दीपा का फोकस बनाए रखने के लिए कोच ने किया ‘नजरबंद’, 120 साल में पहली बार भारत को जिमनास्टिक में दिला सकती हैं मेडल

दीपा का फोकस बनाए रखने के लिए कोच ने किया ‘नजरबंद’, 120 साल में पहली बार भारत को जिमनास्टिक में दिला सकती हैं मेडल

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रियो डि जिनेरियो. जिमनास्टिक्स में भारत के लिए मेडल की उम्मीद दीपा कर्माकर आज 23 साल की हो गईं। उनके बर्थ-डे पर भी दीपा के कोच बिश्वेश्वर नंदी उन्हें किसी से बात नहीं करने दे रहे हैं। उनके साथ सिर्फ दो लोग हैं। एक कोच और दूसरी उनकी रूममेट और वेटलिफ्टर साइकोम मीराबाई चानू। बता दें कि 1896 से हो रहे ओलिंपिक में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई भारतीय जिमनास्ट फाइनल में पहुंचा है। दीपा 14 अगस्त को मेडल जीत सकती हैं।  बात कैसे करें दीपा, मोबाइल में सिम कार्ड भी तो नहीं….

 

– न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, दीपा एक तरह से ‘हाउस अरेस्ट’ हैं। और ऐसा इसलिए है क्योंकि वे त्रिपुरा में अपने घर से 35 हजार किमी दूर रियो में भारत के लिए मेडल की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।

– दरअसल, कोच नंदी नहीं चाहते कि एक्सपेक्टेशंस की वजह से दीपा का फोकस बिगड़े।

– बता दें कि दीपा भारत की ओर से ओलिंपिक में जाने वाली पहली महिला जिमनास्ट हैं। आजादी के बाद से 11 भारतीय पुरुष जिमनास्ट ओलिंपिक में जा चुके हैं।

– इससे पहले 1952 में 2, 1956 में 3 और 1964 में 6 भारतीय जिमनास्ट ओलिंपिक में गए थे। लेकिन ये सारे पुरुष थे। 52 साल बाद दीपा के रूप में भारतीय जिमनास्ट ओलिंपिक खेल रहा है।

 

नंदी ने क्या कहा? 

– दीपा के कोच ने कहा, “मैंने उसके मोबाइल से सिम कार्ड निकाल लिया है। वो सिर्फ पैरेंट्स से बात कर सकती है। मैं नहीं चाहता कि उसका फोकस बिगड़े। बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए इंतजार भी किया जा सकता है। दीपा को भी इससे दिक्कत नहीं है। वो फिलहाल अपने गिनेचुने दोस्तों से भी दूर रहना चाहती है।”
पिता वेटलिफ्टिंग के कोच

– अगरतला में रहने वाली दीपा दो बहनों में छोटी हैं। पिता वेटलिफ्टिंग कोच हैं। दीपा ने तीन साल की उम्र में ही जिमनास्टिक्स सीखना शुरू किया था। तब उनकी कोच नंदी की पत्नी सुमा थीं।

 

जब इंडिविजुअल ऑलराउंड में क्वालिफाई किया तो वॉल्ट के फाइनल में कैसे पहुंची?

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– दीपा ने रियो ओलिंपिक के लिए महिला आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक के इंडिविजुअल ऑलराउंड इवेंट में क्वालिफाई किया था। इंडिविजुअल ऑलराउंड इवेंट में हर जिम्नास्ट को चार अलग-अलग एपरेटस वॉल्ट, अनइवेन बार्स, फ्लोर और बैलेंस बीम पर परफॉर्म करना होता है।
– परफॉर्मेंस के आधार पर हर इवेंट की एक साथ और अलग-अलग रैंकिंग बनती हैं। इस तरह कुल पांच इवेंट की रैंकिंग बनती है और पांचों के फाइनल में टॉप-8 जिम्नास्ट क्वालिफाई करती हैं।

– रैंकिंग के आधार पर दीपा ने वॉल्ट इवेंट में क्वॉलिफाई किया।

 

इसलिए ‘वॉल्ट ऑफ डेथ’ है प्रोडुनोवा

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– रूसी जिमनास्ट येलेना प्रोडुनोवा ने 90 के दशक में सबसे पहले यह वॉल्ट शुरू किया था। वे इसमें इतनी माहिर थीं कि यह वॉल्ट उनके नाम से मशहूर हो गया।
– मिस्र की महिला जिमनास्ट फादवा महमोंड 2013 में इस वॉल्ट को करते समय गर्दन के बल गिरी थीं। वे गंभीर रूप से चोटिल होने से बाल-बाल बची थीं।

– एक्सपर्ट्स ने कहा कि अगर कोई जिमनास्ट सिर के बल गिरे तो मौके पर ही उसकी मौत हो सकती है।
– दीपा सहित अब तक सिर्फ पांच जिमनास्ट ने प्रोडुनोवा वॉल्ट को कामयाबी के साथ पूरा किया है। इनमें एक खुद प्रोडुनोवा हैं।

Courtesy: Bhaskar.com

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