केजरीवाल के बाद, अब मोदी भी फ्लैगशिप स्कीमों पर ऐड खर्च बढ़ाएंगे

केजरीवाल के बाद, अब मोदी भी फ्लैगशिप स्कीमों पर ऐड खर्च बढ़ाएंगे

 

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नई दिल्ली
तीसरे साल में प्रवेश करने के साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार अपनी फ्लैगशिप स्कीमों के ऐड खर्च में बढ़ोतरी की तैयारी में है। मामले से वाकिफ दो लोगों ने बताया कि सरकार ऐड खर्च में जबरदस्त बढ़ोतरी कर सकती है। हालांकि, उन्होंने फाइनैंशल इयर 2016-17 में ऐड खर्च में ठीक-ठीक बढ़ोतरी के बारे में खुलासा नहीं किया।

मामले से वाकिफ एक शख्स ने बताया, ‘आधा कार्यकाल पूरा करने के बाद सरकार कम्यूनिकेशन और ऐड पर फोकस बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार टेलिविजन, प्रिंट और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े ऐड कैंपेन पर पिछले दो सालों के मुकाबले ज्यादा खर्च करेगी।’

सरकार ने डीएवीपी के तहत कई मीडिया माध्यमों के जरिये 2015-16 में वेलफेयर स्कीमों से जुड़े विज्ञापनों पर 1,190.53 करोड़ रुपये खर्च किए। डीएवीपी मंत्रालयों, विभागों और पब्लिक सेक्टर यूनिट्स के बदले विज्ञापन देने वाली सरकार की नोडल एजेंसी है। यह इससे पिछले फाइनैंशल इयर के मुकाबले 191.66 करोड़ यानी तकरीबन 20 फीसदी ज्यादा है। फाइनैंशल इयर 2015 में डीएवीपी के जरिये इन स्कीमों पर ऐड खर्च 998.36 करोड़ रुपये था।

ऐड में जिन स्कीमों पर अधिकतम फोकस किया जाएगा, उनमें स्वच्छ भारत, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, मेक इन इंडिया, नैशनल हेल्थ मिशन और स्किल इंडिया शामिल हैं। सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार इन स्कीमों को बेहद आक्रामता से आगे बढ़ा रही है और इस पर फोकस लगातार बढ़ता जा रहा है।

इस साल सिर्फ टॉप 7 फ्लैगशिप स्कीमों पर ऐड खर्च तकरीबन 350 करोड़ रुपये रहा। इनमें स्वच्छ भारत, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, इंद्रधनुष, मुद्रा, पीएम फसल बीमा योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी स्कीमें शामिल हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पिछले साल यानी 2014-15 के मुकाबले इसमें 94 करोड़ की बढ़ोतरी रही । इस दौरान इन स्कीमों पर खर्च तकरीबन 256 करोड़ रुपये रहा था।

बीएआरसी इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 5 अगस्त 2016 के दौरान भारत सरकार ने जिन 5 कल्याणकारी योजनाओं के लिए टेलिविजन पर अधिकतम विज्ञापन दिया, उनमें स्वच्छ भारत अभियान, नैशनल हेल्थ मिशन, स्किल इंडिया, नेशनल रूरल हेल्थ मिशन और पेय जल और स्वच्छता मंत्रालय शामिल हैं। सरकार ने टीवी पर जिन अन्य कैंपेन का जमकर विज्ञापन किया, उनमें फ्यूल बचाओ पीसीआरए, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और तंबाकू विरोधी अभियान शामिल हैं।

ऊपर कोट किए गए एक शख्स ने बताया कि मीडिया के अलग-अलग माध्यमों के जरिये इन स्कीमों के प्रचार-प्रसार का मकसद जरूरतमंद लाभार्थियों तक सूचनाओं को पहुंचाना है, ताकि वे इन स्कीमों और इसके अमल के बारे में जान सकें।

Courtesy: NBT

 

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