अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी में आए स्वामी प्रसाद मौर्यः 47 दिन पहले छोड़ी थी BSP, मायावती पर लगाया था टिकट बेचने का आरोप

अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी में आए स्वामी प्रसाद मौर्यः 47 दिन पहले छोड़ी थी BSP, मायावती पर लगाया था टिकट बेचने का आरोप

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नई दिल्ली. बीएसपी से अलग हुए स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी में शामिल हो गए। सोमवार को बीजेपी हेडक्वार्टर में प्रेसिडेंट अमित शाह की मौजूदगी में उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ली। वे यूपी में चार बार विधायक रहे हैं। उन्होंने बीएसपी सुप्रीमो पर टिकट बेचने का आरोप लगाया था। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। वहां 8% मौर्या और कुशवाह हैं। स्वामी ने मायावती पर लगाए थे आरोप…

– मौर्य बीएसपी के जनरल सेक्रेटरी थे। उन्होंने कहा था- ”मायावती ने अंबेडकर के सपनों को तोड़ा हैं। मायावती मनुवाद के मकड़ जाल में बुरी तरह उलझ गई हैं।”
– मौर्य ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर संगीन आरोप लगते हुए कहा था कि उन्होंने अम्बेडकर के सपनों को बेचा है। पार्टी में दलितों की कोई सुध नहीं ले रहीं।
– मौर्य ने कहा कि टिकट में सौदेबाजी की वजह से बीएसपी 2012 का चुनाव हारी और अब 2017 में भी चुनाव हारेंगी।
– स्वामी प्रसाद ने कहा था, “मायावती आगामी चुनाव के लिए टिकट बेच रही हैं। बसपा नीलामी का बाजार बन गई है। कांशीराम ने जो नारा दिया था, लालच-मोह में आकर नारे को बदलने का काम किया गया। ”
– “2012 विधानसभा चुनाव में हम हारते नहीं क्योंकि एंटी इंकंबेंसी नहीं थी। 2014 चुनाव में उम्मीदवार पैसे लेकर घोषित हुए थे इसीलिए हारे। पिछले चुनाव से मायावती ने सबक नहीं लिया है। कितनी बार टिकट बेचा जाएगा? अभी इसकी सीमा नहीं है। 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती थी। 16 को मुझे निर्देश दिया गया कि भगवान बुद्ध, बाबा साहेब, काशीराम, दूसरे महापुरुषों के कार्यक्रमों में नहीं जाना है।”

कौन हैं स्वामी प्रसाद मौर्य?
– अक्टूबर 1996 से मार्च 2002 तक विधायक
– मार्च 1997 से अक्टूबर 1997 तक मंत्री
– सितंबर 2001 से अक्टूबर 2001 विधानसभा में नेता विपक्ष
– मई 2002 से अगस्त 2003 मंत्री
– पद्रौना विधानसभा सीट से विधायक
– कुल चार बार विधायक रहे।

– 22 जून 2016 को छोड़ी थी पार्टी।

– 8 अगस्त को बीजेपी में शामिल हुए।

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मायावती ने कहा था- अपने बेटा-बेटी के लिए टिकट चाहते थे मौर्य

– मौर्य के आरोपों का जवाब देने के लिए मायावती खुद मैदान में उतरीं थीं।

– माया ने कहा था- “मौर्या कभी चुनाव नहीं जीते। बीएसपी में उन्हें भविष्य नजर आया, तो वो हमारी पार्टी में आ गए। वो मुलायम की तरह हैं जो परिवार के मोह से बाहर नहीं आ सका।”
– “चुनाव हारने के बाद वो भटकने लगे। मैंने पार्टी के लोगों की सलाह मानकर उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया था। वो तो मुलायम के साथी थे। 2012 में उन्होंने कुशीनगर से बेटे के लिए टिकट मांगा।”
– “वो अगर पार्टी नहीं छोड़ते तो हम उन्हें निकाल देते। उन्होंने तो हम पर उपकार किया है। हमने इनके लड़के और लड़की दोनों को टिकट दिया लेकिन दोनों ही चुनाव हार गए। वो अपनी मर्जी से गए हैं। उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है। ”

– “इत्तफाक से मेरे मां-बाप ने मेरा नाम माया रख दिया। मेरे पास पैसे की कमी नहीं है। हमारे कार्यकर्ता अपनी हैसियत के हिसाब से पार्टी को चंदा देते हैं। मौर्या बताएं कि उन्होंने पार्टी को कितना चंदा दिया? लड़का कंट्रोल में नहीं है, लड़की की शादी हो चुकी है।”

– “स्वामी से मैंने साफ कहा था कि परिवारवाद यहां नहीं चलेगा। अगर वो सपा में जाते हैं तो वो उनके लिए सबसे सही जगह है। वहीं, परिवारवाद चल सकता है।”

Courtesy: Bhaskar.com