किसान ज़रुरत के लिए खाट ले गये, मीडिया और विपक्षियों ने उन्हें ‘खाट चोर’ बता दिया

किसान ज़रुरत के लिए खाट ले गये, मीडिया और विपक्षियों ने उन्हें ‘खाट चोर’ बता दिया

आम तौर पर देखा जाता है कि रैलियों के बाद लोग खाली हाथ लौटते है लेकिन कल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के चुनावी खाट सभा के बाद नजारा बिलकुल अलग हटकर था. राहुल गाँधी की सभा के बाद खाट ले जा रहे लोगों ने शायद कांग्रेस के 27 साल यूपी बेहाल के नारे को सही साबित कर दिया. कल देवरिया में जब राहुल गाँधी की सभा के बाद लोग खाट उठा कर वापस जा रहे थे तो मीडिया ने बेहाल किसानों को चोर घोषित कर दिया. काश अंग्रेजी और कॉर्पोरेट परस्त मीडिया को ये पता होता कि ग्रामीण दिनचर्या और संस्कृति में खाट का अपना अलग महत्व है. एक किसान खाट लेकर जाने के बारे में बोला कि 2 साल पहले रैलियों में जुमला लेकर आये यहाँ कम से कम बैठने को और घर ले जाने को खटिया तो मिली. सबसे बड़ी बात है कि कॉर्पोरेट परस्त मीडिया ने एक सोचे समझे षड्यंत्र के तहत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी की कर्जा माफ़, बिजली बिल हाफ और समर्थन मूल्य के हिसाब की बात को दबा दिया. फ्री मोबाइल और फ्री डाटा की भीड़ में जब कल उत्तर प्रदेश की जनता ने अपनी बेहाली खाट के माध्यम से देश को दिखाई तो बड़े हुक्मरान के उस डिजिटल इंडिया की हवा निकल गयी कि उत्तर प्रदेश की जनता अभी भी अपनी बुनियादी ज़रुरत के लिए संघर्ष कर रही है.

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