विजय रूपानी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली, आनंदीबेन मंत्रिमंडल के 9 चेहरों की छुट्टी

 

Vijay Rupaniअहमदाबाद: गुजरात में नये मुख्यमंत्री के तौर पर विजय रूपानी ने आज शपथ ले ली. नये मंत्रिमंडल में 8 कैबिनेट मंत्री और 16 राज्यमंत्रियों को भी पद और गोपनियता की शपथ दिलाई गई. साथ ही आंनदीबेन मंत्रिमंडल के करीब 9 मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई. गुजरात में पूरी तरह अब अमित शाह का ‘कब्जा’ हो गया है.

मंत्रिमंडल में भी आनंदीबेन पटेल के सभी करीबी कहे जाने वाले वसुबेन त्रिवेदी और रजनी पटेल जैसे मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई है. बडे नेता सौरभ पटेल की भी छुट्टी हो गई है. सीनियर मंत्री रहे रमण लाल वोरा को भी मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है. रमण वोरा दलित समुदाय से आते हैं. उनकी जगह इस बार विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे आत्माराम परमार ने ली. रमण वोरा के नये विधानसभा स्पीकर बनने की चर्चा है.

गृह राज्य मंत्री रहे रजनी पटेल बहुचराजी सीट से जीतकर आये थे. पाटीदार आंदोलन के दौरान भीड़ ने दो बार इनके घर को आग के हवाले कर दिया था. ये पद अब अमित शाह के करीबी के जिम्मे है. जबकि विधानसभा के अध्यक्ष गणपत वसावा मंत्रिमंडल में नया चेहरा होंगे.

हालांकि गणपत वसावा अध्यक्ष बनने से पहले भी मंत्री रह चुके हैं. गणपत वसावा आदिवासी नेता हैं. राजेंद्र त्रिवेदी भी राज्यमंत्री होंगे. वह वडोदरा की रावपुरा सीट से जीतकर आये हैं. इनके आने से हिन्दुत्व राजनीति को बल मिलेगा. ये गुलबर्ग कांड में कई आरोपियों के वकील थे. निर्मला वाघवानी, अहमदाबाद को नरोडा सीट जीतकर आये है. सिंधी समुदाय से हैं. पटेलों की सत्ता जाने के बाद उन्हें खुश रखने की कोशिश हुई है. उन्हें पहले से एक ज्यादा सीट मिली है.

आनंदीबेन पटेल ने कुछ दिन पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट डालकर इस्तीफा देने के अपने फैसले की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि वह इस पद से हट जाना उपयुक्त समझती हैं क्योंकि वह इस साल नवंबर में 75 की हो जाएंगी. ऐसा माना जाता है कि प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्यों के मंत्रिमंडल में मंत्रियों के लिए यह ऊपरी उम्र सीमा तय कर रखी है.

 नए सीएम के रूप में चुने गए रूपानी को बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों का करीबी माना जाता है. जैन समाज से संबंधित होना भी एक हद तक उनके पक्ष में गया है. रूपानी राजकोट से हैं. उन्‍होंने युवावस्‍था में ही छात्र राजनीति में भाग लेना शुरू कर दिया था. इमरजेंसी के दौरान वे जेल में भी रहे. विजय रूपानी के अलावा नितिन पटेल का नाम भी मुख्‍यमंत्री पद की दौड़ में शामिल था लेकिन आखिरकार सियासी समीकरण रूपानी के पक्ष में बने और नितिन पटेल को उप मुख्‍यमंत्री पद से ही संतोष करना पड़ा.
Courtesy_NDTV
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