विदेश नीति में बड़ा बदलाव? US को खुश करने के लिए मोदी NAM समिट में नहीं जाएंगे

विदेश नीति में बड़ा बदलाव? US को खुश करने के लिए मोदी NAM समिट में नहीं जाएंगे

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नई दिल्ली.भारत की विदेश नीति में बड़े बदलाव की अटकलें हैं। ऐसी खबर है कि नरेंद्र मोदी वेनेजुएला में अगले महीने होने जा रही NAM (नॉन-एलाइंड मूवमेंट) समिट में हिस्सा नहीं लेंगे। बता दें कि जवाहरलाल नेहरू NAM के फाउंडर्स में से एक थे। सरकार के इस फैसले के पीछे भारत की अमेरिका से बढ़ती नजदीकियां मुख्य वजह मानी जा रही है। इस मूवमेंट को यूएस अपने खिलाफ मानता रहा है, जबकि मोदी सरकार ने अमेरिका को सबसे अहम स्ट्रैटजिक पार्टनर का दर्जा दिया है। ऐसा करने वाले भारत के दूसरे पीएम होंगे मोदी…
– एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक अगर मोदी नैम की बैठक में हिस्सा नहीं लेते हैं तो वह ऐसा करने वाले भारत के दूसरे पीएम होंगे।
– इससे पहले 1979 में कार्यवाहक पीएम चौधरी चरण सिंह ने इस समिट में हिस्सा नहीं लिया था।
– इस मूवमेंट के 55 साल के इतिहास में 1979 में हवाना में हुई मीटिंग ही एक ऐसा मौका रहा, जब भारत के पीएम ने खुद को इससे दूर रखा।
– सूत्रों के मुताबिक मोदी को समिट में हिस्सा लेने के लिए कई हफ्ते पहले इनविटेशन मिल गया था, लेकिन सरकार ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।
– अब गुरुवार को वेनेजुएला की फॉरेन मिनिस्टर डेल्सी रोड्रिगेज भारत आकर मोदी को फिर से बैठक में शामिल होने का इनविटेशन देंगी। डेल्सी के साथ वेनेजुएला के ऑयल मिनिस्टर भी होंगे।

सुषमा या अंसारी को भेजा जा सकता है

– मोदी के पीएम बनने के बाद पहली बार नैम की मीटिंग हो रही है।
– सरकार की ओर से इसमें सुषमा स्वराज या हामिद अंसारी को भेजा सकता है।
– माना जा रहा है कि मोदी के नहीं जाने से नैम में उनकी कमी तो महसूस होगी ही, भारत की फॉरेन पॉलिसी पर करीब से नजर रखने वालों को इसकी स्क्रूटनी का मौका भी मिलेगा।

वाजपेयी ने 2 बार लिया था हिस्सा

– मोदी का इस समिट में नहीं जाना इसलिए भी भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि पहले की एनडीए सरकार में पीएम रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने 2 बार इसमें हिस्सा लिया था।
– वाजपेयी ने 1998 में डरबन और 2003 में कुआलालम्पुर में हुई दोनों नैम समिट में भागीदारी की थी।
17-18 सितंबर को मार्गरिटा आईलैंड पर होगी समिट

– वेनेजुएला के मार्गरिटा आईलैंड पर 17-18 सितंबर को होने जा रही यह 17th नैम समिट होगी।
– दरअसल, यह समिट पिछले साल ही होनी थी, लेकिन वेनेजुएला में इकोनॉमिक क्राइसिस की वजह से इसमें देरी हो गई।
– वेनेजुएला के भारत में एंबेसेडर अगस्तो मॉनटिएल ने कहा- “नई दिल्ली ने यह संकेत दिया था कि भारत की ओर से इस समिट में हाई लेवेल पार्टिसिपेशन होगा।”
– उन्होंने कहा- “मल्टीलैटरल इश्यूज पर भारत और वेनेजुएला के एक जैसे विचार हैं। हमें भरोसा है कि नैम समिट काफी सफल रहेगी।”
1961 में हुई थी NAM की शुरुआत

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– 1961 में बेलग्रेड में इस मूवमेंट की शुरुआत हुई थी।
– दुनिया की 2 बड़ी ताकतों अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के ग्रुप में शामिल न होने वाले देशों को इकट्ठा करना इसका मकसद था।
– सोवियत संघ के टूटने के बाद से इस ग्रुप का भी महत्व कम हो गया।

वेनेजुएला पर अमेरिका ने लगा रखा है प्रतिबंध

– वेनेजुएला के अमेरिका के साथ रिश्ते ठीक नहीं हैं। यूएस इस देश को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
– प्रेसिडेंट बराक ओबामा ने ह्यूमन राइट्स वॉयलेशन के आरोप में वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों को पिछले महीने ही बढ़ाया था।

Courtesy: Bhaskar.com

 

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