PM मोदी को मिली ऐप पर सलाह, ‘आप गुलदस्ते लेना बंद करें तो 1.5 करोड़ बचेंगे’

PM मोदी को मिली ऐप पर सलाह, ‘आप गुलदस्ते लेना बंद करें तो 1.5 करोड़ बचेंगे’

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नई दिल्ली
‘प्रधानमंत्रीजी, आप दर्जनों लोगों से गुलदस्ते क्यों स्वीकार करते हैं? क्या आप और सभी मंत्री ऐसा करना बंद नहीं कर सकते क्योंकि केवल आपके मामले में इस पर साल में 1.5 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा होगा?’ इस तरह के सुझाव प्राइम मिनिस्टर के ऐप पर मिल रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण के लिए लोगों से सुझाव मांगे थे।

एक व्यक्ति ने पीएम से कहा है कि शहीदों के परिवारों के बैंक खाते की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि लोग उन्हें सीधे आर्थिक मदद दे सकें। एक अन्य सुझाव में कहा गया कि पीएम 15 अगस्त के भाषण में अपील करें कि लोग उस दिन पिकनिक मनाने के बजाय अपने बच्चों को आजादी के आंदोलन से जुड़ी फिल्में दिखाएं।

एक और आदमी ने कहा है कि पीएम जम्मू कश्मीर के लिए घोषित 80,000 करोड़ रुपये के पैकेज की विस्तार से जानकारी दें ताकि यह साबित किया जा सके कि बीजेपी सांप्रदायिक रूप से पक्षपाती नहीं है। एक सज्जन तो पीएम की सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं और उन्होंने कहा है कि पीएम ज्यादा मेहनत न किया करें क्योंकि टीवी पर उनका चेहरा थका हुआ दिखता है।

आशीष आनंद ने सुझाव दिया है कि 9 अगस्त को मोदी जब मध्य प्रदेश पहुंचे तो वहां लोगों ने उन्हें 10-15 गुलदस्ते दिए, जिन्हें पीएम ने एक-दो सेकेंड बाद अपने सिक्यॉरिटी स्टाफ को थमा दिया था। आनंद ने लिखा, ‘उन गुलाबों की खुशबू आप तक पहुंचती, इससे पहले ही आपके हाथों में दूसरा गुलदस्ता आ गया। आप रोज तमाम लोगों से मिलते हैं, जो स्वागत के लिए आपको गुलदस्ते देते हैं।’ आनंद ने लिखा है कि अगर पीएम साल के 300 दिनों में ही रोज 10 मीटिंग्स में 10-10 गुलदस्ते भी स्वीकार करें और हर गुलदस्ता औसतन 500 रुपये का हो तो इसकी सालाना लागत 1.5 करोड़ रुपये होगी। आनंद ने लिखा है कि गुलदस्ते कम से कम लिए जाएं और पीएम एक ‘स्वागत कोष’ शुरू करें, जिसमें वे लोग योगदान करें, जो उनसे मिलने आएं। ‘इस रकम का उपयोग विकास कार्य में हो सकता है।’

एक सीनियर अधिकारी ने ईटी से कहा कि यह आइडिया अच्छा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में काम करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने उनसे मिलने वाले प्रतिनिधिमंडलों को गुलदस्ते देना बंद कर पौधे देना शुरू किया था और मंत्रालय के अधिकारियों से कहा था कि सम्मान या स्वागत के रूप में एक छोटा फूल ही दिया करें। बताया जाता है कि फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली भी आने वालों का स्वागत गुलदस्तों से करना पसंद नहीं करते और उन्हें I&B मिनिस्ट्री की डीवीडी देना पसंद करते हैं।

courtesy: NBT

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