इस गांव के 800 लोग फौज में, जानें कैसा आया सेना में जाने का जज्‍बा

इस गांव के 800 लोग फौज में, जानें कैसा आया सेना में जाने का जज्‍बा

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आगरा. यहां से 25 Km दूर एक ऐसा गांव है, जहां के 30 परसेंट से ज्‍यादा युवक फौज में हैं। यही नहीं, गांव के 250 युवा वर्तमान में हर दिन फौज में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
जानें क्यों इस गांव के युवा चुनते हैं सिर्फ
– अटूस गांव में इस समय करीब 800 लोग सेना में नौकरी कर रहे हैं, जबकि 250 रिटायर्ड हो चुके हैं।
– आम तौर पर लोग अपने बच्‍चे के मन में डॉक्‍टर, इंजीनियर बनने की तमन्‍ना डालते हैं, लेकिन इस गांव में बचपन से ही सेना में भर्ती होने की होड़ होती है।
– फौज में भर्ती होना, इस गांव में इज्‍जत की नजरों से देखा जाता है।
– यहां बचपन से बच्‍चों को युद्ध और वीरता की कहानियां सुनाई जाती है।
– 10वीं पास होते ही युवा सुबह-शाम दौड़ लगाना शुरू कर देते हैं।
– इस साल अब तक गांव के 9 युवा फौज में भर्ती हो चुके हैं, जिनकी भर्ती इस बार नहीं हुई वो अगले साल की तैयारी में जुटे हैं।

ऐसे बना सेना में भर्ती होने का जज्बा
– सेना से रिटायर्ड हरवीर सिंह बताते हैं, गांव में सबसे पहले कर्नल प्रताप सिंह फौज में गए थे।
– वे देश की आजादी से पहले ही सेना में भर्ती हुए और इसके बाद चीन से युद्ध भी लड़ा।
– उन्होंने गांव के युवाओं को सेना में भर्ती होने की ट्रेनिंग दी।
– इसके बाद से सेना में भर्ती होने का सिलसिला सा हो गया। 3 साल पहले कर्नल प्रताप सिंह का निधन हो गया। सुबह-सुबह युवा दौड़ उन्‍हीं के नाम के साथ शुरू करते हैं।
– आमतौर पर फौजियों को शराब का शौकीन माना जाता है, लेकिन गांव में शराबबंदी है।
– यहां शराब पीने वाले की खबर देने वाले को 500 रुपए का इनाम और पीने वाले पर 500 रुपए का जुर्माना लगता है।
– यही नहीं, भरी पंचायत में आरोपी को थप्‍पड़ मारा जाता है। ऐसा इसलिए ताकि गांव का माहौल खराब न हो।

इसी गांव के शहीद का सिर काटा था पाकिस्तानियों ने
– साल 2000 में शहीद हुए दशरथ सिंह ने 7 साल फौज में नौकरी की थी। 26 साल की उम्र में शहीद हो गए।
– पाकिस्‍तानी सेना ने सिर काट दिया था और शव पर बम लगा दिया था।
– इसकी वजह से क्षत-विक्षत शव को सरहद के पास ही सेना ने अंतिम संस्‍कार किया।
– गांव के युुवा शहीद को लेकर गर्वान्वित हो उठते हैं।

Courtesy: Bhaskar.com

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