गुजरात: मीटिंग में आनंदीबेन ने अमित शाह पर लगाए गंभीर आरोप, सीएम परिवर्तन के तरीके से नरेंद्र मोदी नाखुश!

गुजरात: मीटिंग में आनंदीबेन ने अमित शाह पर लगाए गंभीर आरोप, सीएम परिवर्तन के तरीके से नरेंद्र मोदी नाखुश!

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नाटकीय घटनाक्रम के बाद जब विजय रुपानी को गुजरात का नया सीएम घोषित किया गया तो मीडिया में इसे अमित शाह की जीत बताया गया। इस पूरे मामले से ऐसा लगने लगा है जैसे आनंदीबेन पटेल का करीब दो साल लम्बा कार्यकाल गुजरात में अमित शाह और नरेंद्र मोदी की राजनीतिक बादशाहत के बीच एक अस्थायी व्यवधान भर था। अमित शाह राजनीतिक इच्छाशक्ति और निर्मम दृढ़ता दिखाते हुए आनंदीबेन पटेल की मर्जी के उलट अपने भरोसेमंद रुपानी को सीएम बनवाने में सफल रहे। शाह को इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का भी साथ मिला। लेकिन उन्हें इसकी एक कीमत भी चुकानी पड़ी है। वो कीमत है, राज्य में पार्टी की छवि को लगा धक्का।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय विजय रुपानी के चयन को लेकर संतुष्ट लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन जिस तरह हुआ उसे लेकर वो खुश नहीं है। इसकी एक वजह ये है कि हालिया घटनाक्रम से राज्य में पटेल समुदाय के बीजेपी से दूर होने की आशंका। ये आशंका उस समय भी दिखी जब नितिन गडकरी ने दिल्ली में रुपानी के नाम की आधिकारिक घोषणा की। उनकी घोषणा के बाद पार्टी के नेताओं पर कोई खाश खुशी या उत्साह नहीं दिखा। फिर भी, शाह जो चाहते थे वो हो गया। जिस तरह से शाह ने अपने करीबी रुपानी को सीएम बनवाया उससे पार्टी के कार्यकर्ता और विधायक थोड़े चकित हैं। एक पूर्व मंत्री और बीजेपी सांसद कहते हैं, “रुपानी की वही भूमिका होगी जो रामायण में भरत की थी। वो कुर्सी पर पादुका रखकर शाह के नाम पर शासन करेंगे।” जब शाह 2010 में सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में दिल्ली में दर-ब-दर थे तो वो अक्सर रुपानी के आवास पर ही रुकते थे। उस समय रुपानी राज्य सभा सांसद थे।

पिछले दो महीनों के घटनाक्रम से साफ है कि पीएम मोदी और बीजेपी गुजरात में 2017 में होने वाले विधान सभा के लिए शाह पर पूरा भरोसा कर रहे हैं। दो महीने पहले जब ये साफ हो गया कि आनंदीबेन की कुर्सी जानी तय है तो पीएम मोदी ने उनके साथ लंबी बैठक की। तभी गुजरात में अंदरखाने ये चर्चा होने लगी कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी आनंदीबेन ने पद छोड़ने की पेशकश कर दी है। उसके बाद उनकी विदाई की शर्तों पर पार्टी में मंथन शुरू हुआ।

आनंदीबेन इस शर्त के साथ पद छोड़ने को तैयार हुई थीं कि उनके बाद नितिन पटेल को गुजरात का सीएम बनाया जाएगा और पार्टी में वरिष्ठता का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उनके समर्थकों की मानें तो पीएम मोदी और बीजेपी दोनों ही उनकी इन मांगों से सहमत थे। इसी वजह से नितिन पटेल का नाम भावी सीएम के तौर पर मीडिया में चलने लगा। शाह और उनके समर्थकों ने उस समय इस मसले पर कोई जवाबी कार्रवाई न करते हुए दम साधे रखा। लेकिन आनंदीबेन का औचक तरीके से और वो भी फ़ेसबुक पर इस्तीफा देना उनके खिलाफ गया। सूत्रों के अनुसार मोदी और शाह को उनका “इस्तीफे जैसी गंभीर काम के लिए ये अलहदा तरीका चुनना पसंद नहीं आया।” कहा जा रहा है कि इस बीच अमित शाह ने पीएम मोदी से कहा, “साहब, जीतवानी गारंटी हु अपु छु. बाढ़ू इकवार मारा पर छोड़ी दो.” (साहब, जितवाने की गारंटी हम पर छोड़ दीजिए, बाकी आप इसे मेरे पर छोड़ दीजिए)। शाह के कहने का छिपा आशय था 2019 में लोक सभा चुनाव जीतने के लिए मोदी को उत्तर प्रदेश और गुजरात विधान सभा चुनाव में जीत हासिल करनी जरूरी है। मोदी और शाह की आपसी चर्चा की परिणति बीजेपी संसदीय दल की बैठक में शाह को गुजरात का नया सीएम चुनने के लिए अधिकृत किए जाने के रूप में हुई। शाह यही चाहते थे और इसी के साथ आनंदीबेन की शर्तों का भविष्य तय हो गया।

