चुनाव जिताने की शर्त पर अमित शाह को मिला ‘अपना सीएम’

चुनाव जिताने की शर्त पर अमित शाह को मिला ‘अपना सीएम’

बीजेपी प्रेजिडेंट अमित शाह ने भले ही अपनी पसंद के मुताबिक गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर विजय रुपानी को नियुक्त करा दिया है, लेकिन इससे 2017 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी की सत्ता बरकरार रखने की जिम्मेदारी भी उन पर ही आ गई है। राज्य में प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता, पाटीदार कोटा आंदोलन और दलितों में गुस्से को देखते हुए यह काम आसान नहीं होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र सरकार में व्यस्त होने की वजह से उनके गृह राज्य गुजरात में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन को पक्का करना शाह पर निर्भर करेगा। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि आनंदीबेन पटेल के विकल्प के रूप में शाह की पसंद को मोदी ने इस वजह से सहमति दी है क्योंकि शाह ने उन्हें बीजेपी के अच्छे प्रदर्शन का भरोसा दिलाया है।

अगर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को सेमीफाइनल माना जाए तो गुजरात का चुनाव भी मोदी और शाह के लिए कम महत्वपूर्ण नहीं होगा। मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के समय राज्य में बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत थी, लेकिन आनंदीबेन के आने से बाद से पार्टी के लिए स्थितियां मुश्किल हो रही हैं।

हार्दिक पटेल की अगुवाई में हुए पाटीदार ओबीसी कोटा आंदोलन से निपटने में आनंदीबेन असफल रही थीं। इसके अलावा दिसंबर 2015 में नगर निकाय चुनावों में भी बीजेपी को कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी थी। उना में दलितों पर अत्याचार की घटना से भी पार्टी की लोकप्रियता पर असर पड़ा है। मई में यह अटकल लगनी शुरू हो गई थी कि आनंदीबेन को हटाया जाएगा और उस समय शाह ने संकेत दिया था कि आनंदीबेन के हटने से बीजेपी की संभावनाओं पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा था, ‘बीजेपी 2017 में गुजरात में जीतेगी। इसे लेकर कोई शक नहीं है।’

हालांकि, आनंदीबेन के हटने के बाद भी राज्य में बीजेपी सरकार के लिए मुश्किलें जारी रह सकती हैं और इनसे निपटने की जिम्मेदारी काफी हद तक शाह की होगी। छह महीने पहले, स्थानीय निकाय के चुनावों के पहले दौर में कांग्रेस ने ग्रामीण इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत की थी। पार्टी ने 31 जिला पंचायतों में से 23 में जीत हासिल की थी और 193 तालुका पंचायतों में से 113 पर कब्जा किया था।

हालांकि, शहरी इलाकों में बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा था और पार्टी ने छह म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को जीतने के साथ ही 56 म्यूनिसिपैलिटीज में से 42 में जीत हासिल की थी। शहरी स्थानीय निकाय के चुनावों के दूसरे दौर में कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा था। पार्टी ने 27 म्यूनिसिपैलिटीज में से 15 में जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस केवल आठ में ही जीत सकी थी। गुजरात में बीजेपी सरकार के सामने अब दलित समुदाय के गुस्से के रूप में एक और बड़ी राजनीतिक चुनौती है। हालांकि, बीजेपी नेताओं का शाह पर विश्वास है और उनका कहना है कि वह ग्रामीण इलाकों में भी कांग्रेस को पीछे धकेल देंगे।

Courtesy: Navbharattimes

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