प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार गुजरात गए मोदी, एक बार भी नहीं की गुजरात मॉडल की बात, जानिये क्यों कि सौराष्ट्र में रैली

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार गुजरात गए मोदी, एक बार भी नहीं की गुजरात मॉडल की बात, जानिये क्यों कि सौराष्ट्र में रैली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के सौराष्‍ट्र क्षेत्र में सौनी परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के जरिए हर तीन साल में सूखे की मार झेलने वाले सौराष्‍ट्र को सरदार पटेल बांध से पानी मिलेगा। योजना के अनुसार नर्मदा नदी का पानी पहले चरण में 10 और फिर 115 छोटे बड़े बांधों में लाया जाएगा। इस पर करीब 12 हजार करोड़ रुपये और खर्च होंगे और पांच हजार गांवों को लाभ मिलेगा। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया जो कि पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी की गुजरात में यह पहली जनसभा है। यह उद्घाटन और जनसभा राजनीतिक रूप से काफी अहम है। सौराष्‍ट्र वही जगह है जहां भाजपा के लिए इन दिनों सबसे ज्‍यादा मुश्किलें खड़ी हो रही है। यह क्षेत्र पटेल समुदाय का गढ़ है। आरक्षण की मांग को लेकर पटेल समुदाय बीजेपी से नाराज बताया है।

गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। मोदी को राजनीतिक ऊंचाई गुजरात से ही मिली थी। ऐसे में अगर अगले साल होने वाले चुनावों में गुजरात में भाजपा पीछे रह जाती है तो यह उनके लिए सबसे बड़ा झटका होगा। मोदी नहीं चाहेंगे अपने ही गढ़ में उन्‍हें शिकस्‍त मिले। पटेल आंदोलन और ऊना में दलितों की पिटाई मामले से भाजपा की छवि को काफी नुकसान हुआ है। पटेलों को फिर से अपने पाले में लाने के लिए भाजपा सौराष्‍ट्र क्षेत्र को काफी प्रतिनिधित्‍व दे रही है। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और गुजरात भाजपा अध्‍यक्ष जीतू वाघानी दोनों सौराष्‍ट्र से आते हैं। हालांकि रुपाणी जैन समुदाय से हैं और उन्‍हें आनंदीबेन पटेल की जगह सीएम बनाया गया। आनंदीबेन पटेल समुदाय से आती थी। रुपाणी के सीएम बनाए जाने से नाराज पटेलों को साधने के लिए नितिन पटेल को डिप्‍टी सीएम बना दिया गया। साथ ही वाघानी भी पटेल समुदाय से हैं।

दलितों के साथ मारपीट की घटना भी सौराष्‍ट्र क्षेत्र में ही हुई। पिछले साल हुए तालुका और पंचायत चुनावों में कांग्रेस ने इस क्षेत्र में जीत दर्ज की थी। उसने राजकोट, सुरेंद्रनगर, अमरेली और मोरबी में पंचायत चुनावों में जीत दर्ज की थी। हालांकि शहरी निकायों में भाजपा ने अपना दबदबा बनाए रखा था। लेकिन कांग्रेस ने कई दशक बाद भाजपा को चुनौती दी थी। ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस के लिए अच्‍छी खबर थी। डेढ़ दशक से गुजरात में सत्‍ता में बैठी भाजपा के लिए यह खतरे की घंटी थी। आनंदीबेन की विदाई में भी यह नतीजे बड़ा कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि इसी अवधि में गिर सोमनाथ जिले की तलाला विधानसभा सीट भाजपा ने उपचुनाव में लंबे समय बाद जीती थी।

भाजपा के लिए चिंता के विषय ग्रामीण क्षेत्र हैं। यहां पर देखा जा रहा है कि भाजपा अपना वोट बैंक खो रही है। गुजरात में 57 प्रतिशत जनसंख्‍या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। भाजपा का गढ़ शहरी क्षेत्र रहा है जहां वर्तमान में उसके 54 फीसदी एमएलए आते हैं। वहीं कांग्रेस के 74 प्रतिशत एमएलए ग्रामीण क्षेत्र से हैं। गुजरात में 112 विधानसभा सीट ग्रामीण और 72 शहरी हैं। निकाय चुनाव कांग्रेस को बढ़त देते हैं। गुजरात की सारी जिम्‍मेदारी पीएम मोदी ने अमित शाह के कंधों पर डाल दी। विजय रुपाणी और जीतू वाघाणी भाजपा अध्‍यक्ष के चुने हुए व्‍यक्ति हैं।

Courtesy: Jansatta 

Categories: Politics
Tags: Gujarat, Modi, Rally

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