍यूज एजेंसी एएफपी से बातचीत में आशिक बताते हैं, ”मैं बहुत खुश था। मैं ओलंपिक में पाकिस्‍तान की नुमाइंदगी करके खुद को किस्‍मतवाला समझा।” लेकिन साइक्लिंग कॅरियर खत्‍म होते ही आशिक की किस्‍मत भी उनसे रूठ गई। इसके बाद उन्‍होंने पीआर का काम शुरू किया लेकिन खराब सेहत की वजह से 1977 में छोड़ दिया। टैक्‍सी चलाने के अलावा कई छोटे-मोटे धंधों में हाथ आजमाने के बाद आशिक पिछले छह साल से लाहौर में रिक्‍शा चला रहे हैं।

वह 450 वर्गफुट के एक घर में रहते हैं जिसका करीब दस लाख रुपए बकाया है। रिक्‍शा चलाने के बाद वह करीब 400 रुपए प्रतिदिन की कमाई कर पाते हैं। उनकी पत्‍नी की मौत हो चुकी है और चारों बच्‍चे उनके साथ नहीं रहते। वह कभी अपने रिक्‍शा पर अपने मेडल्‍स टांग कर चलते थे, पर अब नहीं। इसकी बजाय अब उनके रिक्‍शा पर पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति केल्विन कुलिज का एक मशहूर कथन लिखा हुआ है- ”वे देश जो अपने नायकों को भूल जाते हैं, कभी समृद्ध नहीं हो सकते।” जब लोग उनसे इस संदेश की वजह पूछते हैं, तब आशिक उन्‍हें अपनी कहानी सुनाते हैं। आशिक कहते हैं, ”शायद ज्‍यादातर लोगों को लगता है कि मैं मर गया हूं। मुझे याद है कि मैंने पूर्व पाकिस्‍तान प्रधानमंत्रियों, राष्‍ट्रपतियों और मुख्‍य अधिकारियों से हाथ मिलाया है। कैसे और क्‍यों उन्‍होंने मुझे भुला दिया, मुझे यकीन नहीं होता।”

आशिक की पत्‍नी और बच्‍चों ने सालाें तक उनसे जिंदगी के इस उतार के बारे में न सोचने की भीख मांगी। आशिक कहते हैं, ”एक बार मेरी पत्‍नी रोने लगी। मैंने पूछा क्‍यों… उसने कहा कि वह मेरी सेहत को लेकर परेशान है। उसने मुझसे हमेशा खुश रहने को कहा। उसने कहा कि जिन्‍होंने हमें भुला दिया है, मैं भी उन्‍हें भुला दूं। मैंने हामी भर दी और वह कुछ वक्‍त के लिए खुश हो गई। कुछ समय बाद, उसकी मौत हो गई।” यह दो साल पहले की बात है। अब वह अपने कांपते हाथों से अपनी मौत की दुआ मांगते हैं। वे कहते हैं, ”मैं दुआ करता हूं कि जन्‍नत में मेरी अपनी प्‍यारी बीवी से मुलाकात हो। मुझे लगता है कि हालात से भागने के लिए मरना बेहतर है।”

Courtesy: Jansatta

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