UP : नि:शुल्क इलाज का दावा खोखला, पैसे देने के बाद भी महिला ने गंवा दिया अपना पुत्र

UP : नि:शुल्क इलाज का दावा खोखला, पैसे देने के बाद भी महिला ने गंवा दिया अपना पुत्र

11_08_2016-11-08-2016--

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार का मुफ्त इलाज का दावा सिर्फ कागजों पर है। कम से कम बहराइच में तो ऐसा नहीं है। अगर मुफ्त दवा और इलाज की सुविधा होती तो हर कदम पर कीमत अदा करने के बाद भी महिला को अपना नौ माह का पुत्र न गंवाना पड़ता।

बहराइच जिले के एक सरकारी अस्पताल में गरीब महिला ने कड़वा सच देखा। यहां पर एक महिला से उसके बच्चे को इंजेक्शन लगाने के एवज में 20 रुपये, बेड पर लिटाने के लिए 30 रुपये तथा बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने के लिए सौ रुपये मांगे गये। महिला बेहद गरीब थी, इसके बाद भी उसने ‘कलयुग के भगवन’ की मांगों को पूरा किया। इसमें उसको थोड़ा समय लग गया। इसके कारण उसके नौ महीने के पुत्र की मौत हो गई। उधर डॉक्टरों का दावा है कि बच्चे का पूरा इलाज किया गया है।

बहराइच जिले के सरकारी अस्पताल में एक गरीब आदमी से उनके नौ महीने के बच्चे के इलाज के लिए हर कदम पर पैसे की मागं की गई। वहां इंजेक्शन लगाने के 20 रुपये, बच्चे को बेड पर लिटाने के 30 रुपये और बच्चे को भर्ती करने के लिए सौ रुपये मांगे गए जबकि सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त होता है। इसारा पैसा देने के बाद भी बच्चा मर गया। अब आरोपी स्टाफ़ को ड्यूटी से हटा कर मामले की जांच की जा रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि जितनी दवा और इंजेक्शन की जरूरत थी, सब दिए गए हैं, लेकिन बच्चा सिर्फ 9 महीने का था और उसकी हालत नाजुक थी, जिससे उसकी मौत हो गई।

बहराइच अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ओपी पांडे से जब मौत की वजह के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बच्चे को एंटीबायोटिक सुबह-शाम दी गई थी। एंटीबायोटिक लगाने में कोई देरी नहीं हुई। बच्चे के पिता की शिकायत यह है कि उससे भर्ती करने के लिए और बिस्तर देने के लिए पैसा मांगा गया। बच्चे के पिता शिवदत्त ने कहा कि यहां पर हर स्टाफ पैसा मांगता है। डॉक्टर को हटा कर बाकी जितने हैं, सब पैसा मांगते हैं, क्योंकि उनका प्राइवेट क्लीनिक भी है। वहां से बहुत पैसा आ जाता है। वहां पर दो से तीन सौ मरीज वह देखते हैं।

Courtesy: Jagran.com

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