हालांकि 2, 3 और 4 अगस्त को आनंदीबेन ने पटेल विधायकों के साथ कड़वा और लेवुआ पटेलों को लामबंद करके पटेलों की ताकत दिखाने की कोशिश की लेकिन शाह अपना मन बना चुके थे। शाह को पूरा भरोसा था कि वो विधायकों को ये समझाने में कामयाब रहेंगे कि रुपानी सबसे बेहतर उम्मीदवार हैं। शाह को उनमें “किलर इंस्टिंक्ट” दिखती है। वो हरियाणा का “गैर-जाट”, महाराष्ट्र का “गैर-मराठा” और झारखण्ड का “गैर-आदिवासी” प्रयोग गुजरात में भी दोहराना चाहते थे। इसीलिए वो गुजरात में गैर-पटेल नेता चाहते थे। शाह ये संदेश देना चाहते हैं कि बीजेपी जाति से ऊपर उठकर नेताओं का चुनाव करती है।

दूसरी तरफ आनंदीबेन की तरफ से मिले भरोसे के बाद नितिन पटेल ने मीडिया को भावी सीएम के तौर पर इंटरव्यू देना शुरू कर दिया. उन्होंने अपने समर्थकों के लिए मिठाई का भी ऑर्डर दे दिया था। उनके गृह जनपद में फैसले की घोषणा से पहले ही खुशियां मनाई जाने लगी थीं। सूत्रों के अनुसार मोदी और शाह ने इस “अपरिपक्वता” के तौर पर देखा। नितिन पटेल ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका नाम क्यों नहीं चुना गया। पटेल ने कहा, “जिन्होंने फैसला लिया है, उनसे पूछिए।”

सीएम के नाम की घोषणा से पहले शुक्रवार शाम को शाह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से बैठक की थी। ये पहला मौका था जब इस्तीफे के बाद आनंदीबेन और शाह आमने-सामने हो रहे थे। सूत्रों के अनुसार आनंदीबेन का पारा काफी गरम था। उन्होंने जमकर अपनी भडा़स निकाली। आनंदीबेन की शिकायत थी कि सीएम के तौर पर उनके कार्यकाल को पार्टी ने कम तवज्जो दी। बैठक में आनंदीबेन भावुक हो गईं और शाह पर दखलंदाजी करने को लेकर गंभीर आरोप लगाए। शाह ने उनके आरोपों को हल्के में नहीं लिया. रुपानी के नाम का प्रस्ताव पेश करते हुए शाह ने कहा कि उन्होंने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होते हुए भी गुजरात बीजेपी के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं दिया। शाह के अनुसार पार्टी ने सीएम चुनने का जिम्मा उन्हें सौंपा है और उनकी पंसद रुपानी हैं। उनके ऐसा कहते ही संगठन सचिव वी सतीश संघ के नेताओं और पीएम मोदी से बात करने के लिए बाहर निकल आए। माना जा रहा है कि मोदी ने उनसे कहा कि गुजरात का अगला सीएम चुनने का जिम्मा अमित शाह को सौंपा गया है। इस तरह मोदी ने गेंद फिर से शाह के पाले में डाल दी। इसके बाद निराश आनंदीबेन के पास शाह के फैसले को स्वीकार करने के सिवा कोई दूसरा चारा नहीं था।

Courtesy: Jansatta

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