मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री जो GST जैसे बड़े संशोधन के दौरान संसद से गायब: जयराम रमेश

मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री जो GST जैसे बड़े संशोधन के दौरान संसद से गायब: जयराम रमेश

 

Jairam-RameshGST पर आज कांग्रेस नेता श्री जयराम रमेश ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कल राज्यसभा में 122 वाँ संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ। ये एक ऐतिहासिक विधेयक है, इससे ये अनुमान किया जा रहा है कि आर्थिक व्यवस्था और मजबूत होगी और जो टैक्स इंसिडेंस हैं वो कम होगा। हिंदुस्तान एक बड़ी कॉमन मार्किट के रुप में ऊभर कर आएगा।

एक और कारण है इसका ऐतिहासिक होना कि ये पहला संविधान संशोधन है जहाँ जब विधेयक पर चर्चा हुई लोकसभा में- 6 मई 2015 को, प्रधानमंत्री जी मौजूद नहीं थे और कल 3 अगस्त 2016 को जब ये संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में लाया गया और चर्चा हुई और पारित हुआ, तब भी प्रधानमंत्री जी मौजूद नहीं थे।

भारत और हमारे संविधान के इतिहास में कोई ऐसा संशोधन नहीं हुआ, जो प्रधानमंत्री जी की अनुपस्थिति में हुआ हो और GST विधेयक पारित होना, हमने ट्विटर पर पढ़ा है, प्रधानमंत्री जी ने क्या कहा है, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा में मौजूद नहीं थे। ऐसा लगता है कि संसद प्रधानमंत्री मुक्त हो गया है। लेकिन हम प्रधानमंत्री जी को संसद मुक्त नहीं होने देंगे। जवाबदेही उनकी संसद से है। वो तो संसद में ‘ईद का चांद’ हैं, आते हैं, तो केवल 5 -6 मिनट के लिए आते हैं, लेकिन संविधान संशोधन के समय में और वो भी GST के मामले में उनका लोकसभा और राज्यसभा में अनुपस्थित होना, ये संसद का अपमान है और हो सकता है कि नरेन्द्र मोदी जी GST के खिलाफ हों, शायद उनकी मजबूरी है कि उनको GST लाना था।

कांग्रेस पार्टी की एक मांग शत-प्रतिशत पूरी हुई, 100 प्रतिशत। एक मांग 90 प्रतिशत पूरी हुई, डिस्प्यूट्स सेटलमेंट के मामले में, जो अभी संशोधन किया गया है। एक मांग जो 1 प्रतिशत एडिशनल टैक्स हटाया गया, उससे हम 100 प्रतिशत संतुष्ट है। तीसरी मांग जो 18 प्रतिशत की सीमा है, सीमा की मांग GST बिल में आने का हमें आश्वासन दिया गया है। वो 18 प्रतिशत होगा या नहीं, वित्त मंत्री जी ने कहा है कि मैं व्यक्तिगत रुप से सहमत हूं, लेकिन मैं नहीं कह सकता कि राज्यों के मंत्री क्या कहेंगे। तो तीसरी मांग 60 प्रतिशत पूरी हुई है।

हम आज भी मानते हैं और मानते रहेंगे और ये बहस चलती रहेगी, दबाव रहेगा सरकार पर कि 18 प्रतिशत के ऊपर GST रेट नहीं लागू हो। विशेषज्ञों का मानना है कि 18 प्रतिशत से ऊपर अगर GST रेट हुआ तो इनफ्लेशन पर इसका बहुत महत्वपूर्ण असर होगा। बीजेपी चाहती है कि GST रेट राज्यों को, उद्योग जगत को फायदा पहुंचाए, लेकिन कांग्रेस पार्टी चाहती है कि GST रेट देश की जनता को फायदा पहुंचाए। उद्योग जगत, राज्यों और जनता के हित से ज्यादा हम जनता के हित को प्राथमिकता देते हैं और अगर कोई कोम्प्रोमाईज होना है तो वो जनता के हित की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए होना है।

