रियो ओलंपिक: बैडमिंटन में मेंस से ज्यादा वुमेंस से है मेडल की आस

रियो ओलंपिक: बैडमिंटन में मेंस से ज्यादा वुमेंस से है मेडल की आस

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नई दिल्ली: बैडमिंटन उन खेलों में से है, जहां स्थिति पिछले ओलंपिक जैसी ही है. लगभग वही खिलाड़ी एक बार फिर कोर्ट में उतरेंगे. मेंस मुकाबलों में पिछली बार पी कश्यप थे इस बार श्रीकांत कंदाबी हैं. उनकी खासियत ये है कि वो दो बार के ओलंपिक चैंपियन चीन के लिन डेन को एक बार सनसनीखेज तरीके से हरा चुके हैं. लेकिन सच यही है कि ऐसे करिश्मे रोज-रोज नहीं होते. पिछली बार की तरह ही डबल्स में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ही है. महिलाओं में सायना नेहवाल के साथ इस बार पीवी सिंद्धू भी हैं. मेंस डबल्स में मनु अत्री और सुमित रेड्डी हैं. लेकिन बैडमिंटन के खेल में मेडल की उम्मीद पुरूषों के मुकाबले महिलाओं से कहीं ज्यादा है, खासतौर पर सायना नेहवाल और पीवी सिंद्धू से.

सायना नेहवाल अब भी हैं बड़ी दावेदार

इस विज्ञापन को देखिए, सायना की आखिरी लाइन सुनिए जहां वो कहती हैं बच्चों से कभी ये ना कहना कि वो कुछ बन नहीं सकते, सबसे बड़ी चोट तब ही लगती है. असल में इस विज्ञापन का उनके करियर से गहरा रिश्ता है. 2012 में जब वो ओलंपिक ब्रांज मेडलिस्ट बनीं तो लोगों ने पीठ पीछे ये कहाकि वो तो उनकी विरोधी खिलाड़ी घायल हो गईं वरना वो सायना को जीतने नहीं देतीं. इसके बाद जब सायना नेहवाल ने कोच गोपीचंद की एकेडमी छोड़कर बैंगलोर में विमल कुमार की एकेडमी ‘ज्वाइन’ की तो लोगों ने कहाकि ये सायना के करियर का सबसे गलत फैसला है. जब सायना बीच में कुछ समय के लिए फिटनेस और फॉर्म से जूझ रही थीं तो लोगों ने उनके करियर को खत्म तक मान लिया था. लेकिन इन बातों से सायना नेहवाल ने दिल पर चोट नहीं लगने दी. उन्होंने अपनी मेहनत और जुनून को जिंदा रखा. नतीजा एक बार फिर रियो ओलंपिक्स में वो भारत की दावेदारी पेश करेंगी.

दरअसल, 2015 में सायना नेहवाल दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बन गई थीं. लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के बाद चोट ने उन्हें काफी परेशान किया. उन चोटों को काबू में करके उन्होंने इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता. सायना जानती हैं कि ये उनका आखिरी ओलंपिक है. सायना फिलहाल 26 की है, अगले ओलंपिक तक उनकी उम्र 30 साल होगी. यानी अगर ओलंपिल मेडल का रंग बदलना है तो इससे अच्छा मौका नहीं मिलने वाला है. सायना के खेल पर पैनी नजर रखने वाले कहते हैं कि अगर वो फिट रहीं तो ये कारनामा कर सकती हैं. सायना नेहवाल को ओलंपिक में 9वीं सीड मिली है और वो ग्रुप G में हैं. सायना की सबसे बड़ी खासियत उनका जुझारूपन है. मेरे साथ हुई बातचीत में वो कई बार कह चुकी हैं कि वो ‘काबिल’ से कहीं ज्यादा ‘मेहनती’ खिलाड़ी हैं. उनके करियर में सबसे बड़ी दिक्कत है चीन की खिलाड़ी, जो मंजिल के रास्ते में कहीं ना कहीं टकरा ही जाती हैं. चीन का दबदबा हर कोई जानता है.

क्या मुस्कराने का मौका देंगी पीवी सिंद्धू
पीवी सिंद्धू करीब 21 साल की हैं. उनके माता पिता दोनों वॉलीबॉल के खिलाड़ी रहे हैं. पिता को अर्जुन अवॉर्ड मिल चुका है. सिंद्धू ‘नैचुरली टेलेंटेड’खिलाड़ी हैं. शारीरिक बनावट के लिहाज से भी पीवी सिंद्धू सायना नेहवाल से थोड़ी अलग हैं. सायना 5 फुट 5 इंच की है जबकि पीवी सिंद्धू की लंबाई 5 फुट 10 इंच के पास है. बैडमिंटन कोर्ट में दमदार शॉट लगाने से लेकर कोर्ट को कवर करने तक में ये लंबाई खूब काम आती है. ओलंपिक में उन्हें 9वीं सीड मिली है, वो ग्रुप M में हैं. पीवी सिंद्धू की खासियत ये है कि कई बार उन्हें खुद पता नहीं होता कि उन्होंने कारनामा कैसे किया. उनका नाम तब सुर्खियों में आया था जब उन्होंने 2013 में मलेशिया ओपन जीता था. उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप का ब्रांज मेडल जीतकर फिर सुर्खियां बटोरीं थीं. कठिन से कठिन शॉट खेलने के बाद भी वो आपको मुस्कराते हुए दिख जाएंगी. सिंद्धू का ये पहला ओलंपिक है, जाहिर है उस लेवल का तनाव उन्होंने देखा नहीं है, लेकिन यही उनकी खासियत भी है क्योंकि वो तनाव लेकर खेलने वाली खिलाड़ियों में से नहीं है. सायना नेहवाल के बैंगलोर जाने के बाद गोपीचंद ने उन्हें तैयार किया है. पीवी सिंद्धू, गोपीचंद के लिए बैडमिंटन का आने वाला कल हैं.

क्या इस बार साथ देगी किस्मत
ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोडी को एक साथ खेलने का अनुभव है. ये दोनों खिलाड़ी एक दूसरे को समझती हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत के बाद पिछले ओलंपिक में इन दोनों का ही दावा मजबूत था, लेकिन फिक्सिंग ने सब चौपट कर दिया था. ज्वाला-अश्विनी मायूस हुए थे. इस बार उनके पास उस मायूसी को दूर करने का मौका है. ज्वाला गुट्टा आए दिन विवादों में भी रहती हैं. उन्होंने कोच गोपीचंद के खिलाफ बगावत की है. भारत सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम यानी ‘TOP’ में अपने आप को शामिल किए जाने को लेकर भी उन्होंने काफी हो हल्ला किया था. अब वक्त आ गया है जब वो अपने तमाम गिले शिकवों को भूलकर कोर्ट में कमाल करें और बताएं कि उन्होंने वाकई मेहनत की है और वो वाकई तमाम सहूलियतों और विवादों से ऊपर जीत को मानती हैं. ज्वाला गुट्टा अपने स्टाइल और बोल्ड लुक को लेकर भी चर्चा में रहती हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी एक फोटो सोशल नेटवर्किंग साइट पर डाली थी, जिसमें वो अपनी पीठ का टैटू दिखा रही थीं, जो बताता है कि रियो जाने के लिए वो पूरी तरह तैयार हैं.

Courtesy: ABPNews

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