तो लखनऊ की इस विधान सभा सीट से लड़ेंगी शीला दिक्षित चुनाव

लखनऊ, कांग्रेस की सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित भी इस बार चुनावी मैदान में उतरेंगी। कांग्रेस के लिए चुनावी मैदान तैयार रहे प्रशांत किशोर ने भी साफ़ संकेत दिए हैं कि चुनावों में शीला दिक्षित को उतारा जाना चाहिए। सूत्रों की माने तो इसके पीके की टीम ने शीला दिक्षित के लिए अलग अलग सीटों के समीकरणों को बटोरना भी शुरू कर दिया है। शीला को लखनऊ मध्य, उन्नाव, वाराणसी या नोएडा में से किसी विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ाया जा सकता है। सूत्रों का ये भी दावा है कि अभी इन सीटों पर बटोरी गयी जानकारियों में से लखनऊ मध्य विधान सभा सीट सबसे फिट सीट लग रही है। इसमें लखनऊ के बाद उन्नाव और वाराणसी और नोएडा को लीस्ट प्रॉयरिटी पर रखा गया है। हालांकि सीट का निर्णय आला कमान करेगी।

आपको बता दें शीला दीक्षित को जबसे कांग्रेस ने अपना सीएम उम्मीदवार घोषित किया था तब से इस बात पर पर्दा था कि शीला खुद चुनाव लड़ेंगी की नहीं। उस दौरान ये भी सामने आया था कि शीला दीक्षित प्रदेश में सीएम उम्मीदवार नहीं बनना चाहती और न ही चुनाव लड़ना चाहती हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस संबंध में शीला दीक्षित का अभी भी खुद चुनाव मैदान में उतरने का मन नही हैं। लेकिन पार्टी की इच्छा है कि वह चुनाव लड़ें।’ प्रशांत किशोर की टीम ने इस बारे में आंकड़े इकट्ठा करने शुरू कर दिए हैं। शीला को लखनऊ या उन्नाव की ही किसी सीट से उतारने की संभावना ज्यादा है। कांग्रेस सूत्र के मुताबिक वाराणसी चूंकि पीएम का संसदीय क्षेत्र है और वहां सरयूपारी ब्राह्मण की संख्या ज्यादा है। वहीं, शीला दीक्षित कान्यकुब्ज ब्राह्मण हैं, लिहाजा यहां ब्राह्मणों में इस तरह का बंटवारा हो सकता है। वहीं नोएडा से भी मैदान में उतरना शीला दीक्षित के लिए इतना सेफ नहीं होगा। दिल्ली की हार अभी जनता भूली नहीं है। इसके अलावा वीके सिंह और डॉ़ महेश शर्मा का प्रभाव भी शीला दीक्षित के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।

क्यों है लखनऊ और उन्नाव अच्छा ऑप्शन

लखनऊ को शीला दीक्षित के लिए सटीक इसलिए माना जा रहा है क्यों कि लखनऊ मध्य से कांग्रेस ब्राह्मण उम्मीदवार को ही उतारना चाहती है। इसके मद्देनज़र इस सीट से सीएम कैंडिडेट को कांग्रेस लाडवा सकती है। मध्य का विकल्प उत्तर विधान सभा भी है। इसके बाद उन्नाव की ओर भी कांग्रेस मन इसलिए बना सकती है क्योंकि वहाँ शीला दिक्षित का ससुराल है।

शीला दिक्षित के चुनाव लड़ना क्यों है ज़रूरी

दरअसल शीला दीक्षित को चुनाव न लड़वाने से विरोधी दल कांग्रेस पर काफी हावी हो जाएंगे और कांग्रेस की छवि को भी नुक्सान पहुंचे गा। चुनाव न लड़ने से संदेश यह जाएगा कि सीएम उम्मीदवार को खुद ही यूपी में फ़तेह की उम्मीद नहीं है। साथ ही वह दिल्ली में पिछला चुनाव हारी हैं तो यहां लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहीं। ये सारे सवाल कांग्रेस को मुश्किल में खड़ा करदेंगे।

Courtesy: Patrika.com

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