यमुना किनारे श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम से जो नुकसान हुआ उसकी शायद ही कभी भरपाई हो : समिति

यमुना किनारे श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम से जो नुकसान हुआ उसकी शायद ही कभी भरपाई हो : समिति

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श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग ने कुछ समय पहले दिल्ली में जो आयोजन किया था उसकी वजह से यमुना के बहाव वाला संबंधित इलाका पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित विशेषज्ञों की एक समिति ने यह बात कही है. समिति ने 28 जुलाई को अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विश्व संस्कृति समारोह नाम के इस कार्यक्रम से इस इलाके की जैवविविधता को जो नुकसान पहुंचा है उसकी शायद ही कभी भरपाई हो सके.

श्री श्री रविशंकर का यह कार्यक्रम काफी विवादों में रहा. एनजीटी ने पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान के लिए उनकी संस्था आर्ट ऑफ लिविंग पर पांच करोड़ रु का जुर्माना भी लगाया था. श्री श्री रविशंकर का कहना था कि उन्होंने पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है और वे इस मामले में न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.

सात सदस्यों वाली इस समिति के अध्यक्ष जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर हैं. इसका कहना है कि आयोजन के लिए यमुना के बहाव वाले इस इलाके को मशीनों से समतल कर दिया गया. समिति के मुताबिक इससे छोटी-छोटी ताल-तलैयाएं और कई वनस्पतियां खत्म हो गईं. पक्षियों, कछुओं, मेंढ़कों जैसे कितने ही जीवों के निवास उजड़ गए. कुल मिलाकर जैवविविधता को व्यापक नुकसान हुआ.

समिति ने यह भी कहा है कि जब इसके सदस्य संबंधित इलाके का अध्ययन करने गए तो वहां मौजूद आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यकर्ताओं ने जबरन उन्हें रोका जिसके चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा. यह 15 अप्रैल और छह जून की बात है. समिति के मुताबिक सेटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों से भी उसके निष्कर्षों की पुष्टि होती है.

उधर, आर्ट ऑफ लिविंग ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा है कि उसने समिति के पुनर्गठन की मांग की है और एनजीटी को अभी इस पर सुनवाई करनी है. उसके मुताबिक जब तक एनजीटी इस पर कोई फैसला नहीं देता तब तक समिति की रिपोर्ट पर विचार करना ठीक नहीं है. एनजीटी को इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को करनी है.

Courtesy: satyagrah

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