सिद्धू बनाएंगे खुद की ‘आप’, पंजाब में बनेंगे 3 समीकरण

चंडीगढ़/लुधियाना/अमृतसर. करीब डेढ़ महीने तक राजनीतिक मोलभाव के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब की राजनीतिक पिच पर एक नया स्ट्रोक मारा है। राज्यसभा छोड़ने के बाद भी आम आदमी पार्टी से अपनी शर्तें मनवाने में नाकाम रहे सिद्धू अब अलग राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। नाम होगा आवाज-ए-पंजाब यानी ‘आप’। हालांकि नई पार्टी को लेकर सिद्धू की तरफ से अब तक कोई बयान नहीं आया है। लेकिन उनकी विधायक पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने बताया कि विदेश से लौटकर सिद्धू 8 सितंबर को इसका एलान करेंगे। क्या हैंआवाज-ए-पंजाब के मायने और कितना होगा असर…
असर: आप को नुकसान, अकाली-बीजेपी फायदे में
– मौजूदा घटनाक्रम से आप को नुकसान और अकाली दल-बीजेपी को फायदा होगा। अभी लोगों के सामने कांग्रेस और आप का विकल्प था।
– अब सुच्चा सिंह छोटेपुर और सिद्धू के कारण सरकार विरोधी वोट बंटेंगे। नए फ्रंट चुनाव जीतें या हारें, दूसरों की जीत-हार पर जरूर असर डालेंगे।
– सिद्धू, परगट सिंह और बैंस ब्रदर्स के नाम पर यूथ नए मोर्चे से जुड़ सकते हैं।
मायने: कहीं कोई रास्ता नहीं दिखा, तो बनाई पार्टी
– सिद्धू, परगट और बैंस ब्रदर्स तीनों ने आप में जाने की कोशिश की। सिद्धू का तय था पर पद को लेकर बात अटक गई।
– पिछले साल बैंस ब्रदर्स भी केजरीवाल से मिले थे। परगट ने भी कोशिश की थी।
– हाल के दिनों में आप में जिस तरह बिखराव आया है इसको देखते हुए भी चौथा फ्रंट ही विकल्प दिखा।
सिद्धू की सियासत के 3 समीकरण
1# सिद्धू को फायदा
सिद्धू लगातार आप से टच में थे। ऐसा माहौल था कि वो आप के सीएम उम्मीदवार हो सकते हैं। लेकिन पार्टी का मानना था कि उसके हजारों कार्यकर्ताओं को बाहर से आए किसी नेता का सीएम बनना मंजूर नहीं है। ऐसे में बातचीत फेल हो गई। सिद्धू बीजेपी से तो नाराज थे ही, बादलों के भी विरोधी रहे हैं। कांग्रेस को कोसते ही रहे हैं। ऐसे में एक अलग फ्रंट बनाना शायद उनको बेहतर स्ट्रैटजी लगी हो।
2# सिद्धू अौर केजरी, दोनों का फायदा
सिद्धू और केजरीवाल दोनों ही चतुर खिलाड़ी हैं। हो सकता है कि पहले समीकरण की मजबूरियों को देखते हुए उन्होंने एक अंडरस्टैंडिंग कर ली हो। इसके तहत आप अपने बल पर लड़ेगी ही, सिद्धू भी अपने बल पर लड़ सकते हैं। सिद्धू की खुद की अपनी पहचान है ही और जैसे ही कुछ लोगों के नाम सामने आएंगे तो वो सभी 117 विधानसभा सीटों पर ना सही, काफी सारी सीटों पर कैंडिडेट तो खड़े कर ही सकते हैं। इसके बाद चुनाव नतीजे जो भी आएं सिद्धू और केजरीवाल उस समय एक साथ हो सकते हैं।
3# अपनी पसंद का सीएम
सिद्धू का खुद का ऐसा सोचना हो कि आप उनकी शर्तें नहीं मान रही और उनको लेकर हल्ला तो मच ही चुका है। तो वो क्यों ना खुद अपना ही एक फ्रंट खड़ा कर दें। दूसरे समीकरण जैसी स्थिति आते ही वो अपने ऑप्शन खुले रखेंगे। भले ही वे सीधे सीएम की कुर्सी तक ना भी पहुंचें, तो भी सीएम बनेगा उन्हीं की मर्जी से, ऐसा बंदोबस्त तो कर ही सकते हैं।
क्या यह सुसाइडल स्टेप है?
– एक चर्चा यह भी है कि क्या यह सिद्धू का सुसाइडल स्टेप है? हालांकि एक बड़ा तबका इस कदम को सीरियसली नहीं ले रहा है।
– बड़ी दिक्कत यह है कि इनके फ्रंट के पास सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़वाने वालों की फौज कहां से आएगी?
– आप का सबसे मजबूत स्तंभ यूथ अब तक पार्टी के साथ ही था। पर सिद्धू का फ्रंट बनने की बात जैसे ही आई, वैसे ही यूथ के कुछ हद तक इनके साथ भी जाने की बातें होने लगी है।
– आप ने अभी तक जिन 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं, उनमें ज्यादातर या तो दूसरी पार्टियों से आए हुए हैं या फिर पैसे वाले लोग हैं। दो-चार को छोड़कर कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं दिए गए हैं। ये निराश कार्यकर्ता अगर सिद्धू के फ्रंट में जाते हैं तो इसका सीधा नुकसान आप को होगा।
– इससे यह तस्वीर बनती है कि आवाज-ए-पंजाब आप के विकल्प के तौर पर सामने आएगी।
सिद्धू के फ्रंट में ये 3 नेता
– सिद्धू के फ्रंट में लुधियाना के निर्दलीय विधायक सिमरजीत सिंह बैंस और बलविंदर बैंस भी हैं। परगट ने कहा है- “पंजाब में नया मोर्चा बनाएंगे। घोषणा 3-4 दिन में करेंगे।”
– सिमरजीत बैंस ने मोर्चे की पुष्टि करते हुए बताया है कि बुधवार को परगट और बलविंदर ने दिल्ली में सिद्धू के घर बैठक की थी।
– इससे पहले, राज्यसभा से 18 जुलाई को इस्तीफे के बाद अटकलें थीं कि सिद्धू 15 अगस्त को आप में शामिल हो जाएंगे। 12 अगस्त को वह केजरीवाल से मिले भी थे।
– सोर्सेज के मुताबिक सिद्धू पंजाब में आप की तरफ से सीएम कैंडिडेट बनना चाहते थे। लेकिन डेढ़ महीने तक मोलभाव के बाद भी बात नहीं बन सकी।

