मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू कल, ब्याज दरें घटने के आसार नहीं

मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू कल, ब्याज दरें घटने के आसार नहीं

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन मंगलवार को अपने कार्यकाल में आखिरी बार मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करेंगे

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एम सी गोवर्द्धन रंगन & सैकत दास, मुंबई
आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन मंगलवार को अपने कार्यकाल में आखिरी बार मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करेंगे। सितंबर में उनका कार्यकाल पूरा हो जाएगा और इस आखिरी समीक्षा में शायद ही कोई ऐसा होगा जो उनसे ब्याज दरों या लिक्विडिटी पर किसी ऐक्शन की उम्मीद कर रहा हो। अर्थशास्त्रियों की नजर हालांकि इस बात पर है कि ग्लोबल मार्केट्स और इंडियन इकॉनमी के बारे में राजन क्या कहेंगे।

तीन साल पहले राजन ने इंट्रेस्ट रेट बढ़ाकर सबको चौंका दिया था। राजन ने तब महंगाई के खिलाफ जंग छेड़ी थी। हालांकि इस बात के लिए कुछ लोगों ने उनकी काफी आलोचना की। तीन साल पहले राजन अपने पूर्ववर्ती डी. सुब्बाराव के लीक से हटकर उठाए गए कुछ कदमों के बाद इकॉनमी को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश में थे और उन्हें रुपये में स्थिरता लाने के उपाय शुरू करने पड़े थे।

महंगाई दर को 4 पर्सेंट पर लाने के टारगेट का अब सरकार ने भी समर्थन कर दिया है जिसका सुझाव आरबीआई ने दिया था। आने वाले समय में मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी का गठन होना है और वही रेट्स पर निर्णय किया करेगी। इस कमिटी के बारे में राजन की बातों पर सबकी नजर होगी। अभी कन्जयूमर प्राइस आधारित महंगाई दर लगभग दो वर्षों के उच्च स्तर पर है और अगर आरबीआई ने अपने आंकड़ों के आधार पर अनुमान जताया कि आने वाले दिनों में महंगाई और चढ़ सकती है तो इस साल तो ब्याज दरों में कमी का खयाल दिमाग से निकाल देना चाहिए।

 मंगलवार को हो सकता है कि राजन मौद्रिक या राजकोषीय नीतियों के बारे में बातें करने के साथ पिछले साल चीन की मुद्रा की कीमत घटने और हाल के सप्ताहों में यूरोपियन यूनियन से बाहर निकलने के ब्रिटेन के निर्णय के असर से रुपये को बचाने के लिए किए गए उपायों की चर्चा करें।

ऐक्सिस बैंक के अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य ने कहा, ‘विदाई की बेला में गवर्नर राजन का दिया जा रहा पॉलिसी स्टेटमेंट आत्मनिरीक्षण से भरा हो सकता है। इसमें उन कदमों पर बात हो सकती है जो उन्होंने इस संस्थान के लिए उठाए हैं। सरकार की राजकोषीय और प्रशासकीय नीतियों के साथ तालमेल बैठाकर आरबीआई दुनिया के सर्वाधिक विश्वसनीय केंद्रीय बैंकों में शामिल हो गया है।’

ईटी पोल में 16 अर्थशास्त्रियों और फंड मैनेजरों में एकराय दिखी कि रेपो रेट को 6.5% ही रहने दिया जाएगा। आरबीआई इस रेट पर बैंकों को उधार देता है। कुछ ही लोगों ने अनुमान जताया कि राजन पे कमीशन की लागू हुई सिफारिशों और जीएसटी को देखते हुए महंगाई दर का अनुमान बढ़ा सकते हैं। पिछले रिव्यू में आरबीआई ने मार्च तक खुदरा महंगाई दर के 5% पर पहुंचने का अनुमान जताते हुए कहा था कि इसमें ‘बढ़ोतरी का रुझान’ दिख रहा है। डोएचे बैंक के इकॉनमिस्ट कौशिक दास ने कहा, ‘सबसे बड़ा जोखिम पे कमीशन के चलते महंगाई को मिलने वाली हवा को लेकर है।’

Courtesy: NBT
Categories: Finance, India

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