अब ‘आम’ हुआ रेल बजट, एकसाथ होगा पेशः 92 साल पुरानी परंपरा खत्म करने को कैबिनेट की मंजूरी, रेलवे के बच सकते हैं 10 हजार करोड़

अब ‘आम’ हुआ रेल बजट, एकसाथ होगा पेशः 92 साल पुरानी परंपरा खत्म करने को कैबिनेट की मंजूरी, रेलवे के बच सकते हैं 10 हजार करोड़

नई दिल्‍ली. रेल बजट अब आम बजट के साथ पेश होगा। नरेंद्र मोदी की अगुआई में बुधवार को हुई कैबिनेट की मीटिंग में रेल बजट के आम बजट में मर्जर को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही सरकार ने 92 साल पुरानी परंपरा खत्म करने का फैसला ले लिया। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट ने बजट की तारीख बदलने का भी फैसला किया है। बताया जा रहा है कि मर्ज किया हुआ बजट 28 फरवरी की बजाय 1 फरवरी को पेश हो सकता है। ये भी माना जा रहा है कि इससे घाटे में चल रहा रेलवे 10 हजार करोड़ रुपए बचा सकेगा। क्या बोले फाइनेंस मिनिस्टर…

– फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा, “रेल बजट को आम बजट के साथ पेश किया जाएगा। रेलवे की फंक्शनल ऑटोनॉमी बनी रहे, इस बात का ध्यान रखा जाएगा।”
– आम बजट में रेल का एक्सपेंडीचर और नॉन-एक्सपेंडीचर खर्च का ब्योरा होगा।
– रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, ‘रेलवे को इससे क्या फायदा होगा, इसको देखते हुए फैसला लिया गया है कि आम बजट के साथ ही रेल बजट पेश किया जाएगा।’

क्यों किया गया ऐसा?

– सूत्रों के मुताबिक, इस कवायद का मकसद रेलवे के कामकाज में सुधार लाकर उसे ज्यादा कारगर बनाना है।

– बजट को आम बजट में मिलाने से कैश की दिक्कत का सामना कर रहे रेलवे को 10,000 करोड़ रुपए की बचत होगी क्योंकि तब उसे केंद्र को प्रॉफिट शेयर नहीं लौटाना पड़ेगा।
– बता दें कि ब्रिटिश शासनकाल में 1924 में रेल बजट को जनरल बजट से अलग किया गया था। तर्क ये दिया गया है कि मर्ज किया हुआ बजट पेश करने से रेलवे की दिक्कतें दूर नहीं हो पा रही हैं।
– इससे पहले, बजट के मर्जर पर विचार करने के लिए बने बिबेक देबरॉय पैनल ने अपने नोट में कहा था, “रेल बजट सिर्फ पॉपुलर मेजर्स का जरिया बन गया है। नई ट्रेन चलाना, नए रूट्स बनाना और नई फैक्ट्रीज बनाने के अनाउंसमेंट्स किए जाते हैं लेकिन रेलवे के स्ट्रक्चर को लेकर कुछ नहीं किया जाता।’’

देश की सबसे बड़ी इम्‍प्‍लॉयर है रेलवे

– रेलवे देश की सबसे बड़ी इम्‍प्‍लॉयर है।
– 7वें पे-कमीशन की सिफारिशें लागू होने से उसे करीब 40 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्‍त खर्च करना पड़ा है। यह रेलवे की ओर से पैसेंजर सर्विस के लिए दी जा रही 33 हजार करोड़ की सालाना सब्सिडी से अलग है।
– रेलवे अपने 458 अनफिनिश्‍ड और चालू प्रोजेक्‍ट को पूरा करने के लिए कुल 4.83 लाख करोड़ रुपए का बोझ झेल रही है।
– दोनों बजट के मर्जर के बाद रेलवे का रेवेन्‍यू डेफिसिट और कैपिटल एक्‍सपेंडीचर को अब फाइनेंस मिनिस्‍ट्री को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

फाइनेंशियल ईयर चेंज करने का भी है प्‍लान

भारतीय सरकार अप्रैल से मार्च का फाइनेंशियल ईयर मानती है। हालांकि इस‍ ब्रिटिश विरासत से छुटाकारा पाने की तैयारी में भी सरकार जुटी है। इसके लिए सरकार ने एक कमिटी बनाई है, जो एक नया फाइनेंशियल ईयर अडॉप्‍ट करने की फिजीबिलिटी का अध्‍ययन कर रही है। कमिटी 31 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

अंतिम निर्णय करेगी सीसीपीए

केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को होने वाली बैठक में बजट पर महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय कैबिनेट कमिटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (सीसीपीए) को ही लेना है। सरकार के अनुसार अगर बजट सत्र को एक महीना पहले किया जाता है तो इससे कई फायदे होंगे

Courtesy: Bhaskar

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