अनुपूरक बजट आ गया पर मुख्य बजट का एक तिहाई भी नहीं हो पाया खर्च

अनुपूरक बजट आ गया पर मुख्य बजट का एक तिहाई भी नहीं हो पाया खर्च

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को वर्ष 2016-17 का 25000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पहला अनुपूरक बजट पेश करने जा रहे हैं तो यह सवाल बेहद संजीदा हो गया है कि कई विभाग मौजूदा वित्तीय सत्र के लिए पारित अपने बजट का 10 फीसदी तक भी खर्च नहीं कर पाए हैं।

ऐसे में विकास कार्यों को समय से पूरा करने को लेकर नई पहल करने वाली सपा सरकार के बजट प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तमाम वित्तीय नियंत्रक साढ़े चार साल बीतने के बावजूद इस मोर्चे पर फेल नजर आ रहे हैं।

वित्त वर्ष 2016-17 के पांच महीने बीतने वाले हैं, लेकिन बजट में सैकड़ों करोड़ की योजनाएं लेने वाले कई महकमे एक तिहाई रकम भी खर्च नहीं कर पाए हैं।

अखिलेश सरकार ने सत्ता संभालने के बाद बजट खर्च करने को लेकर कई अहम कदम उठाए थे। मसलन, साल भर के काम के लिए विकास का एजेंडा बनाया जिससे विभागों को वित्त वर्ष शुरू होने के पहले ही पता चल जाए कि सरकार की प्राथमिकताएं हैं और वह क्या करने वाली है?

मुख्य सचिव स्तर पर हुई मॉनिटरिंग की व्यवस्‍था

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विभाग इसके लिए कार्ययोजना बना सकें, मुख्य बजट में ही पैसे का बंदोबस्त करा सकें। इसके अलवा मुख्य सचिव के स्तर पर विकास एजेंडे पर अमल की मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी हुई।

सरकार ने योजनाओं की जल्दी मंजूरी के लिए विभागीय मंत्रियों और विभागीय प्रमुख सचिवों व सचिवों को पहले से अधिक रकम की योजनाओं की प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृतियां वित्त व नियोजन महकमे की अनुमति लिए बिना ही जारी करने की छूट दी।

पर, हाल ये है कि सरकार के  चुनिंदा ड्रीम प्रोजेक्ट को छोड़ दीजिए तो बड़ा-बड़ा बजट लेने वाले महकमे समय से रकम खर्च करने को लेकर अब भी उदासीन बने हुए हैं।

खास बात ये है कि यह स्थिति चुनाव वर्ष में भी बनी हुई है जिसमें सरकार के पास पैसा होने के बावजूद खर्च करने के लिए बहुत कम समय होगा। गौर करने वाली बात ये भी है कि मंगलवार को पेश किए जाने वाले अनुपूरक बजट में मोटी रकम दबाकर बैठे महकमों को और पैसा देने की तैयारी है।

इन विभागों के नाम बड़े और दर्शन छोटे

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बड़े महकमों में कृषि, न्याय, मुस्लिम वक्फ, माध्यमिक शिक्षा, आवास, परिवार कल्याण, उद्योग, ऊर्जा, गन्ना विकास जैसे महकमे मूल बजट का 20 फीसदी भी खर्च नहीं कर पाए हैं। कृषि महकमे के लिए आम बजट में 2672 करोड़ की मंजूरी दी गई थी।

विभाग ने जुलाई तक इसमें से 442 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए, लेकिन 158 करोड़ रुपये का ही काम हो सका है। यह कुल बजट का 5.9 फीसदी है। इसी तरह आवास महकमे को 2171.50 करोड़ रुपये के बजट में से 696 करोड़ रुपये जारी हो गए, पर काम 324 करोड़ का ही हुआ। यह कुल बजट का 14.96 फीसदी है।

सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को विरोधी दल मुद्दा बनाए हुए हैं। मगर, चिकित्सा स्वास्थ्य महकमें ने कुल बजट का 18.45 फीसदी, परिवार कल्याण का 10.5 फीसदी और एलोपैथिक चिकित्सा में मात्र 8.09 फीसदी ही खर्च किया है। मुख्यमंत्री अक्तूबर से सूबे को 24 घंटे बिजली देने का एलान कर चुके हैं।

