महिला विरोधी हैं संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान – भाजपा उतरी बचाव में

महिला विरोधी हैं संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान – भाजपा उतरी बचाव में

निशांत

 

इस सप्ताह मोहन भागवत का विवादित बयान सामने आया हैं जिसमें संघ प्रमुख ने हिन्दुओं को ज्यादा बच्चे पैदा कर हिन्दु जनसंख्या बढ़ाने की बात कहीं हैं. बढ़ती मुस्लिम जनसंख्या पर चिंता जताते हुऐ भागवत ने ये बयान दिया है। इसके बाद संघ और उसके प्रमुख को काफी कड़ी आलोचना का भी सामना करना पड़ा।
इस बयान को ओर करीब से देखने जाने की जरूरत है। ये बयान समाज में हिन्दु-मुस्लिम एकता को तो नुक्सान पहुॅचाता ही है, पर साथ ही साथ ये महिलाओं के अधिकार को बहुत नुकसान पहुॅचाता है। ये सोच औरत को एक वस्तु की तरह दिखाती है जिसका इस्तेमाल कर मोहन भागवत अपना हिन्दूत्व का कार्य पुरा करना चाहते है। वैज्ञानिक अध्यन्न की माने तो एक बच्चे को पैदा करने में एक औरत को 20 हड्डियां तोड़ने जितना दर्द हो सकता है, पर लगता है सरसघंचालक अपने मतलब को हासिल करने के लिए इस दर्द को पहचान नहीं सके. एक संस्था जिसमें औरतों की आवाज है ही नहीं, जिसमें औरतों को इस काबिल नहीं समझा जाता की वो उस संस्था का भाग बने, उस संस्था के प्रमुख से ऐसा बयान आना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है। यहीं नहीं काफी धर्मगुरू ओर राजनीतिक हस्तियां पहले भी महिलाओं की समझ ओर निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाते आऐ हैं, चाहें वो लव ज़िहाद का मुद्दा हो या चाहे घर वापसी का मुद्दा।
जिस तरह का राष्ट्रीयवाद ओर हिन्दुत्व की बात मोहन भागवत करते है ये पुरूषार्थ से सम्मिलित राष्ट्रीयवाद हिटलर की याद दिलाता है। ये औरतों की आवाज़ को दबाता हुआ ओर उसको वस्तु की तरह इस्तेमाल करता हुआ मिश्रित राष्ट्रीयवाद देश को आगे बढ़ने से रोकता है। यही बात गम्भीर इसलिए भी हो जाती है क्योंकि भाजपा ने इस बात का खंडन करने की जगह इस बात का समर्थन कर दिया है। उनके सांसद योगी आदित्यनाथ ने लोंगो के बीच आकर मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया। इस पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरिवाल ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की पहले मोहन भागवत खुद दस बच्चें पैदा करे, फिर लोंगो को भडकाए। ये बात भी सोचने योग्य है जो संस्था जिसमें प्रचार होने के लिए शादी करने की पाबन्दी है, वो संस्था का प्रमुख ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए उकसा रहे है।

(इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.)

 

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