मोदी के मंत्री गडकरी बोले- भारत असंतुष्ट आत्माओं का महासागर, अच्छे दिन कभी नहीं आते, यह नारा गले की हड्डी बन गया

मोदी के मंत्री गडकरी बोले- भारत असंतुष्ट आत्माओं का महासागर, अच्छे दिन कभी नहीं आते, यह नारा गले की हड्डी बन गया

नई दिल्ली: जिस अच्छे दिन के नारे से नरेंद्र मोदी देश के पीएम बने, वही नारा अब सरकार के गले की हड्डी बन गया है. कल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कह दिया कि अच्छे दिन की बात पहले तो मनमोहन सिंह ने की थी और उसके बाद मोदी ने कही लेकिन अब ये उनके लिए गले की हड्डी बन गई है.

इसी अच्छे दिन के नारे की बदौलत 2014 में मोदी ने जीत का डंका पीटा और देश के पीएम बने. मोदी की जीत को करीब सवा दो साल हो गए हैं. पीएम मोदी अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते नहीं थकते और विरोधी अच्छे दिन पर ताना कसते रहते हैं. जहां सब्जियां महंगी होती है, वहीं पेट्रोल भी महंगा होता रहता है.

गडकरी ने झाड़ा अच्छे दिन से पल्ला

पहली बार केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अच्छे दिन से पल्ला झाड़ लिया है. गडकरी का ऐसा कहना मामूली बात नहीं है क्योंकि वे सरकार के बड़े मंत्री हैं और बीजेपी के अध्यक्ष तक रह चुके हैं. अब तक बीजेपी और मोदी सरकार को अच्छे दिन अपना लगता था लेकिन गडकरी ने अच्छे दिन को भी पराया कर दिया.

गडकरी ने यहां तक कह दिया कि ये तो मनमोहन सिंह ने कहा था. गडकरी ने ठीक ही कहा. जनवरी 2014 में दिल्ली में एनआईआर सम्मेलन में पीएम रहे मनमोहन सिंह ने अंग्रेजी में भाषण देते हुए बेटर टाइम (अच्छे समय) का जिक्र किया था. इसके अगले ही दिन तब के बीजेपी के पीएम पद उम्मीदवार रहे नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए अच्छे दिन के नारे को अपना बना लिया था. तब मोदी ने इसके लिए 4-6 महीने का वक्त मांगा था.

अच्छे दिन सच में बन गया है बीजेपी के गले की फांस

अच्छे दिन का नारा पीएम मोदी और बीजेपी के लिए सचमुच गले की फांस बना हुआ है. महंगाई कम होनी थी, महिलाओं की सुरक्षा में बेहतरी आनी थी, बेरोजगारों को नौकरियां मिलनी थी, किसानों के दुख दर्द कम होने थे लेकिन परिस्थिति में कोई खास नहीं आया. अच्छे दिन में सबसे बड़ा काम होना था कि काला धन पकड़ में आते ही हर भारतीय के खाते में 15 लाख आने का, लेकिन 15 लाख नहीं आए. काला धन भी देश नहीं लौटा. महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ रखी है.

पिछले 15 दिन में पेट्रोल महंगा हुआ. रेल किराया भी बढ़ गया. सरकार ने नाम कमाने के कई काम किए लेकिन जब आम आदमी की जेब भरने की बजाय खाली होती है तब सरकार के पास जवाब देना मुश्किल हो जाता है. गडकरी ने अच्छे दिन की बहस छेड़कर सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है. ऐसे समय पल्ला झाड़ा है जब अच्छे दिन आने वाले हैं की जगह ले ली है अच्छे दिन कब आएंगे.

Courtesy: ABP News

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