कामयाबी की एक और उड़ान, सबसे लंबे मिशन पर निकला PSLV C-35

कामयाबी की एक और उड़ान, सबसे लंबे मिशन पर निकला PSLV C-35

हैदराबाद भारत का ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी सी-35) आज सुबह करीब 9:12 मिनट पर अपने सबसे लंबे मिशन की ओर रवाना हो गया। यह यान अपने साथ आठ उपग्रहों को लेकर गया है जिसमें एक मौसम संबंधी और अन्य सात उपग्रह हैं। पीएसएलवी के साथ भेजे जाने वाले पांच विदेशी उपग्रहों में अल्जीरिया के तीन उपग्रह हैं। इनका नाम है अल्सैट-1 बी, अल्सैट-2 बी, अल्सैट-1 एन। इसमें कनाडा का ‘एनएलएस-19’ और अमेरिका का एक ‘पाथफाइंडर’ उपग्रह शामिल हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक इसके प्रक्षेपण की उल्टी गिनती शनिवार सुबह 8.42 बजे आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा रॉकेट प्रक्षेपण स्थल पर शुरू हुई थी।

पीएसएलवी के साथ लॉन्च किए गए सेटेलाइट्स

अल्जीरिया का ALSAT-1B 

अर्थ ऑब्जरवेशन सेटेलाइट है जो कृषि के साथ साथ मौसम और प्राकृतिक आपदाओं पर नजर रखने के लिए तैयार किया गया है। इसका वजह महज 103 किग्रा है।

ALSAT-2B (अल्जीरिया)

हाई रिजोल्यूशन रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट है जो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेज खींचने में कारगर है। इसका वजह महज 117 किग्रा है।

ALSAT-1N (अल्जीरिया)

अल्जीरियाई छात्रों द्वारा तैयार किया गया एक नैनोसेटेलाइट है। इसका वजह महज 7 किग्रा है।

Pratham 

आईआईटी बॉम्बे द्वारा बनाई गई यह सेटेलाइट का वजन महज 10 किग्रा है।

Pisat

बेंगलुरू की पीईएस यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार की गई इस नेनोसेटेलाइट को रिमोट सेंसिंग के लिए तैयार किया गया है। इसका वजन महज 5.25 किग्रा है।

NLS-19 Canada

अंतिरक्ष का कचरा कम करने के मकसद से बनाई गए नेनोसेटेलाइट कमर्शियल एयरक्राफ्ट पर नजर रखने के लिए बनाई गई है। इसका वजन महज आठ किग्रा है।

Pathfinder-1

अमेरिका द्वारा तैयार किया गया पूरी तरह से कमर्शियल सेट ेलाइट है। यह हाई रिजोल्यूशन इमेजिमंग माइ क्रोसेटेलाइट है जिसका वजन महज 44 किग्रा है।

पीएसएलवी का सबसे लंबा मिशन

इसरो का ये अब तक सबसे लंबा पीएसएलवी उपग्रह लॉन्च मिशन है। इसमें दो घंटे 15 मिनट से अधिक का समय लेगा। 320 टन वजनी पीएसएलवी रॉकेट आठ उपग्रहों को लेकर उड़ान भरेगा। इसमें तीन भारतीय और पांच विदेशी सैटेलाइट हैं। इसका प्रक्षेपण सुबह नौ बजकर 12 मिनट पर श्रीहरीकोटा स्थित लॉन्च पैड से किया जाएगा। रॉकेट का मुख्य भार 371 किलोग्राम का स्कैटसैट-1 उपग्रह होगा, जो समुद्री व मौसम संबंधी अध्ययन से जुड़ा है। इसे उड़ान के 17 मिनट के भीतर 730 किलोमीटर ध्रुवीय सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

250 छात्रों का बनाया पीसेट भी होगा लॉन्च

पीएसएलवी के साथ भेजे जाने वाले दो अन्य भारतीय उपग्रहों में मुंबई की भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा तैयार प्रथम (10 किलोग्राम) और पीईएस विश्वविद्यालय, बेंगलुरू का पीसेट भी शामिल है। इसको कई संस्थानों के छात्रों ने मिलकर बनाया है। यह प्रक्षेपण इन छात्रों के लिए भी बेहद खास होगा।

इन देशों के लिए पसंदीदा है इसराेे

इसकी किफायती तकनीक के मुरीद 20 देश हैं जो अपने उपग्रह इससे प्रक्षेपित कराते हैं। अल्जीरिया, अर्जेंटिना, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इजराइल, इटली, जापान, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका।

Courtesy: jagran.com

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