इस काम में कोई अड़चन न आए इसके लिए अनुपूरक बजट में भी 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम और मिल सकती है। पर, ऊर्जा विभाग को मुख्य बजट में मिले पैसे के खर्च का हाल देखिए। महकमे को 7596 करोड़ रुपये दिए गए थे। जुलाई तक विभाग ने करीब 1749 करोड़ रुपये जारी किए गए जिसमें 1285 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं जो कुल बजट के 17 फीसदी से भी कम है।

इन विभागों की परफॉर्मेंस ठीक

akhilesh-yadav_1466701938हालांकि, इस बीच बेहतर खर्च करने वाले कई महकमे भी सामने आए हैं। इनमें वित्त महकमा अव्वल रहा है। वित्त विभाग को ऋण सेवा व अन्य खर्च के मद में 2510 करोड़ रुपये मिले थे।

महकमा अब तक 2500 करोड़ रुपये जारी कर 99.60 फीसदी रकम खर्च कर चुका है। इसके बाद सहकारिता महकमे का नंबर है जिसने अब तक 78.75 फीसदी रकम खर्च कर दी है।

खेल, खादी एवं ग्रामोद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भारी उद्योग व पंचायतीराज जैसे महकमे भी समय से रकम खर्च करने वालों में शामिल हैं।

जनता की नजरों से दूर रखे जाते हैं कई विभागों के खर्च के ब्योरे

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केंद्र व प्रदेश सरकारें जब पंचायतों से उम्मीद करती हैं कि वे पाई-पाई के खर्च का ब्योरा सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराएं, सरकार के हजारों करोड़ रुपये हर साल खर्च करने वाले छह महकमों के खर्च का हिसाब-किताब पब्लिक डोमेन में अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।

लोक निर्माण, सिंचाई, वन, ग्रामीण अभियंत्रण, लघु सिंचाई व भूगर्भ जल विभाग तथा खाद्य रसद जैसे महकमों में खर्च की कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) प्रणाली लागू है। यहां कोषागार के जरिए ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था नहीं है।

नतीजतन आम लोगों को यह पता ही हो नहीं हो सकता कि बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करने वाले इन महकमों ने कब तक कितना काम किया और कितना पैसा खर्च हुआ। हालांकि वित्त महकमे के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि सरकार ने इन विभागों को भी कोषागार की ई-पेमेंट प्रणाली से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। फैजाबाद में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। आने वाले दिनों में इन महकमों के खर्च पर भी अन्य विभागों की तरह निगरानी की जा सकेगी।

100 करोड़ से ज्यादा बजट वाले विभागों के खर्च का हिसाब

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विभाग–आम बजट का खर्च (प्रतिशत में)
संस्थागत वित्त–1.07
एससीईआरटी–2.43
नि:शक्त एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण–2.69
परिवहन–3.46
कृषि–5.91

न्याय–6.14
प्राविधिक शिक्षा–6.37
माध्यमिक शिक्षा–6.44
मुस्लिम वक्फ–7.93

एलोपैथिक चिकित्सा–8.09
औद्यानिक एवं रेशम–8.18
उच्च शिक्षा–10.34
परिवार कल्याण–10.54
दुग्धशाला–10.99

प्राथमिक शिक्षा–11.62
लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन–11.75
भूमि विकास एवं जल संसाधन–11.81
राज्य संपत्ति–13.52
पर्यटन–14.66
आवास–14.96
ऊर्जा–16.93

ये रहा इन विभागों के बजट खर्च का ब्यौरा

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सार्वजनिक स्वास्थ्य–18.54
महिला एवं बाल कल्याण–21.98
व्यावसायिक शिक्षा–21.46
नगर विकास–22.10

अनुसूचित जातियों का कल्याण    –22.89
राजस्व–23.77
जनजाति कल्याण–24.09
ग्राम्य विकास–24.28
चिकित्सा शिक्षा–25.45
मनोरंजन कर–28.70

कुल बजट का 30 फीसदी से अधिक खर्च करने वाले महकमे
विभाग–आम बजट का खर्च (प्रतिशत में)
वित्त ऋण सेवा–99.60
सहकारिता–78.75
मुद्रण तथा लेखन सामग्री–50.00

खेल–47.45
खादी ग्रामोद्योग–33.46
भारी एवं मध्यम उद्योग–31.51
नियोजन–32.73
पंचायतीराज–30.36

Courtesy: Amarujala

Categories: Politics, Regional

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