हमने कल एक और महत्पूर्ण मांग कि सभी विपक्ष पार्टी सहमत हैं कि और जो 2 बिल आने वाले हैं और जो वित्त मंत्री ने कहा है कि शीतकालिन सत्र में आ सकता है, संभावना है। एक बिल का नाम है- C-GST Bill (सैंट्रल जीएसटी) और I-GST Bill (इंटर स्टेट जीएसटी), ये दो बिल संसद में आने हैं और हर एक राज्य अपना GST बिल पारित कराएगा।

हमारा ये शक है कि ये दोनों बिल मनी बिल घोषित किए जाएंगे, ताकि राज्यसभा में इस पर वोटिंग ना हो। ये हम अपने अनुभव के आधार पर कह रहे हैं। पिछले 2-3 महिने में आपने देखा है कई ऐसे विधेयकों को मनी बिल घोषित किया गया है। आधार विधेयक मनी बिल घोषित किया गया। एक प्राईवेट मैंबर रेज्यूलेशन जो कल आने वाला है, आंध्रप्रदेश के संदर्भ में, उसे भी कल वित्त मंत्री मनी बल घोषित करने का प्रयास करेंगे। क्योंकि राज्यसभा में वो विश्वास नहीं कर सकते कि उनको बहुमत मिल सकता है।

हमारा शक है कि दोनों बिल- C-GST Bill , I-GST Bill मनी बिल के रुप में ला सकते हैं। इसलिए कल सभी विपक्ष पार्टियों ने कहा कि आप इसे फाईनेंशियल बिल के रुप में लाईए ताकि इस पर राज्यसभा में बहस हो और वोटिंग हो। सभी विपक्ष नेता एक मत से बोले कि ये फाईनेंशियल बिल होना चाहिए क्योंकि GST हमारे देश के आर्थिक नक्शे को बदल रहा है, मूलभूत परिवर्तन हो रहा है, इसलिए इस पर राज्यसभा में बहस और वोटिंग होना जरुरी है।

तीसरी बात कि कल जो विधेयक पारित हुआ, वो एक मील पत्थर है। उस मील पत्थर तक पहुंचने में 10 साल लगे हैं। 3 साल तक मील पत्थर पर गुजरात के मुख्यमंत्री खड़े थे और जब भी हम उसके पास पहुंचते, उन्होंने हमें पीछे हटाया, क्योंकि वो उसके रक्षक थे, लेकिन कल हम उसे पार कर गए।

हमारा ये मानना है कि अगले 2-3 साल में और काम करने की जरुरत है। इन्फलेशन पर क्या असर होगा, क्या रेट तय किया जाएगा? बहुत सारे ऐसे सवाल हैं, क्या GST सरल टैक्स होगा, गुड एंड सिंपल टैक्स होगा या गुड एंड काम्पलिकेडिट टैक्स होगा, ये वक्त बताएगा। बहुत कुछ करना बाकि है, लेकिन ये मील पत्थर है।

कांग्रेस पार्टी ने प्रयास किया है कि इस मील पत्थर तक पहुंचते वक्त हमारे उपभोक्ताओं पर नकारात्मक असर ना पडे, ये हमारा मकसद था कि हम कैसे उन्हें सुरक्षित रखें, क्योंकि जब राज्यों के वित्त मंत्री बैठा करते थे तब बात चल रही थी 23-24 % GST रेट की, हमने 18 प्रतिशत सीमा की मांग की और हम आज भी उम्मीद करते हैं कि ये 18 प्रतिशत राज्यों, उद्योग जगत और सबसे ज्यादा जनता के हित में है।

कांग्रेस पार्टी सहयोग देती रहेगी, लेकिन जो मांग हमने कल की है, सारी विपक्षी पार्टियों ने उसका समर्थन किया है कि ये दो बिल मनी बिल के रुप ना लाकर फाईनेंशियल बिल के रुप में लाया जाए, इस मांग को हम दोहराते हैं और मांग करते हैं कि ये मनी बिल का रास्ता सरकार नहीं अपनाए।

बहस होती रहेगी, बहुत से मुद्दे अभी खुले हैं और जिस रचनात्मक वातावरण में कल बहस हुई ये अपने आप में एक सकारात्मक संकेत देता है और हम उम्मीद करते हैं कि ये रचनात्मक वातावरण बरकरार रहेगा और इस वातावरण में वार्तालाप जारी रहेगा। वार्तालाप तभी रचनात्मक होता है जब सरकार एक खुले मन से विपक्ष के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हो।

 

 

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