5 सालों के लिए खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य तय, 6% से ज्यादा नहीं होगी महंगाई

5 सालों के लिए खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य तय, 6% से ज्यादा नहीं होगी महंगाई

inflation-580x395नई दिल्लीः सरकार ने अगले पांच सालों के लिए खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य 4 फीसदी रखा है जिसमें 2 फीसदी तक कमीबेशी मंजूर होगी. इसी के हिसाब से अगले पांच सालों के दौरान तय होगा कि ब्याज दरें घटायी जाए या बढ़ायी. इस बीच, 9 अगस्त को मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर घटने के आसार नहीं के बराबर है.

रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन की आखिरी मौद्रिक नीति समीक्षा के ऐन पहले सरकार ने अगले 5 सालों के लिए खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य तय करने का ऐलान किया. ये लक्ष्य ऐसे समय में भी आया है जब मौद्रिक नीति की समीक्षा की जिम्मेदारी गवर्नर के बजाए 6 सदस्यों वाली एक कमेटी को दी जा रही है. समझा जा रहा है कि नया लक्ष्य, नयी कमेटी के लिए आधार का काम करेगा और इसी के आधार पर वो नीतिगत ब्याज दरों में फेरबदल का फैसला करेगी.

नया लक्ष्य 4 फीसदी का है जिसके साथ दो फीसदी ऊपर नीचे का रेंज भी दिया गया है. मतलब ये कि लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा छह फीसदी और कम से दो फीसदी तक जा सकता है. ऐसे में समझा जा सकता है अगर खुदरा महंगाई दर ऊपरी बैंड के करीब रहती है तो नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कमी शायद नहीं होगी, लेकिन यदि 4 फीसदी या उससे भी नीचे जाए तो ब्याज दर घटने के पूरे आसार रहेंगे. हालांकि अंतिम फैसला मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी विभिन्न परिस्थितियों और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगी.

वैसे तो रिजर्व बैंक औऱ सरकार के बीच बीते साल भी एक समझौता हुआ है जिसके मुताबिक खुदरा महंगाई दर को 2 से 6 फीसदी के बीच रखने पर सहमति बनी थी. लेकिन इसे कोई वैधानिक स्वरूप नहीं मिला था, लेकिन अब संसद से मंजूर रिजर्व बैंक कानून में फेरबदल के जरिए ही लक्ष्य तय किया गया है. फिलहाल
-जून के महीने में खुदरा महंगाई दर 5.77 फीसदी रही जो बीते साल हुए समझौते और नए लक्ष्य की ऊपरी सीमा के करीब है.
-ऐसे में 9 अगस्त यानी मंगलवार को होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दर घटने के आसार ना के बराबर हैं.

जानकारों की मानें तो इस बार भले ही ब्याज दर भले ही कम नहीं हो, लेकिन ये स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी. क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी के जोशी कहते हैं कि अभी खुदरा महंगाई दर थोड़ी ऊपर है, लेकिन मानसून की बेहतर स्थिति और कच्चे तेल की घटती कीमतों के मद्देनजर इसमें कमी आएगी जिससे जिससे ब्याज दरों में कमी का रास्ता खुलेगा.

इस बीच खुदरा महंगाई दर के नए लक्ष्यों के मद्देनजर वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यदि लगातार तीन तिमाही तक खुदरा महंगाई दर 6 फीसदी से ऊपर रहती है या फिर 2 फीसदी से नीचे, तो इसका मतलब ये होगा कि लक्ष्य हासिल करने में रिजर्व बैंक को विफलता मिली. ऐसे में रिजर्व बैंक को सरकार के पास एक रिपोर्ट भेजकर विफलता के कारणों और फिर से लक्ष्य हासिल करने की कोशिशों के लिए उपायों का जिक्र करना होगा. ये नयी व्यवस्था 5 अगस्त 2016 से लेकर 31 मार्च 2021 तक प्रभावी होगी.

Courtesy: ABPNews

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