RSS के नए ‘गणवेश’ का पहला लुक सामने आया, फुलपैंट में ‘स्वयं सेवक’

RSS के नए ‘गणवेश’ का पहला लुक सामने आया, फुलपैंट में ‘स्वयं सेवक’

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नई दिल्ली/नागपुर : राष्ट्रीय स्वयं सेवस संघ (आरएसएस) की नई ड्रेस सामने आ गई है. एबीपी न्यूज ने पहली बार कैमरे पर आरएसएस की नई ड्रेस को दिखाया है. संघ ने अपने इस नए यूनिफॉर्म (गणवेश) की बिक्री शुरू कर दी है. अब संघ की ड्रेस में हाफपैंट नहीं होगी.

नागपुर में डॉक्टर हेडगेवार स्मृति मंदिर से संघ के यूनिफॉर्म की बिक्री की शुरूवात हो गयी है. यहां कई स्वयंसेवक नया गणवेश लेने आये हैं. संघ चाहता है कि सारे स्वयंसेवक आनेवाले दशहरे के मौके पर पहली बार यह गणवेश धारण करें. संघ के कई युवा स्वयंसेवक ये बदलाव चाहते थे.

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इसके पहले भी संघ ने निक्कर को बदलने के बारे में सोचा था. विरोधियों ने भी कई बार पुराने फैशन के निक्कर पर चुटकुलों के जरिए निशाना साधा था. संघ का पहने मानना था कि विषम परिस्थियों में सेवा कार्य करने के दौरान हाफपैंट काफी सहायक होती है.

संघ की स्थापना सन 1925 में हुई थी. उसके बाद कई बार संघ का गणवेश बदला है. शुरूआत में तो ये यूनिफॉर्म जिस तरह के कपड़े कांग्रेसी पहनते थे, वैसा ही रखा गया था. तब पूरा यूनिफॉर्म खाकी था और काले बूट, खाकी फेटा और बाद में फेटे की जगह टोपी ने ले ली. तब यूनिफॉर्म में और दो चीज़े थी जो आज नहीं है.

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एक था क्रॉस बेल्ट. पता चलता है की अधिकारी वर्ग के स्वयंसेवक ही क्रॉस बेल्ट पहना करते थे. और दुसरा था आरएसएस लिखा हुआ बैज. करीब साल 1939 तक शर्ट खाकी ही हुआ करती थी. साल 1940 में सफ़ेद शर्ट आई. क्रॉस बेल्ट चला गया. फिर करीब साल 1073 में फटीग जूते बदले.

उनकी जगह ली सादे काले बूटो ने. बाद में कुछ मसला उठा लेदर के बेल्ट को लेकर. क्या लेदर को बदला जाय ? इसकी चर्चा भी करीब तीन साल चली और फिर बस दो तीन साल पहले ही लेदर बेल्ट हो गया सिंथेटिक बेल्ट. पिछले एक साल में 6000 के करीब शाखा बढ़ी है. ऐसे में कई युवा जुड़ते नज़र आ रहे है.

Courtesy: ABPNews

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