वादे या जुमले ?

वादे या जुमले ?

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक वैसे तो पार्टी के क्रिया-कल्पों पर केंद्रित होना चाहिए था, मगर प्रधानमंत्री दबाव था कि वह उरी हमले को लेकर कुछ ठोस बातें कहें। हालांकि वैसा कुछ नहीं। किसी भी दृष्टिकोण से यह नहीं लगा कि यह वही पार्टी है, जो राष्ट्रवाद के सहारे देश के प्रति गद्दारी करने वाली देसी और विदेशी ताकतों को खत्म करने पर आमादा है। चूंकि अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए घूम-फिरकर पार्टी को वही वादे दोहराने पड़े कि ‘सरकार गरीबी और बेरोज़गारी से लड़ने को तैयार है’। यह युद्ध तोह 2014 के शुरूआती महीनों में ही लड़ने का वादा करके यह पार्टी पूर्ण बहुमत लेकर आयी है। हालांकि पिछले ढाई सालों के आंकड़े बताते हैं कि बेरोज़गारी और गरीबी उन्मूलन के मोर्चे भी यह सरकार बुरी तरह पराजित होने के कगार पर है।

काले धन को सफ़ेद करने की स्कीम कि भी आयी EXPIRY DATE 

काले धन को सफ़ेद करने की केंद्र सरकार की स्कीम 30 सितंबर को खत्म हो रही है। बड़े-बड़े वादे किये गए थे कि जो अपनी आय को घोषित नहीं करेगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। अब मोदीजी के पास अपनी बात पर खरा उतारने का वक़्त है।

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