छत्तीसगढ़: शिक्षा और स्वच्छता का महत्व बताकर, गांवों की सूरत बदल रही हैं महिलाएं

छत्तीसगढ़: शिक्षा और स्वच्छता का महत्व बताकर, गांवों की सूरत बदल रही हैं महिलाएं

school-580x349प्रतीकात्मक तस्वीर

रायपुर: छत्तीसगढ़ की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. रायगढ़ जिले की रामेश्वरी साव और कुंतीबाई जैसी कई महिलाएं हैं जो लगातार अपने गांव की सूरत बदलने में लगी हुई हैं. इनकी कोशिशों से शिक्षा और स्वच्छता को लेकर बेहद सकारात्मक बदलाव आए हैं.

रायगढ़ जिले की रामेश्वरी साव ग्राम पंचायत कोड़ातराई में प्रेरक हैं. वह पिछले एक साल से घर-घर जाकर लोगों को शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही हैं. कोड़ातराई पंचायत में कुल 1,100 परिवार हैं. इनमें से 900 परिवारों में शौचालय का निर्माण हो चुका है और बाकी 200 घरों में शौचालय निर्माण का काम जारी है.

रामेश्वरी गांव में 14 वर्ष से अधिक उम्र वालों को शिक्षित करने का कार्य भी करती हैं. जो लोग शिक्षा केंद्र में नहीं आ पाते, उन्हें उनके घर जाकर वे शिक्षा का महत्व समझाती हैं.

गांव में लोक शिक्षा केंद्र की ओर से पुस्तकालय में ही कक्षाएं लगाई जाती हैं. वहां गांव वाले पुस्तक और अखबार पढ़ते हैं. नियमित अध्ययन और वाचन से गांव में शिक्षा का प्रसार हो रहा है. साथ ही इससे शिक्षा के प्रति बेहद सकारात्मक माहौल तैयार हुआ है.

रामेश्वरी बताती हैं कि पहले गांव में आवागमन की सुविधा अच्छी नहीं थी. रास्तों में कीचड़ और गड्ढों से लोगों को बहुत परेशानी होती थी. अब सीसी रोड बनने से लोगों को काफी राहत मिली है.

रायगढ़ जिले के ही तमनार विकासखंड के ग्राम पंचायत जिंवरी की उपसरपंच कुंतीबाई बताती हैं कि उनके पंचायत में सरपंच और सभी पंच स्वच्छता को लेकर काफी गंभीर हैं. उनका गांव तमनार विकासखंड का पहला गांव है, जो पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त है.

इसी तरह जिंवरी में नल-जल योजना के तहत पानी की टंकी बनवाई गई है और अब वहां हर घर में नल द्वारा पानी पहुंचाया जा रहा है. लोग पहले पेयजल के लिए कुएं और हैंडपम्प का पानी भरते थे. लेकिन अब गांव में नल-जल योजना शुरू हो जाने से लोगों को काफी सहूलियत हो रही है.

जिंवरी में पहले मिडिल स्कूल तक की ही कक्षाएं लगती थीं. शिक्षा के प्रति जागरूकता बढने के बाद गांववाले वहां हाईस्कूल खोलने की मांग लगातार कर रहे थे. ग्रामीणों की यह मांग पूरी हो गई है और चालू शिक्षा सत्र से ही वहां हाईस्कूल की कक्षाएं लगनी शुरू हो जाएंगी.

कुंतीबाई बताती हैं कि उनके पंचायत में आंगनबाड़ियों में किशोरी बालिका योजना के तहत स्वच्छता से संबधित जानकारी और पोषण आहार दिया जाता है. उनके तीनों बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और उन्हें शासन की छात्रवृत्ति योजना का लाभ हर साल मिल रहा है.

Courtesy: ABPNews

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