पंजाब की कितनी सीटों पर पड़ सकता है असर?

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– सिद्धू पटियाला के रहने वाले हैं, अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। यहां से 10 साल सांसद रहे हैं।
– परगट सिंह जालंधर ईस्ट से विधायक हैं। अकाली दल से सस्पेंड हो चुके हैं।

– सिमरजीत सिंह बैंस लुधियाना की आत्म नगर सीट और बलविंदर सिंह बैंस लुधियाना साउथ से निर्दलीय विधायक हैं।
– इन चारों जिलों में 41 विधानसभा सीटें हैं, जिन पर ‘आवाज-ए-पंजाब’ फ्रंट असर डाल सकता है।

किस जिले में कितनी विधानसभा सीटें?
जिला – विधानसभा सीटें
अमृतसर – 10
पटियाला – 8
जालंधर – 9
लुधियाना – 14

छोटेपुर जा सकते हैं सिद्धू के साथ, बोले– वॉलंटियरों से बात के बाद लूंगा फैसला

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– आवाज-ए-पंजाब में शामिल होने के सवाल पर आप के कन्वीनर पद से हटाए गए सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कहा है कि सबसे पहले अपने वॉलंटियरों से बात करेंगे। 22 जिलों के वालंटियरों से बातचीत के बाद ही फैसला लेंगे।
– सूत्रों का कहना है कि फिलहाल छोटेपुर और उनके समर्थकों के फ्रंट में जाने की संभावना कम है। छोटेपुर को आप के 6 जोनल इंचार्जों का समर्थन हासिल है।
– बता दें कि आप पंजाब में शुक्रवार को बकायदा दोफाड़ हो गई। पार्टी से अलग हुए 6 जनोल इंचार्ज के ग्रुप ने अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में काम नहीं करने का फैसला लिया है।

 

Courtesy: Bhaskar.com
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