…तो अब सर्जिकल स्‍ट्राइक के मुद्दे पर लड़ा जाएगा यूपी, पंजाब, गुजरात का चुनाव, 2019 के लिए आ सकता है इससे भी बड़ा कोई मुद्दा

…तो अब सर्जिकल स्‍ट्राइक के मुद्दे पर लड़ा जाएगा यूपी, पंजाब, गुजरात का चुनाव, 2019 के लिए आ सकता है इससे भी बड़ा कोई मुद्दा

अब ये साफ हो गया है कि भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में की गई सर्जिकल स्ट्राइक आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक अहम राजनीतिक मुद्दा होगी। अभी तक विपक्षी पार्टियां नरेंद्र मोदी सरकार और बीजेपी पर सर्जिकल स्ट्राइक के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगा रही थीं लेकिन शुक्रवार (7 अक्टूबर) को कांग्रेस उपाध्यक्ष के “जवानों के खून की दलाली” वाले बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने साफ किया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी। शाह ने कहा, “हम इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहते लेकिन इस मुद्दे को लेकर जनता के सामने जरूर जाएंगे क्योंकि सेना की हौसलाअफजाई करना हर जिम्मेदार राजनीतिक पार्टी का दायित्व है और ये जो सर्जिकल स्ट्राइक हुई है उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की, सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की जो नीति है उसकी भी उद्घोषणा होती है, इसका भी परिचय मिलता है।” अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात समेत पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव हैं।

शाह ने जिस तरह “राजनीति नहीं करने” लेकिन मुद्दे को “जनता के बीच लेकर जाने” की घोषणा की है उससे साफ हो गया है कि बीजेपी आगामी चुनावों में अपनी पुरानी “दोहरी रणनीति” अपनाएगी। पिछले लोक सभा चुनाव में राजनीतिक विश्लेषकों में इस बात को लेकर काफी माथापच्ची हुई थी कि बीजेपी और मोदी चुनाव प्रचार के दौरान “विकास की राजनीति” पर जोर देने के कारण बहुमत मिला था या “सांप्रदायिक ध्रुवीकरण” में सफलता हासिल करने की वजह से। लोक सभा चुनाव के दौरान पार्टी के तत्कालीन पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जनता के बीच “विकास और भ्रष्टाचार” का मुद्दा उठाते रहे लेकिन बीजेपी के स्थानीय नेता सांप्रदायिकता को हवा देते रहे। बीजेपी की इस “दोहरी रणनीति” की काट विपक्षी दल नहीं निकाल पाए।

शुक्रवार को जब यूपी में सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े पोस्टरों और बयानों के बाबत शाह से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “तहसील अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष ने पोस्टर लगा दिया तो उसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी से जानी जाती है, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज से जानी जाती है। बीजेपी के किसी भी बड़े नेता ने बयान नहीं दिया है।” जाहिर है कि बीजेपी के अगली पंक्ति के नेता इस तरह के बयानों से बच रहे हैं। कुछ वैसे ही जैसे लोक सभा चुनावों के पहले और बाद दूसरी और तीसरी कतार के बीजेपी नेता मोदी विरोधियों को पाकिस्तान भेजते रहे और रामजादे-हरामजादे के बीच फर्क बताते रहे और पहली कतार के बड़े नेता विकास और भ्रष्टाचार से जुड़े “जुमले” उछालते रहे। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद भी असहिष्णुता, राष्ट्रवाद, जेएनयू, रोहित वेमुला, मोहम्मद अखलाक, गोरक्षा और बीफ के मुद्दे पर बीजेपी के तहसील-जिला-प्रदेश स्तर के नेता भड़काऊ बयान देते रहे और “बड़े नेता” अधिकतम चुप ही रहे। बोले भी तो देर से “डैमेज कंट्रोल” मोड में।

Courtesy:Jansatta

 

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