मुलायम सिंह यादव का ‘गायत्री’ मंत्र

मुलायम सिंह यादव का ‘गायत्री’ मंत्र

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे शख्स को ना बनाया जाए मंत्री

शपथ ग्रहण से पहले रविवार रात अखिलेश यादव राज्यपाल राम नाईक से मिले थे. इसका कनेक्शन भी गायत्री प्रजापति से है. IPS अफसर अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने राज्यपाल से गायत्री की शिकायत की थी. उन्होंने माग की थी कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व्यक्ति को मंत्री ना बनाया जाए. अखिलेश ने राज भवन जाकर सफाई दी. फिर राज्यपाल माने.

गायत्री प्रजापति पहली बार 2012 में अमेठी से समाजवादी पार्टी के विधायक बने. मुलायम सिंह की कृपा से उन्होंने अखिलेश यादव के साथ 15 मार्च 2012 को पहली बार मंत्री की शपथ ली. तब वे खनन विभाग के राज्य मंत्री बनाये गए थे. कुछ ही महीनों बाद वे स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री बन गए.

गायत्री प्रजापति को रत्ती भर पसंद नहीं करते थे अखिलेश यादव

IAS अफसर जीवेश नंदन तब खनन के प्रमुख सचिव थे. गायत्री से परेशान होकर उन्होंने उनके साथ काम करने से मना कर दिया था. कुछ ही महीनों बाद गायत्री प्रमोशन पाकर कैबिनेट मंत्री बन गए. उन पर नेताजी की ख़ास कृपा की चर्चा अब दिल्ली तक पहुंच गयी थी. अखिलेश यादव उन्हें रत्ती भर पसंद नहीं करते थे. लेकिन गायत्री को भला किस बात की चिंता. मुलायम के बाद अब ‘लक्ष्मी’ की कृपा भी उन पर बरसने लगी थी.

BPL कार्ड होल्डर से करोड़ों के कर्ता-धर्ता बने गायत्री

अभी हाल में ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी में चल रहे अवैध खनन की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे. इसके बाद ही अखिलेश यादव ने उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था. लेकिन मुलायम सिंह की ज़िद के आगे उनकी एक नहीं चली और गायत्री की वापसी हो गयी. अवैध खनन और आय से अधिक संपत्ति को लेकर गायत्री के खिलाफ लोकायुक्त के यहां शिकायत भी हुई. 2007 में जब वे पहली बार चुनाव लड़े थे तो उनके पास 91,436 रुपये थे. लेकिन अब वे अरबों के मालिक है. दस सालों में BPL कार्ड होल्डर से गायत्री करोड़ों के कर्ता धर्ता कैसे बने. ये तो वही जाने. लेकिन उनकी महिमा अपरंपार है.

Courtesy: ABP News

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