मिल सकती है अच्छी खबरः ब्याज दरों में हो सकती है कमी

मिल सकती है अच्छी खबरः ब्याज दरों में हो सकती है कमी

नई दिल्लीः ब्याज दरें कम हो सकती है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज उम्मीद जताई कि अगले महीने होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान खुदरा महंगाई दर में कमी और कर्ज की सुस्त रफ्तार जैसे मुद्दों को ध्यान में रखा जाएगा. उधर, अरुण जेटली ने ये भी कहा कि जन-धन खातों में एक-एक रुपये जमा कराने की खबरों को लेकर संबंधित बैंकों से जवाब तलाब किया गया है.

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने तमाम सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक की. खास तौर पर चालू कारोबारी साल की पहले तीन महीनों यानी अप्रैल से जून के दौरान सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति, कर्ज की रफ्तार और विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे जन-धन की प्रगति की समीक्षा की गयी. जेटली ने कहा कि पहले तीन महीनों के दौरान 200 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा की ही शुद्ध मुनाफा हुआ. मुनाफे में कमी की एक बड़ी वजह डूबे कर्ज यानी एनपीए के लिए रकम का प्रावधान करना शामिल था. जेटली से जब पूछा गया कि जब कर्ज की रफ्तार सुस्त है और खुदरा महंगाई दर भी कम हो गयी है तो क्या ऐसे में अगले महीने की 4 तारीख को होने वाली कर्ज नीति की समीक्षा के दौरान नीतिगत ब्याज दर में कमी की वो उम्मीद कर रहे हैं तो उनका जवाब था कि अगले महीने मौद्रिक नीति की समीक्षा शायद मौद्रिक नीति समिति करेगी. उम्मीद की जानी चाहिए कि वो कर्ज की सुस्त रफ्तार और खुदरा महंगाई दर में कमी जैसे तमाम मुद्दों को ध्यान में रखेगी.

गौर करने की बात ये है कि अगस्त के महीने में खुदरा महंगाई दर 6.07 फीसदी से घटकर 5.05 फीसदी पर आ गयी है. ये खुदरा महंगाई दर के लक्ष्य के अनुरुप है. लक्ष्य 4 फीसदी का है जो ज्यादा से ज्यादा 6 फीसदी तक और कम से कम 2 फीसदी तक जा सकती है. चूंकि नीतिगत ब्याज दर में फेरबदल के लिए खुदरा महंगाई दर को आधार बनाया जाता है, इसीलिए इस बात की उम्मीद बढ़ रही है कि अगले महीने 4 तारीख को होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कम से कम चौथाई फीसदी की कमी कर दी जाए. इस उम्मीद को उद्योग के निराशाजनक प्रदर्शन से भी बल मिला है. यहां ये भी ध्यान देने की बात है कि अगले महीने रिजर्व बैंक के गवर्नर अपने बल-बूते पर नीतिगत ब्याज दर में फेरबदल का फैसला नहीं करे, बल्कि ये काम एक मौद्रिक नीति समिति करेगी. छह सदस्यों वाली इस समिति के अध्यक्ष आरबीआई गवर्नर होंगे जो कि इस समय ऊर्जित पटेल हैं.

बैठक के दौरान जन-धन की प्रगति पर भी चर्चा हुई. 7 सितम्बर तक के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि-

  • जन धन योजना के तहत कुल मिलाकर 24 करोड़ 27 लाख खाते खोले गए.

  • इन खातों में कुल मिलाकर 42 करोड़ पांच सौ पांच करोड़ रुपये जमा हैं.

  • कुल खातों में 24 फीसदी से भी ज्यादा खाते ऐसे हैं जिसमें एक भी पैसा जमा नहीं है, यानी ये जीरो बैलेंस वाले खाते हैं.

खबर ये है कि जीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या कम करने के लिए बैंक या बैंकिंग कॉरेस्पान्डेंट अपनी ओर से 1-1 रुपये जमा कर रहे है. इसे लेकर पूछे सवाल पर जेटली ने कहा कि संबंधित बैकों से जवाब तलाब किया गया है. उम्मीद है कि इस बारे में हफ्ते भर में रिपोर्ट आ जाएगी. अरुण जेटली ने इस मौके पर ये जानकारी दी कि एनपीए बढ़ाने में इस्पात और बुनियादी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी रही. लेकिन अच्छी बात ये है कि दोनों ही क्षेत्रों में सुधार हो रहा है. हालांकि बैंकों को एक परेशानी ये भी हो रही है कि वो एनपीए में फंसी कंपनियों के लिए वैकल्पिक प्रमोटर कहां से लाएं.

 

Courtesy: ABPNews

 

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