मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया को पलीता लगा रहे कर्मचारी

मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया को पलीता लगा रहे कर्मचारी

नई दिल्ली
मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी ई-ऑफिस प्रोजेक्ट को सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी यू-ट्यूब देखकर पलीता लगा रहे हैं। दरअसल, सरकारी दफ्तरों में यू-ट्यूब इतना ज्यादा देखा जा रहा है कि इसके चलते इंटरनेट बैंडविड्थ बाधित हो रही है। इसके अलावा जूनियर अधिकारियों को काफी छोटे कंप्यूटर मॉनिटर दिए गए हैं जिससे डिजिटाइज्ड फाइलों को देखने में उन्हें परेशानी हो रही है।

ये मुद्दा गुरुवार को सभी मंत्रालयों के लिए आयोजित की गई ई-ऑफिस वर्कशॉप में उठा। ई-ऑफिस के कॉन्सेप्ट को पूरी तरह लागू करने वाले ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वर्कशॉप में बताया कि किस तरह सभी फाइलों को डिजिटाइज किया जाता है ताकि ऑफिस को पूरी तरह पेपरलेस बनाया जा सके। एक लाइव डेमंस्ट्रेशन के ज़रिए समझाया गया कि कैसे 700 पन्नों की फाइल को करीब 6 मिनट में स्कैन किया जा सकता है और सिर्फ 5 मिनट में ई-फाइल बना कर दिखाई भी गई।

अपने प्रेजेंटेशन के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के जॉइंट सेक्रटरी ने दो पेचीदा मसलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “पर्याप्त बैंडविड्थ एक अहम मसला है। ऐसा कहा जाता है कि सरकार में 30 प्रतिशत लोग काम करते हैं और 70 प्रतिशत लोग यू-ट्यूब पर विडियो देखते हैं जो बैंडविड्थ को जाम कर देता है। अपने अधिकारियों से कहें कि वे यह चेक करें कि कौन कितना यू-ट्यूब देख रहा है। अगर इस समस्या को दूर ना किया गया तो ई-ऑफिस योजना कभी सफल नहीं हो पाएगी।”

इसके अलावा मैथ्यू ने बताया कि कि निचले स्तर पर मौजूद कंप्यूटर मॉनिटर बहुत छोटे हैं और साथ उनका RAM भी पर्याप्त नहीं है। मैथ्यू ने कहा, ”जूनियर अधिकारियों को ई-ऑफिस अपनाने के लिए प्रेरित करना एक चुनौती भरा काम है क्योंकि इसके जरिए उनकी मॉनिटरिंग होनी शुरू हो जाएगी। राजपथ दुनिया का सबसे महंगा इलाका है और ये शर्म की बात होगी अगर इसका इस्तेमाल हम पेपर स्टोर करने के लिए करेंगे”

Courtesy: NBT

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