जस्टिस काटजू का PAK को ऑफर: कश्मीर चाहिए तो बिहार भी लेना पड़ेगा, फिराक कहते थे- हिंदुस्तान को बिहार से ज्यादा खतरा

जस्टिस काटजू का PAK को ऑफर: कश्मीर चाहिए तो बिहार भी लेना पड़ेगा, फिराक कहते थे- हिंदुस्तान को बिहार से ज्यादा खतरा

नई दिल्ली. उड़ी हमले के बाद पूरे देश में पाकिस्तान को लेकर विरोध है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने फेसबुक पर पाकिस्तान को अजीबोगरीब ऑफर दिया है। उन्होंने लिखा- “पाकिस्तान के लिए एक पैकेज है। अगर वे कश्मीर लेना चाहते हैं तो उन्हें बिहार भी लेना पड़ेगा। हम आपको अकेले कश्मीर नहीं दे सकते।” काटजू ने ये किया पोस्ट

काटजू ने लिखा, “पाकिस्तान और हमारे बीच विवाद को आइए, खत्म करते हैं।”
“आप कश्मीर ले सकते हैं, लेकिन इसके साथ एक कंडीशन है। आपको बिहार भी लेना होगा। ये एक पैकेज डील है। या तो आप पूरा पैकेज लें, नहीं तो कुछ नहीं मिलेगा। या तो आप दोनों कश्मीर और बिहार लें या फिर कुछ नहीं। क्या आपको ये डील मंजूर है?”
काटजू ने ये भी लिखा, “अटल बिहारी वाजपेयी ने आगरा समिट के दौरान परवेज मुशर्रफ को ये ऑफर दिया था, लेकिन मुशर्रफ ने अपनी मूर्खता से रिजेक्ट कर दिया। अब एक बार फिर ये ऑफर आया है। मत चूको चौहान।”
काटजू ने ये भी कहा, “इलाहाबाद में मेरे अंग्रेजी के टीचर रहे फिराक गोरखपुरी ने कहा था कि हिंदुस्तान को खतरा पाकिस्तान से नहीं, बिहार से है।”
हालांकि, बाद में सफाई देते हुए काटजू ने कहा कि ये ये सिर्फ मजाक था। इस तरह की कई बातें हम लोग कहते रहते हैं। इसके लिए इतना गंभीर होने की जरूरत नहीं है।

जेडीयू ने काटजू के बयान का किया विरोध
जस्टिस काटजू के इस पोस्ट से बिहार के राजनीतिक दलों में काफी नाराजगी है।
जेडीयू स्पोक्सपर्सन नीरज कुमार कहा कि हे प्रभु, इन्हें माफ कर दो। काटजू नहीं जानते कि ये कौन-सा अपराध कर रहे हैं।
“स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में बिहार का खासा योगदान रहा है, साथ ही साथ गांधी के चंपारण सत्याग्रह से लेकर सामाजिक सद्भाव के आंदोलनों में भी बिहार की अहम भूमिका रही है। ऐसी स्थिति में बिहार की विरासत को बिना जाने जस्टिस काटजू का कमेंट सही नहीं है।”

पहले भी दे चुके हैं ये बयान
जस्टिस काटजू ने महात्मा गांधी को ब्रिटिश एजेंट और सुभाष चंद्र बोस को जापानी एजेंट बताया था। इस बयान को लेकर संसद में भी हंगामा हुआ था।
कभी आम आदमी पार्टी की नेता रही शाजिया इल्मी को उन्होंने किरण बेदी से सुंदर बताया था। उन्होंने कहा था, “मेरे जैसा आदमी भी जो आम तौर पर वोट नहीं देता (क्योंकि मैं सभी भारतीय राजनेताओं को लफंगा और धूर्त समझता हूं), शाजिया को वोट देता!”
काटजू ने सलमान रुश्दी को ‘मामूली’ और ‘औसत दर्जे का लेखक’ कहा था। उनका कहना था कि रुश्दी का ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ मुश्किल से महान लिटरेचर की कैटेगरी में आता है।
काटजू ने एक सेमिनार में कहा था कि ‘90% भारतीय बेवकूफ’ होते हैं जो धर्म के नाम पर आसानी से बहकावे में आ जाते हैं।
सचिन पर निशाना साधते हुए बोले थे, “क्रिकेटरों और फिल्मी सितारों को भारत रत्न देना इस सम्मान का मजाक उड़ाना होगा, क्योंकि इन लोगों का कोई ‘सामाजिक सरोकार’ नहीं होता।”
काटजू ने एक अंग्रेजी अखबार में लिखते हुए दावा किया था कि तमिलनाडु में जिला अदालत के एक जज पर करप्शन के गंभीर आरोप होने के बावजूद उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया था। उनका ये भी दावा था कि यूपीए सरकार के दौरान ये हुआ था।
2012 में पटना में उन्होंने कहा था, “मैंने सुना है कि लालू के राज में फ्रीडम ऑफ प्रेस होती थी, लेकिन अब बिहार में फ्रीडम ऑफ प्रेस नहीं है।”
उन्होंने कथित ‘देशद्रोह’ के मामले में कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को अरेस्ट करने का भी विरोध किया था।
काटजू ने सनी लियोनी के लिए कहा था कि उनके अतीत के लिए उन्हें क्रिटिसाइज नहीं किया जाना चाहिए।

Courtesy: bhaskar.com

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