समाजवाद से परिवारवाद: आजम के पुत्र अब्दुल्ला उतर सकते हैं चुनाव मैदान में

समाजवाद से परिवारवाद: आजम के पुत्र अब्दुल्ला उतर सकते हैं चुनाव मैदान में

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दल में ‘परिवार को स्थापित करना शुरू किया, तब उनके हमकदम छोटे लोहिया यानी जनेश्वर मिश्र ने इसके मर्म को परखकर एक सिद्धांत गढ़ा और इस परिपाटी को नाम दिया ‘संघर्ष का परिवारवाद। फिर मंत्री, विधायक, ओहदेदार अपने परिवारों को स्थापित करने लगे। ताजा कड़ी आजम खां ने यह कहकर जोड़ी कि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को राजनीति में जाने की इजाजत है मगर उनका टिकट मुलायम सिंह घोषित करेंगे।

सपा विधायकों, मंत्रियों ने अपने परिवार के सदस्यों को दल में स्थापित करने का सिलसिला तो काफी पहले से शुरू कर रखा है, मगर अब सिद्धांतों की सियासत का दावा करने वाले आजम खां भी सूची में शामिल हो गए हैं। शुरुआत उनकी पत्नी को राज्यसभा भेजने के साथ हुई थी मगर अब वह खुद बेटे अब्दुल्ला को उसी जहाज पर बैठाने की जुगत में लग गए हैं जिसे वह जाने-अनजाने कुछ दिन पहले ‘डूबता जहाज कह चुके हैं।
उधर सपा का परिवारवाद लोगों को हजम नहीं हो रहा। खासकर ऐसे मौके पर जब भाजपा अपने सांसदों, मंत्रियों और विधायकों के परिवार के सदस्यों को जनप्रतिनिधि न बनाने का धड़ल्ले से प्रचार कर रही है।

टिकट निर्धारण में गोपनीय रिपोर्ट को आधार बनाने वाले पार्टी नेता चयन मानक ताख पर रखते जा रहे हैं। आलम यह है कि जिस मंत्री के परिवार से जितने पदाधिकारी हैं, वह सपा रणनीतिकारों का उतना ज्यादा करीबी माना जा रहा है। इस फेहरिस्त में शिवपाल यादव, प्रो.रामगोपाल यादव, आजम खां, महबूब अली, राजकिशोर सिंह, विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह, बलराम यादव, पारसनाथ यादव, रेवती रमण सिंह, नरेश अग्रवाल जैसे कई और नाम हैं।
मुहम्मद आजम खां के बेटे मुहम्मद अब्दुल्ला आजम करीब सवा दो साल पहले राजनीति में सक्रिय हुए। लोकसभा चुनाव के दौरान जब चुनाव आयोग ने आजम खां पर पाबंदी लगा दी थी तब अब्दुल्ला ने ही कमान संभाली थी। उन्होंने जनसभाओं में मंच से आजम खां के विचारों से जनता को अवगत कराया, दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ धरना दिया। चुनाव जीतने के बाद हुए राजनीतिक कार्यक्रमों में भी अब्दुल्ला शामिल होते रहे। पिछले साल अगस्त में समाजवादी पार्टी ने प्रदेशभर में साइकिल रैली निकाली तो आजम खां ने रामपुर में साइकिल रैली की कमान अब्दुल्ला को सौंपी।

उस दिन अब्दुल्ला ने आजम खां के अंदाज में ही तकरीर की। पिछले काफी दिनों से स्वार-टांडा क्षेत्र के लोग आजम खां से अब्दुल्ला को चुनाव लड़ाने की मांग कर रहे थे। तीन दिन पहले स्वार में हुई जनसभा में आजम खां ने अब्दुल्ला को स्वार-टांडा विधानसभा से चुनाव लड़ाने की बात कही। एमटेक शिक्षा प्राप्त अब्दुल्ला मुहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के सीईओ भी हैं।

Courtesy: Jagran.com

 

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